करौली: यूजीसी ‘काले कानून’ के विरोध में भारत बंद का व्यापक असर, सवर्ण समाज ने सड़कों पर उतरकर जताया आक्रोश

करौली, यूजीसी (UGC) के नए नियमों के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ का करौली जिले में ऐतिहासिक असर देखने को मिला। जिला मुख्यालय से लेकर तमाम उपखंड क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियाँ पूरी तरह ठप रहीं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे “काला कानून” करार दिया और जमकर नारेबाजी की।

बाजारों में पसरा सन्नाटा, ठहर गई व्यापारिक गतिविधियाँ

बंद के आह्वान पर सुबह से ही करौली शहर के मुख्य बाजार बंद रहे। व्यापारियों ने स्वेच्छा से समर्थन देते हुए शटर नहीं उठाए, जिससे करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। खरीदारी के लिए आए आमजन को खाली हाथ लौटना पड़ा। जिले के सपोटरा, मंडरायल, टोडाभीम और हिंडौन सिटी में भी बंद का असर 100% रहा।

उपखंडों में विरोध प्रदर्शन की प्रमुख झलकियाँ:

  • मंडरायल: सवर्ण समाज के युवाओं और प्रबुद्धजनों ने एक विशाल रैली निकाली। रैली के पश्चात राष्ट्रपति के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
  • टोडाभीम: यहाँ प्रदर्शनकारियों का सबसे उग्र रूप देखने को मिला। सवर्ण समाज ने “मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारों से आसमान गुंजा दिया।
  • हिंडौन सिटी: यहाँ भी एकजुट होकर प्रदर्शन किया गया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून में संशोधन या इसे वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

आंदोलन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। हर प्रमुख चौराहे और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सड़कों पर युवाओं और व्यापारियों का आक्रोश साफ झलक रहा था।

क्यों हो रहा है विरोध?

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को प्रभावित करेंगे और सवर्ण समाज के हितों के साथ खिलवाड़ हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।

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