-एक साल में 30 करोड़ की रॉयल्टी डकारी, चहेती ठेका फर्म पर मेहरबान रहा माइनिंग इंजीनियर नरेंद्र खटीक; एक भी कार्रवाई नहीं
-विभागीय जांच की सच्चाई छिपाकर कलेक्टर को किया गुमराह, स्वतंत्रता दिवस पर सीना तानकर ले उड़ा जिला स्तरीय पुरस्कार
जयपुर/जालौर। जिस खान महकमे की कमान खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हाथों में है, उसी विभाग के भ्रष्ट तंत्र ने जालोर में अंधेरगर्दी मचा रखी है। जालोर जिले में पिछले एक साल के भीतर सरकारी खजाने को चूना लगाते हुए 30 करोड़ रुपये से अधिक की रॉयल्टी चोरी का काला खेल खेला गया। लेकिन हैरत की बात यह है कि इस महालूट पर अंकुश लगाने की बजाय माइनिंग इंजीनियर (ME) नरेंद्र खटीक कुंभकर्णी नींद सोते रहे और माफियाओं को खुली छूट देते रहे।
एक ही ठेकेदार पर ‘अंधा प्यार’, कार्रवाई शून्य:-
खुलासा हुआ है कि आहोर और भाद्राजून को छोड़कर पूरे जिले में रॉयल्टी वसूली का जिम्मा एक ही चहेती ठेका फर्म को सौंप दिया गया। नियमों की धज्जियां उड़ाकर करोड़ों की रॉयल्टी डकारने के बावजूद ME ने न तो फर्म पर कोई जुर्माना ठोका और न ही उसे ब्लैकलिस्ट करने की कोई अनुशंसा मुख्यालय भेजी। यह चुप्पी साफ गवाही देती है कि अफसरों और ठेका फर्म के बीच किस कदर गहरी मिलीभगत चल रही है।
फर्जीवाड़े की इंतहा, जांच छिपाई और ले लिया ‘स्वतंत्रता दिवस सम्मान’:-
शर्मनाक पहलू यह है कि जिस अधिकारी की नाक के नीचे 30 करोड़ का डाका डाला गया, उसने अवैध खनन पर कार्रवाई और लक्ष्य से अधिक राजस्व का झूठा ढिंढोरा पीटकर 15 अगस्त को जिला स्तरीय सम्मान तक हासिल कर लिया। कलेक्टर द्वारा 31 जुलाई को जारी दिशा-निर्देशों (बिंदु संख्या 23) में स्पष्ट था कि सम्मान के लिए विभागीय जांच लंबित नहीं होनी चाहिए। ME नरेंद्र खटीक के खिलाफ पहले से ही विभागीय जांच विचाराधीन थी, लेकिन उन्होंने खुद अपना आवेदन भेजते वक्त यह गंभीर तथ्य छिपा लिया और प्रशासन को गुमराह कर मंच से मेडल और प्रशस्ति पत्र हासिल कर लिया।
कलेक्टर का बयान:-
“एमई को अभी तक चार्जशीट नहीं दी गई है। यदि चार्जशीट दे दी गई होती, तो सम्मान वापस लेने की कार्रवाई की जाती।”
— डॉ. प्रदीप के गवांडे, जिला कलेक्टर, जालोर
प्रशासन व सरकार की कार्यशैली पर उठे सवाल:-
-30 करोड़ की खुली रॉयल्टी चोरी के बावजूद ME नरेंद्र खटीक पर अब तक चार्जशीट और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
-क्या एक ही ठेका फर्म को पूरे जिले की रॉयल्टी सौंपना और उस पर कोई कार्रवाई न करना बड़े ‘लेन-देन’ की ओर इशारा नहीं करता?
-क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार इस मिलीभगत के सिंडिकेट को तोड़कर भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भेजेगी या फाइलें दबा दी जाएंगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now