जयपुर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और घमासान खुलकर सामने आ गया है. जयपुर की हवामहल विधानसभा सीट पर टिकट बंटवारे को लेकर भारी बवाल देखने को मिला, जहां कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष आरआर तिवाड़ी ने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. टिकट वितरण से नाराज आरआर तिवाड़ी कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा के आवास के बाहर पहुंचे और जमीन पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया.
आरआर तिवाड़ी का कहना है कि विधायक रोहित बोहरा के कहने पर उन्होंने जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा से हवामहल विधानसभा क्षेत्र के 15 वार्डों में टिकट वितरण को लेकर विस्तार से चर्चा की थी. उनके अनुसार, बातचीत के बाद लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन इसके बाद शहर अध्यक्ष का फोन बंद हो गया और उनसे संपर्क नहीं हो सका.
रातभर चला असमंजस और लगे गंभीर आरोप
तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि पूरी रात असमंजस की स्थिति बनी रही और फोन बंद होने के कारण यह भी पता नहीं चल सका कि किन लोगों को पार्टी का सिंबल दिया गया है. उनके घर के बाहर पूरी रात बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
पूर्व जिलाध्यक्ष ने टिकट वितरण में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ ऐसे लोगों को टिकट थमा दिए गए हैं जो पहले एआईएमआईएम (AIMIM) से जुड़े रहे हैं. उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने पिछले चुनावों में उन्हें हराने की पूरी कोशिश की थी, आज पार्टी उन्हीं चेहरों को उनकी ही विधानसभा में चुनाव लड़वा रही है. इसके साथ ही उन्होंने कुछ मुस्लिम कांग्रेस विधायकों पर अन्य विधानसभा क्षेत्रों के टिकट वितरण में अनुचित हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया. तिवाड़ी ने स्पष्ट किया कि केवल एक ब्राह्मण चेहरा होना काफी नहीं है, बल्कि उम्मीदवार जनता के बीच सक्रिय और लंबे समय से पार्टी के प्रति समर्पित होना चाहिए.
बगरू में भी फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
हवामहल के अलावा बगरू विधानसभा क्षेत्र में भी टिकट वितरण के बाद बगावत के सुर उठ गए हैं. टिकट न मिलने से आहत और अपने पसंदीदा कार्यकर्ताओं की अनदेखी से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ता सीधे जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा के आवास पर जा पहुंचे. वहां कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की.
निकाय चुनाव से ठीक पहले टिकट बंटवारे को लेकर सामने आए इन तीखे विरोध प्रदर्शनों ने कांग्रेस संगठन की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं. अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने इन नाराज दिग्गजों और कार्यकर्ताओं को समय रहते मनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस भीतरघात को नहीं रोका गया, तो आगामी चुनावों में पार्टी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.