जयपुर, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गुरुवार को पत्रकारिता के आदर्शों और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर देते हुए कहा कि मीडिया को केवल सूचना का स्रोत नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ बनना चाहिए। वे जयपुर में नेशनल मीडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
पत्रकारिता: लोक शिक्षा और क्रांति का माध्यम
राज्यपाल ने अपने संबोधन में पत्रकारिता को ‘लोक शिक्षा’ का सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण करते हुए कहा कि उस दौर में मीडिया ने जनता को जागरूक करने और राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
राज्यपाल के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- सूचना के साथ विचार: समाचार पत्रों को केवल खबरें ही नहीं छापनी चाहिए, बल्कि उन्हें स्वस्थ विचारों का संवाहक भी बनना चाहिए।
- लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ इसलिए माना जाता है क्योंकि यह न केवल जनता के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि उन्हें कर्तव्यों के प्रति सजग भी बनाती है।
- इतिहास का स्मरण: राज्यपाल ने 29 जनवरी 1780 को निकले देश के पहले अंग्रेजी अखबार ‘हिक्की गजट’ और 30 मई को हिंदी के पहले अखबार ‘उदंत मार्तंड’ (संपादक: जुगल किशोर शुक्ल) के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पत्रकारिता, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह नई पीढ़ी के पत्रकारों को नैतिकता और सत्यनिष्ठा के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
पत्रकारिता दिवस का महत्व
राज्यपाल ने बताया कि हर वर्ष 30 मई को ‘भारतीय पत्रकारिता दिवस’ मनाया जाता है, जो भारतीय दृष्टिकोण से पत्रकारिता की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने वर्तमान समय में ‘भारतीय दृष्टिकोण’ और ‘सकारात्मक पत्रकारिता’ की आवश्यकता पर बल दिया ताकि समाज में विखंडन के बजाय एकता का संदेश जाए।
समारोह में नेशनल मीडिया फाउंडेशन के पदाधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
