जयपुर: राजस्थान में शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए उस नए आदेश ने भूचाल ला दिया है, जिसमें पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (PEEO) को महीने में 4 दिन स्कूलों में रात्रि विश्राम कर ‘रात्रि चौपाल’ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को पूरी तरह अव्यवहारिक और तानाशाही पूर्ण बताते हुए इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जब अधिकांश सरकारी स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय, बिजली और रुकने के लिए सुरक्षित कमरे जैसी बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं, तो शिक्षक रात में वहां रुककर कौन सी समस्या का समाधान करेंगे? इस ज्वलंत मुद्दे और जमीनी हकीकत को समझने के लिए ‘Expose Now’ ने राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) की महिला प्रदेश अध्यक्ष मीना मंसूरिया से विशेष बातचीत की।
Expose Now विशेष साक्षात्कार: ‘PEO रात्रि चौपाल’ आदेश पर मीना मंसूरिया से सीधी बात
Expose Now: शिक्षा विभाग ने नया आदेश निकाला है कि PEO (पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी) महीने में 4 दिन रात को स्कूलों में रुकेंगे और ‘रात्रि चौपाल’ करेंगे। शिक्षक संगठन इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
मीना मंसूरिया: यह आदेश पूरी तरह से अव्यावहारिक और असंगत है। PEOs पर पहले से ही काम का भारी बोझ है। सबसे बड़ी चिंता हमारी महिला PEOs की है। महीने में 4 दिन रात को गांव में रुकना, उनकी सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं है। क्या एक महिला शिक्षिका के लिए यह संभव है? इसके अलावा, गांव वाले जो भी समस्याएं (बिजली, पानी, सड़क आदि) लेकर आएंगे, उसका समाधान एक PEO कैसे करेगा? वह कोई MLA या MP तो नहीं है। शिक्षा और बच्चों की जो समस्याएं हैं, वो शिक्षक दिन में ही सुलझा सकता है, क्योंकि वह दिनभर समुदाय के संपर्क में रहता है।
Expose Now: सरकार की मंशा शायद जमीनी स्तर पर समस्याओं को जानना है। एक पुरुष PEO के नजरिए से देखें, तो क्या वह गांव की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता?
मीना मंसूरिया: एक PEO का कार्यक्षेत्र केवल शिक्षा से जुड़ा है। रात्रि चौपाल में स्वास्थ्य, साफ-सफाई या गांव की अन्य कई तरह की समस्याएं आती हैं, जिनका समाधान PEO के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। विद्यालय और बच्चों से जुड़ी समस्याएं शिक्षक दिन में ही हल कर लेते हैं, इसके लिए रात में रुकने की क्या जरूरत है? यह आदेश बिल्कुल गलत है और शिक्षक संघ इसका पुरजोर विरोध करता है।
Expose Now: विरोध स्वरूप आपका संगठन आगे क्या कदम उठा रहा है?
मीना मंसूरिया: हमने कल आदेश आते ही इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। अभी हमारी लगातार मीटिंग्स चल रही हैं। हम शिक्षा मंत्री महोदय से भी मुलाकात करेंगे और मांग करेंगे कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। अगर हमारी बात नहीं मानी जाती है, तो आगे की रणनीति तय की जाएगी।
Expose Now: आपको क्या लगता है, ऐसे फैसले आनन-फानन में क्यों लिए जा रहे हैं? क्या सरकार बिना चर्चा के काम कर रही है?
मीना मंसूरिया: जी बिल्कुल, ऐसा ही लग रहा है। पिछले दो सालों से सरकार के कई ऐसे आदेश आए हैं, जिन्हें बाद में वापस (प्रत्याहारित) लेना पड़ा है। अगर सरकार कोई भी आदेश निकालने से पहले शिक्षक संगठनों के साथ बैठकर समन्वय बनाए, तो उन्हें फैसले वापस लेने की नौबत ही नहीं आएगी।
Expose Now: अंत में, शिक्षा मंत्री महोदय के लिए आपका क्या संदेश है?
मीना मंसूरिया: मेरा मंत्री महोदय से यही निवेदन है कि वे शिक्षक संगठनों के साथ बैठकर सकारात्मक वार्ता करें। बिना बातचीत के केवल गलतफहमियां पैदा होती हैं। हम भी चाहते हैं कि शिक्षा और शिक्षार्थियों का स्तर सुधरे, लेकिन इसके लिए व्यावहारिक कदम उठाए जाने चाहिए।
विरोध के मुख्य कारण एक नज़र में:
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: ग्रामीण स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है।
- सुरक्षा पर सवाल: विशेषकर महिला PEEOs के लिए गांव में रात गुजारना असुरक्षित है।
- अधिकार क्षेत्र से बाहर के मुद्दे: रात्रि चौपाल में ग्रामीण सड़क, पानी, और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं लाएंगे, जो शिक्षा विभाग या PEO के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं।
शिक्षक संघों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के शिक्षक सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।
