उदयपुर में “सहकार से समृद्धि” सम्मेलन का आगाज: 2047 तक जीडीपी में सहकारिता का योगदान 3 गुना करने का लक्ष्य

उदयपुर, भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ गुरुवार को उदयपुर के होटल अरावली में हुआ। “सहकार से समृद्धि” के विजन को धरातल पर उतारने के लिए आयोजित इस बैठक में देश भर के सहकारिता सचिव और रजिस्ट्रार मंथन कर रहे हैं।


सहकार के बिना समृद्धि संभव नहीं: डॉ. आशीष कुमार भूटानी

कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि समावेशी विकास के लिए सहकारिता क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण अनिवार्य है। उन्होंने बनासकांठा (गुजरात) के सफल मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी सहकारिता ने डेयरी और वृक्षारोपण में क्रांति ला दी है।

सचिव द्वारा दिए गए मुख्य सुझाव:

  • नियमों का सरलीकरण: सहकारी क्षेत्र को बाधा मुक्त बनाने के लिए जटिल नियमों को सरल करना होगा।
  • बैंकिंग सुधार: आरबीआई द्वारा बिना पूर्व अनुमति 10 नई शाखाएं खोलने की छूट का बैंक लाभ उठाएं।
  • संस्थागत समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों के अधीन कार्यरत सहकारी संस्थाएं प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी तालमेल से काम करें।
  • निर्णय प्रक्रिया: अधिकारी गांवों का दौरा कर जनता से सीधा फीडबैक लें।

2047 तक का विजन: जीडीपी में बड़ी हिस्सेदारी

सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन ने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि 6 जुलाई 2021 को मंत्रालय के गठन के बाद से 100 से अधिक नई पहल की गई हैं।

  • लक्ष्य: वर्ष 2047 तक देश की जीडीपी में सहकारिता के योगदान को 3 गुना तक बढ़ाना।
  • प्रसार: सहकारिता की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ें।
  • शिक्षा एवं प्रशिक्षण: सहकारिता आंदोलन को तकनीकी और शैक्षणिक मजबूती देने के लिए ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ की स्थापना की गई है।

राजस्थान की मेजबानी और प्रगति

राजस्थान की सहकारिता शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार आनन्दी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान में सहकारी समितियां केवल सुधारों से ही नहीं, बल्कि नई कल्पनाओं के दौर से गुजर रही हैं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि राजस्थान ने पैक्स (PACS), डेयरी और मत्स्य पालन समितियों के विस्तार में राष्ट्रीय विजन के अनुरूप उल्लेखनीय प्रगति की है।

आगामी कार्ययोजना

दो दिवसीय इस मंथन में निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत रणनीति बनाई जा रही है:

  1. राष्ट्रीय सहकारिता नीति को राज्यों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ढालना।
  2. पैक्स (PACS) का सुदृढ़ीकरण और कम्प्यूटरीकरण।
  3. सहकारी बैंकों के बोर्ड संचालन में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का समावेश।
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