राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026: ‘MSME’ हैं विकास के असली इंजन, राज्यों की नीतियों से मिलेगी वैश्विक पहचान

जयपुर, जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी (JECC) में आयोजित हो रहे ‘राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026’ के दूसरे दिन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) की मजबूती पर गंभीर मंथन हुआ। समिट के मुख्य हॉल में आयोजित फायरसाइड चैट ‘MSME एज ग्रोथ इंजंस: द स्टेट्स रोल’ (MSME विकास के इंजन के रूप में: राज्यों की भूमिका) सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि देश की आर्थिक समृद्धि का रास्ता इन्हीं छोटी इकाइयों से होकर गुजरता है।

अनुकूल माहौल और इंफ्रास्ट्रक्चर ही सफलता की कुंजी

चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव (उद्योग), डॉ. पी. अलबालागन ने कहा कि किसी भी राज्य में MSME सेक्टर की तरक्की के लिए केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण ‘इकोसिस्टम’ का निर्माण जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा:

“अनुकूल नीतियां, मजबूत इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार का सक्रिय सहयोग ही वे स्तंभ हैं, जो छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।”

शुरुआती प्रोत्साहन और GST दरों का प्रभाव

आंध्र प्रदेश MSME DC के चेयरमैन, टी. शिवशंकर राव ने छोटे उद्योगों की शुरुआती चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छोटी इकाइयों को अपने अस्तित्व और विस्तार के लिए शुरुआत में विशेष प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है।

  • सपोर्टिव पॉलिसी: राज्यों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो उद्योगों के शुरुआती संघर्ष को कम करें।
  • GST में राहत: उन्होंने भारत सरकार द्वारा GST दरों में की गई कमी की सराहना करते हुए कहा कि इससे न केवल MSME सेक्टर को राहत मिली है, बल्कि पूरे इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर को मजबूती मिली है।

समृद्धि और रोजगार का केंद्र: MSME

सत्र का संचालन कर रहे टाई ग्लोबल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के चेयरमैन, मुरली बुक्कापट्टनम ने चर्चा को विराम देते हुए भविष्य का खाका रखा। उन्होंने कहा कि भारत के हर राज्य में अपार क्षमताएं मौजूद हैं। MSME सेक्टर के विकास से न केवल आर्थिक समृद्धि आएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे।


सत्र की मुख्य बातें:

  • भागीदारी: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के नीति निर्माताओं के बीच संवाद।
  • फोकस: क्लस्टर आधारित विकास, नियामक सरलीकरण और ऋण तक आसान पहुंच।
  • उद्देश्य: छोटे उद्योगों को ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में स्थापित कर भारत की अर्थव्यवस्था को गति देना।
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