JLF 2026: ‘पुतिन का 3 दिन का मिशन बना लंबा युद्ध, रूस को भुगतना पड़ रहा खामियाजा’, जयपुर में बोले पोलैंड के डिप्टी पीएम

जयपुर, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के चौथे दिन फ्रंट लॉन में आयोजित सत्र ‘A Continent in Crisis: Russia, Ukraine and the European Story’ में वैश्विक राजनीति की गर्माहट महसूस की गई। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि व्लादिमीर पुतिन ने जिसे महज तीन दिन का ‘स्पेशल ऑपरेशन’ समझा था, वह अब एक अंतहीन युद्ध बन चुका है।

युद्ध जमीन का नहीं, पहचान का है

सिकोरस्की ने कहा कि यह संघर्ष केवल भौगोलिक सीमाओं के लिए नहीं, बल्कि यूक्रेन की भू-राजनीतिक दिशा और उसकी पहचान को खत्म करने की कोशिश है। उन्होंने मानवीय त्रासदी का जिक्र करते हुए बताया कि -20 डिग्री की कड़ाके की ठंड में लाखों यूक्रेनी बुनियादी सुविधाओं के बिना रहने को मजबूर हैं।

“रूस और यूक्रेन के बीच भाषा की समानता हो सकती है, लेकिन उनकी राजनीतिक सोच अलग है। रूस की जड़ें केंद्रीकृत सत्ता में हैं, जबकि यूक्रेन का इतिहास लोकतांत्रिक अधिकारों और संसदों से जुड़ा रहा है।”

रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी पर चेतावनी

पोलैंड के डिप्टी पीएम ने रूस और चीन के बीच बढ़ते गठबंधन को रूस के लिए आत्मघाती बताया। उन्होंने तर्क दिया कि:

  • रूस आर्थिक रूप से पूरी तरह चीन पर निर्भर होता जा रहा है।
  • रूस अपनी राष्ट्रीय संपदा चीनी उत्पादों पर खर्च कर रहा है, जिससे भविष्य में उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता खत्म हो सकती है।

सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी

सिकोरस्की ने साफ किया कि अब यूरोपीय देशों को अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रक्षा व्यवस्था खुद मजबूत करनी होगी। उन्होंने बताया कि पोलैंड अपनी जीडीपी का 4.7% रक्षा पर खर्च कर रहा है और यूक्रेन को सैन्य सहायता देने में अग्रणी रहा है।

भारत की भूमिका का उल्लेख

भारत की विदेश नीति पर चर्चा करते हुए सिकोरस्की ने कहा कि भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चूंकि भारत पश्चिम और रूस दोनों के साथ संवाद की स्थिति में है, इसलिए शांति की स्थापना में उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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