करौली नगर निकाय चुनाव 2026: 28 पार्षदों के साथ कांग्रेस मजबूत, लेकिन 15 निर्दलीयों के सहारे बाजी पलटने की फिराक में भाजपा

करौली। करौली नगरपरिषद सभापति पद के चुनाव को लेकर शहर का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। नामांकन के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। सभापति पद के लिए भाजपा की ओर से नवनिर्वाचित पार्षद वीरेंद्र शर्मा और कांग्रेस की ओर से नवनिर्वाचित पार्षद सुनील सैनी चुनावी मैदान में उतरे हैं। दोनों ही दलों द्वारा अपने-अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा के बाद मुकाबला अब पूरी तरह आमने-सामने का हो गया है।

रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष दाखिल किया पर्चा

हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव में दोनों प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों से पार्षद चुने गए हैं। भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र शर्मा वार्ड संख्या 50 से विजय हासिल कर पहुंचे हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनील सैनी ने वार्ड संख्या 3 से जीत दर्ज की है। दोनों प्रत्याशियों ने वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी में रिटर्निंग अधिकारी राकेश कुमार के समक्ष अपने नामांकन पत्र प्रस्तुत किए। नामांकन के दौरान दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया।

करौली नगरपरिषद का सीट समीकरण (कुल वार्ड: 55)

सभापति पद पर कब्जा जमाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े (बहुमत) को लेकर दोनों दल गणित बिठाने में जुटे हैं:

  • कुल वार्ड: 55
  • कांग्रेस: 28
  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 11
  • निर्दलीय: 15
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP): 01
  • बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े: 28

आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो 55 वार्डों वाली नगरपरिषद में कांग्रेस 28 सीटों के साथ स्पष्ट रूप से बहुमत के आंकड़े को छू रही है। वहीं, भाजपा 11 सीटों पर सिमटने के बावजूद 15 निर्दलीय और 1 बसपा पार्षद के सहारे चुनावी बाजी पलटने की पूरी रणनीति बना रही है।

पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू, जोड़-तोड़ तेज

सीटों के इस नाजुक गणित को देखते हुए दोनों ही दलों में क्रॉस वोटिंग और सेंधमारी का डर सता रहा है। कांग्रेस जहां अपने सभी 28 पार्षदों को एकजुट रखने की जद्दोजहद में लगी है, वहीं भाजपा निर्दलीयों को अपने पाले में लाने के साथ-साथ कांग्रेस खेमे में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, किसी भी तरह के खरीद-फरोख्त या प्रभाव से बचाने के लिए दोनों पार्टियों ने अपने समर्थक पार्षदों की सुरक्षित स्थानों पर बाड़ेबंदी कर दी है। बैठकों और गुप्त चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।

फैसले पर टिकी शहर की निगाहें

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब समीक्षा और नाम वापसी के चरणों पर निगाहें टिकी हैं। यदि दोनों में से कोई भी नाम वापस नहीं लेता है, तो तय तारीख को मतदान के जरिए सभापति का फैसला होगा। करौली नगरपरिषद में अपना बोर्ड बनाकर सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब देखना यह होगा कि सुनील सैनी कांग्रेस का गढ़ बचा पाते हैं या वीरेंद्र शर्मा निर्दलीयों के दम पर करिश्मा कर दिखाते हैं।


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