सरकार के आंकड़ों में सड़क हादसों का ‘बड़ा खेल’!,

सरकार के आंकड़ों में सड़क हादसों का ‘ बड़ा खेल’!,हादसे कम नहीं…सरकारी रिकॉर्ड ही अधूरे ! पुलिस ने गिने 1.59 लाख, अस्पतालों में पहुंचे 4.84 लाख मामले, CAG ने पकड़ा सरकारी आंकड़ों का बड़ा झोल

जयपुर। राजस्थान में सड़क हादसों की रोकथाम के लिए सरकारी स्तर पर बनाई जा रही योजनाओं के आधार पर ही अब सवाल खड़े होने लगे हैं। वजह है हादसों के सरकारी आंकड़ों में भारी अंतर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच पुलिस ने जहां 1,59,215 सड़क हादसे दर्ज किए, वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में इसी अवधि के दौरान एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए गए और भर्ती किए गए सड़क हादसा पीड़ितों के 4,84,457 मामले दर्ज हैं। यानी अस्पतालों का आंकड़ा पुलिस रिकॉर्ड से तीन गुना से भी ज्यादा है।
CAG ने मार्च 2025 तक राजस्थान में सड़क सुरक्षा व्यवस्था का परफॉर्मेंस ऑडिट किया। इस दौरान अलग-अलग सरकारी विभागों के रिकॉर्ड की तुलना की गई तो हादसों की संख्या को लेकर बड़ा अंतर सामने आया। यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क सुरक्षा की रणनीति तैयार करने में इन्हीं सरकारी आंकड़ों की भूमिका अहम होती है।

जिस आंकड़े पर बना रोड सेफ्टी प्लान, वही सवालों के घेरे में

CAG रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के रोड सेफ्टी एक्शन प्लान और रोड सेफ्टी रोड मैप-2020 तैयार करने में पुलिस के सड़क हादसों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के स्तर पर भी इन्हीं आंकड़ों का उपयोग किया गया। ऐसे में सवाल यह है कि यदि पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हादसे वास्तविक हादसों की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते, तो उन्हीं आंकड़ों के आधार पर बनाई गई सड़क सुरक्षा योजनाएं कितनी प्रभावी हो सकती हैं?

CAG ने पुलिस और चिकित्सा विभाग के आंकड़ों में इतने बड़े अंतर को हादसों की संभावित अंडररिपोर्टिंग की ओर संकेत माना है। रिपोर्ट में व्यापक और भरोसेमंद सड़क हादसा डेटाबेस तैयार करने की जरूरत बताई गई है।

IRAD ने भी खोली आंकड़ों की दूसरी तस्वीर

सरकारी रिकॉर्ड में अंतर सिर्फ पुलिस और अस्पतालों के बीच ही नहीं है। इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस (iRAD) के आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आया।
वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच पुलिस रिकॉर्ड में 94,563 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जबकि iRAD में पुलिस विभाग से संबंधित 96,672 हादसे दर्ज मिले। यानी यहां भी दोनों सरकारी प्रणालियों में एक समान आंकड़ा नहीं मिला।

सरकार का तर्क—FIR हुई तो हादसा रिकॉर्ड में आया

CAG के सवालों के जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि पुलिस रिकॉर्ड में मुख्य रूप से वही सड़क हादसे दर्ज होते हैं, जिनमें FIR दर्ज की जाती है। दूसरी ओर कई घायल सीधे निजी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं। सरकार के मुताबिक कई निजी अस्पताल अभी iRAD से जुड़े भी नहीं हैं। ऐसे में हादसों की संख्या के आंकड़ों में अंतर होना संभव है। सरकार ने इस अंतर को कम करने के लिए iRAD को पुलिस के CCTNS और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के Treatment Management System से जोड़ने की बात कही है।

सबसे बड़ा सवाल—हादसे कम हैं या रिकॉर्ड?

CAG की रिपोर्ट ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—जब एक ही राज्य में सड़क हादसों के आंकड़े अलग-अलग सरकारी विभागों में इतने अलग हैं, तो फिर सरकार के पास हादसों की वास्तविक तस्वीर आखिर कौन-सी है?
अगर बिना FIR वाले हादसे पुलिस के रिकॉर्ड से बाहर रह जाते हैं और निजी अस्पतालों में उपचार कराने वाले कई पीड़ित केंद्रीय डेटाबेस में दर्ज नहीं होते, तो हादसों के वास्तविक हॉटस्पॉट की पहचान भी प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर ब्लैक स्पॉट सुधारने, ट्रैफिक इंजीनियरिंग, सड़क डिजाइन, निगरानी और भविष्य की सड़क सुरक्षा योजनाओं पर पड़ सकता है।

आंकड़ों में कितना बड़ा अंतर?

पुलिस रिकॉर्ड: 1,59,215 सड़क हादसे
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: 4,84,457 मामले
अवधि: 2018-19 से 2024-25
अस्पतालों का आंकड़ा: पुलिस रिकॉर्ड से 3 गुना से अधिक
iRAD रिकॉर्ड: 96,672 हादसे
पुलिस रिकॉर्ड (2021-22 से 2024-25): 94,563 हादसे


CAG की रिपोर्ट का संकेत साफ है—सड़क हादसों की रोकथाम के लिए पहले हादसों का सही हिसाब जरूरी है। आंकड़े ही अधूरे होंगे तो सड़क सुरक्षा की तस्वीर भी अधूरी ही रहेगी।


👇 हमारी मुहिम से जुड़ें:

🛑 भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करें!

क्या आपके पास किसी घोटाले की पुख्ता जानकारी है? हमारे 'Secure Drop' पर भेजें। आप नाम बताएँ या पहचान छुपाएँ, यह आपकी मर्जी है। सच को दुनिया के सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है।

🔗 सुरक्षित रूप से रिपोर्ट करें

Share This Article
Leave a Comment