जयपुर: स्मार्ट तकनीक के इस्तेमाल और जलवायु आपदाओं (चक्रवात, बाढ़, अत्यधिक तापमान) के दौरान विद्युत आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए जयपुर में आयोजित ’10वीं डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट-2026′ (DUM-2026) के दूसरे दिन बुधवार को गहन मंथन हुआ।
आयोजन के दौरान दो प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में जहां ‘स्मार्ट ग्रिड, सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और जयपुर डिस्कॉम की डिजिटल ट्विन पहल’ पर चर्चा हुई, वहीं दूसरे सत्र में ‘जलवायु आपदाओं से विद्युत वितरण नेटवर्क (DISCOMs) की भौतिक संपत्तियों की सुरक्षा’ (Climate Resilience) पर देश-विदेश के ऊर्जा विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

जलवायु आपदाओं से बिजली नेटवर्क बचाने पर जोर “Climate Resilience and Securing the Physical Assets of DISCOMs” विषय पर आयोजित विशेष सत्र की अध्यक्षता भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वितरण) शशांक मिश्रा ने की।
- चक्रवात ‘दाना’ का अनुभव: TPCODL के सीईओ गजानन काले ने हाल ही में ओडिशा में आए चक्रवात ‘दाना’ के दौरान GIS मैपिंग, संसाधनों की त्वरित तैनाती और समन्वित प्रयासों से बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल करने के सफल अनुभव साझा किए।
- बाढ़रोधी सबस्टेशन और अंडरग्राउंड केबलिंग: BRPL के हेड (स्ट्रैटेजिक प्रोजेक्ट्स) विष्णु शंकर श्रीवास्तव ने बाढ़रोधी सबस्टेशन बनाने, भूमिगत (underground) केबलिंग और अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए ‘इमरजेंसी माइक्रोग्रिड’ विकसित करने पर जोर दिया।

- दक्षिण कोरिया की आधुनिक तकनीक: दक्षिण कोरिया की रिफॉर्मटेक कंपनी के प्रिंसिपल इंजीनियर सॉन्ग यंगसब ने अत्याधुनिक ‘CLF फ्यूज तकनीक’ के बारे में बताया। यह तकनीक फॉल्ट के दौरान उत्पन्न होने वाले आर्क को सीलबंद यूनिट में नियंत्रित करती है, जिससे उपकरणों में आग लगने या भारी नुकसान का जोखिम कम हो जाता है।
सौर तूफानों का ट्रांसफॉर्मर पर प्रभाव
मुंबई विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल नारायण राघव ने एक बेहद अहम विषय पर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने बताया कि सौर गतिविधियों और भू-चुंबकीय तूफानों से उत्पन्न होने वाले ‘Geomagnetically Induced Currents (GIC)’ का ट्रांसफॉर्मरों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन तूफानों के कारण ट्रांसफॉर्मरों में अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है, जिससे परिचालन संबंधी बड़ी समस्याएं आ सकती हैं। इसके लिए रियल-टाइम निगरानी और सुरक्षात्मक उपाय अपनाना जरूरी है।
AI और जयपुर डिस्कॉम की ‘डिजिटल ट्विन’ पहल की हुई सराहना
इससे पहले, केपीएमजी के पार्टनर विकास गाबा के संचालन और ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के महानिदेशक आलोक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में ‘डिजिटल ट्विन’ (Digital Twin) और AI आधारित नेटवर्क प्रबंधन पर चर्चा हुई।

- डिजिटल ट्विन पहल: सत्र में जयपुर डिस्कॉम की इस पहल की सराहना की गई, जिसके तहत खंभों, लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और सब-स्टेशनों का 3D डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। इससे तकनीकी खराबियों की तुरंत पहचान और आपूर्ति बहाली में बड़ी मदद मिलेगी।
- पीक डिमांड मैनेजमेंट: 165 गीगावाट सौर ऊर्जा के विस्तार के बीच शाम के समय बढ़ने वाली मांग (Peak Demand) को संभालने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और AI-IoT आधारित होम एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (HEMS) को भविष्य की जरूरत बताया गया।
समन्वित रणनीति है समय की मांग
सत्र के अंत में सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि स्मार्ट मीटर डेटा का सही उपयोग, AI आधारित ‘प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस’ (भविष्यवाणी आधारित रखरखाव), मजबूत ट्रांसफॉर्मर, जोखिम आधारित योजना और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के जरिए ही पावर नेटवर्क को भविष्य की जलवायु आपदाओं से सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को किसी भी मौसम में विश्वसनीय और किफायती बिजली मिल सकेगी।