जयपुर: राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) परिसर में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां स्थित ‘डॉक्टर्स कैफेटेरिया’ में मरीजों और उनके परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर बिना MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) वाली पानी की बोतलें खुलेआम बेची जा रही हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब ‘Expose Now’ की रिपोर्टर ने मौके पर पहुंचकर इस गोरखधंधे का पर्दाफाश किया।
कैसे हुआ खुलासा?
‘Expose Now’ द्वारा किए गए स्टिंग और पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच सामने आया। Expose Now की टीम जब अस्पताल की कैंटीन में पानी लेने पहुंची, तो उन्हें 20 रुपये में एक बोतल दी गई। जब बोतल को ध्यान से देखा गया, तो उस पर किसी भी तरह का कोई प्रिंट रेट, बैच नंबर या MRP मौजूद नहीं था। किसी भी पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के लिए ये जानकारियां अनिवार्य होती हैं, लेकिन यहां नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

कर्मचारियों की टालमटोल
जब रिपोर्टर ने कैंटीन पर मौजूद कर्मचारी से इस बारे में सवाल किया, तो उसके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। कर्मचारी ने शुरुआत में बहाना बनाते हुए कहा कि “प्रिंट ऊपर होगा, मिट गया होगा।” लेकिन जब उससे पूछा गया कि ऐसा कौन सा प्रिंट है जो इतनी जल्दी मिट जाता है, तो वह टालमटोल करने लगा। अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए उसने यहां तक कह दिया कि वह कैंटीन मालिक को नहीं जानता और सिर्फ वहां नौकरी करता है।
मरीजों की सेहत पर बड़ा खतरा
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि SMS जैसे प्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही कैसे पनप रही है? “डॉक्टर्स कैफेटेरिया”(Doctors Cafeteria) का नाम सुनकर मरीज और उनके परिजन पूरा विश्वास करते हैं। लेकिन जिस तरह से बिना ब्रांडिंग या अधूरी जानकारी वाली बोतलें थमाई जा रही हैं, वह सीधे तौर पर स्वास्थ्य के साथ एक भद्दा मजाक है।
बिना प्रामाणिक प्रिंट के इस बात की क्या गारंटी है कि यह पानी शुद्ध है? इस बात की पूरी आशंका है कि सामान्य नल का पानी बोतलों में भरकर, फ्रिज में ठंडा कर बेचा जा रहा हो। अस्पताल प्रशासन की नाक के नीचे चल रही यह लापरवाही किसी दिन बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भी इस फर्जीवाड़े की पुष्टि की और बताया कि हमें भी बिना प्रिंट वाली पानी की बोतलें इसी तरह मनमाने दामों पर बेची जा रही हैं। जब विवाद बढ़ा और रिपोर्टर ने मालिक से बात करनी चाही, तो कर्मचारी वहां से खिसक गया। इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
यह Expose सीधे तौर पर प्रशासन की घोर लापरवाही और कैंटीन संचालकों की मुनाफाखोरी को उजागर करता है। अब देखना यह है कि इस बड़े खुलासे के बाद एसएमएस अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग इन मुनाफाखोरों पर क्या और कब सख्त कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट ‘Expsoe Now’
