-कागजी कार्रवाई का खेल: 203 छापे मार बनाए 109 केस, लेकिन 94 मामलों में सिर्फ जब्ती कर माफियाओं को दी ‘सुरक्षित एग्जिट’!
-30,433 नमूनों की जांच का सच: 18,702 खाद व 11,731 बीज जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा, अमानक आपूर्ति से प्रदेश के हजारों अन्नदाताओं की फसलें ही नहीं बल्कि ‘सपनें’ भी तबाह होने के साथ ही बन गए कर्जदार।
-सरकारी नियमों की आड़ में किसानों के साथ ‘लूट का खेल’: करोड़ों की बर्बादी के बाद भी क्षतिपूर्ति का प्रावधान नहीं, अफसर हुए मालामाल, किसानों पर कर्ज का बोझ।
जयपुर। प्रदेश का अन्नदाता एक तरफ जहां कुदरत की मार और बढ़ती लागत से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कृषि विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और मुनाफाखोर खाद-बीज माफियाओं के गठजोड़ ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। ‘Expose Now’ की विशेष पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश के 31 जिलों में नकली व घटिया खाद और बीज की बेखौफ सप्लाई की गई, जिससे हजारों किसानों की लहलहाती फसलें बर्बाद हो गईं।
जांच का ढोंग और सेटिंग का ‘मास्टर खेल’:-
कृषि विभाग ने पूरे वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान 31 जिलों में कुल 203 स्थानों पर औचक निरीक्षण और सघन जांच अभियान चलाया। कहने को विभाग ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के तहत विनिर्माण इकाइयों, बीज उत्पादक फर्मों और डीलर परिसरों से 18,702 खाद और 11,731 बीज के कुल 30,433 सैंपल आहरित किए। लेकिन प्रयोगशाला जांच के आंकड़े जो बयां करते हैं, वे आंखें खोलने वाले हैं। कुल जांच में से 638 खाद के सैंपल और 187 बीज के सैंपल पूरी तरह फेल (अमानक) पाए गए। यानी बाजार में जो खाद और बीज किसानों को ऊंचे दामों में बेचे जा रहे थे, वे पूरी तरह से नकली और गुणवत्ताहीन थे।
FIR में पक्षपात, 109 पर केस, 94 को ‘अभयदान’:-
जांच में सभी 203 निरीक्षण स्थलों पर गड़बड़ी और घटिया सामग्री पाए जाने के बावजूद विभाग की कार्रवाई दोहरे रवैये को साफ उजागर करती है। 203 में से केवल 109 प्रकरणों में विभिन्न थानों में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई, जबकि शेष 94 मामलों में केवल माल की जब्ती कर औपचारिक इतिश्री कर ली गई। सूत्रों का दावा है कि जिन कंपनियों पर नकेल कसी जानी चाहिए थी, उनके साथ प्रशासनिक स्तर पर ‘सेटिंग’ कर ली गई। भारी भरकम वसूली के खेल में सिर्फ कागजी जब्ती दिखाई गई, ताकि बड़ी कंपनियों और रसूखदार विक्रेताओं पर आपराधिक आंच न आए।
किसानों को क्या मिला? ‘शून्य’:-
नकली खाद और बीजों के चलते प्रदेश के हजारों किसानों की मेहनत पानी में मिल गई। जब पीड़ित अन्नदाता अपनी बर्बाद फसलों का मुआवजा मांगने पहुंचे, तो सरकार ने उर्वरक व बीज अधिनियम के नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। नियमों में किसानों को मुआवजा या विशेष राहत पैकेज का कोई स्पष्ट प्रावधान न होने का फायदा सीधे तौर पर दोषी कंपनियों को मिला। इस पूरे मामले से एक बात तो साफ हो गई है कि निरीक्षण, सैंपल आहरण और जब्ती के इस कथित ‘सघन अभियान’ से विभागीय अफसरों और कंपनियों की जेबें तो जमकर भरीं, लेकिन खेत में पसीना बहाने वाला किसान आज भी खाली हाथ है। लाइसेंस निरस्ती और निलंबन के कागजी घोटालों के बीच माफिया हर साल नया नाम बदलकर फिर बाजार में उतर आते हैं। ऐसे में केवल जब्ती से काम चलाने के बजाय इस पूरे सिंडिकेट की उच्चस्तरीय आपराधिक जांच कराई जाए और किसानों के नुकसान की भरपाई दोषी कंपनियों की संपत्ति कुर्क करके की जाए।
एक्सक्लूसिव डेटा: कागजी कार्रवाई की सच्चाई
| विवरण | आंकड़े |
| प्रभावित जिले | 31 जिले |
| औचक निरीक्षण स्थान | 203 स्थान |
| कुल जांचे गए सैंपल | 30,433 |
| खाद के फेल सैंपल | 638 |
| बीज के फेल सैंपल | 187 |
| कुल दर्ज FIR | 109 मामले |
| केवल जब्ती (बिना FIR) | 94 मामले |
जब्ती की आड़ में ‘सेटिंग’ का खेल:-
इस पूरी जांच रिपोर्ट और कृषि विभाग के आंकड़ों से एक बात साफ हो चुकी है कि निरीक्षण, सैंपल आहरण और जब्ती के नाम पर चला यह अभियान माफियाओं को रोकने के लिए नहीं, बल्कि विभागीय सांठगांठ से जेबें भरने का जरिया था। 203 में से केवल 109 मामलों में ही एफआईआर दर्ज कराई गई, जबकि 94 मामलों में सिर्फ जब्ती दिखाकर रसूखदार खाद-बीज कंपनियों को आपराधिक कार्रवाई से बचा लिया गया। विभागीय अधिकारियों की इस ढिलाई ने साफ कर दिया कि कागजी कार्रवाई की ओट में करोड़ों का वसूली खेल बदस्तूर जारी है।
नियमों के चक्रव्यूह में फंसा अन्नदाता:-
फसलें अमानक और नकली आपूर्ति की वजह से चौपट हुईं, लेकिन जब किसान अधिकार मांगने पहुंचे तो सरकारी नियमों का पन्ना थमा दिया गया। उर्वरक और बीज अधिनियम में क्षतिपूर्ति का प्रावधान न होने की वजह से किसान एक-एक पैसे का मोहताज हो गया और मुनाफाखोर माफिया करोड़ों का कारोबार समेटकर अलग निकल गए।
जांच के नाम पर अफसरों के घर तो भर गए, लेकिन किसान के हाथ सिर्फ कर्जा और तबाही ही आई। ‘Expose Now’ राज्य सरकार से मांग करता है कि महज कागजी निलंबन और जब्ती के नाटक बंद किए जाएं। इस पूरे सिंडिकेट की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो और जिन कंपनियों के सैंपल फेल हुए हैं, उनकी संपत्तियां कुर्क कर पीड़ित किसानों को सीधा आर्थिक मुआवजा जारी किया जाए।
