अजमेर, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) ने 12 फरवरी से शुरू होने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए इस बार बेहद कड़े नियम लागू किए हैं। परीक्षा में नकल और भाई-भतीजावाद की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए बोर्ड ने ‘नजदीकी रिश्तेदारों’ से जुड़े ड्यूटी प्रावधानों में बड़ा बदलाव किया है।
रिश्तेदारों की लंबी सूची: इन कार्मिकों की ड्यूटी पर रोक
बोर्ड द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी परीक्षा केंद्र के स्टाफ (केन्द्राधीक्षक से लेकर वीक्षक तक) का कोई भी नजदीकी रिश्तेदार उस केंद्र पर परीक्षा दे रहा है, तो उस कार्मिक को परीक्षा कार्य से मुक्त रखा जाएगा। रिश्तों के दायरे में केवल परिवार ही नहीं, बल्कि साला-साली, भांजा-भांजी, पौत्र-पौत्री और चचेरे भाणेज-भाणीज तक को शामिल किया गया है।
- घोषणा अनिवार्य: यदि किसी अधिकारी का निकट संबंधी बोर्ड परीक्षा दे रहा है, तो उसे इसकी लिखित जानकारी बोर्ड और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पहले ही देनी होगी।
- विषय शिक्षक पर पाबंदी: जिस दिन जिस विषय की परीक्षा होगी, उस दिन उस विषय के शिक्षक की ड्यूटी वीक्षक के रूप में नहीं लगाई जाएगी।
परीक्षा केंद्रों के लिए ‘सरप्राइज’ व्यवस्था
नकल रोकने के लिए बोर्ड ने वीक्षकों (Invigilators) के लिए ‘सस्पेंस’ रणनीति अपनाई है:
- डेली रूम चेंज: वीक्षकों के ड्यूटी कक्ष हर रोज बदले जाएंगे।
- गोपनीयता: परीक्षा शुरू होने के अंतिम समय तक किसी भी वीक्षक को यह नहीं पता होगा कि उसकी ड्यूटी किस कमरे में लगाई गई है।
- बाहरी संपर्क बंद: परीक्षा के दौरान केंद्र पर नियुक्त कोई भी कार्मिक किसी बाहरी व्यक्ति से नहीं मिल सकेगा और न ही केंद्र छोड़ सकेगा।
महिला परीक्षार्थियों की सुरक्षा और सुविधा
बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन परीक्षा केंद्रों पर छात्राएं (गर्ल्स कैंडिडेट्स) परीक्षा दे रही हैं, वहां न्यूनतम दो महिला वीक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
इन कड़े प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाना और किसी भी प्रकार के अनुचित लाभ की संभावना को शून्य करना है। बोर्ड प्रशासन का मानना है कि इन बदलावों से ईमानदार परीक्षार्थियों का मनोबल बढ़ेगा।
