जयपुर। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के लिए यमुना जल समझौते को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्षों से लंबित यमुना जल परियोजना के आगे बढ़ने से शेखावाटी क्षेत्र के लोगों को फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शेखावाटी ने लंबे समय तक पानी की कमी और अन्य अभावों से संघर्ष करते हुए देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
जयपुर के बिड़ला सभागार में शेखावाटी फाउंडेशन की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नागरिक अभिनंदन किया गया। समारोह में शेखावाटी क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, उद्यमियों, शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान यमुना जल समझौते को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह देखने को मिला।
वर्षों से लंबित था यमुना जल का इंतजार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र ने दशकों तक पानी की कमी का सामना किया है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित जल संसाधनों के कारण यहां के लोगों को पेयजल के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भूजल पर अत्यधिक निर्भरता के चलते कई इलाकों में पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है।
सीएम ने कहा कि यमुना जल समझौते के लागू होने से शेखावाटी के लोगों को लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या से राहत मिल सकती है। विशेष रूप से फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
शेखावाटी ने अभावों से लड़कर बनाई पहचान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में शेखावाटी की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शेखावाटी केवल राजस्थान का एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि धर्म, अध्यात्म, संत परंपरा, वीरता और सामाजिक मूल्यों की समृद्ध पहचान रखने वाला क्षेत्र है।
उन्होंने कहा कि शेखावाटी के लोगों ने सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और संघर्ष के बल पर देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग व्यापार और रोजगार के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों तक पहुंचे हैं।
सीएम ने कहा कि शेखावाटी में मौसम की विषम परिस्थितियां भी लोगों के लिए चुनौती रही हैं। यहां गर्मी और सर्दी दोनों का प्रभाव काफी अधिक रहता है। इसके बावजूद क्षेत्र के लोगों ने कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करते हुए सफलता की नई कहानियां लिखी हैं।
समारोह में हुआ यमुना जल का प्रतीकात्मक स्वागत
नागरिक अभिनंदन समारोह के दौरान यमुना जल परियोजना को लेकर एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने माथे पर कलश रखा और प्रतीकात्मक रूप से यमुना का पानी शेखावाटी के कलश में डाला गया।
इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने यमुना जल समझौते को शेखावाटी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। शेखावाटी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र के लाखों लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीद पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ी है।
लाखों लोगों को मिल सकता है फायदा
यमुना जल परियोजना से राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में चूरू, झुंझुनूं और सीकर जैसे शेखावाटी के जिलों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना से क्षेत्र में भूजल पर निर्भरता कम करने और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना से शेखावाटी क्षेत्र के 75 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक जल पहुंचाने की योजना है। इसके लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी को चूरू क्षेत्र में प्रस्तावित जलाशय तक पहुंचाने और वहां से संबंधित क्षेत्रों में वितरण की योजना बताई गई है।
पेयजल के साथ सिंचाई और उद्योग को भी मिलेगा लाभ
यमुना का पानी शेखावाटी तक पहुंचने से इसका असर केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ने से कृषि गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही उद्योग और व्यापार के लिए आवश्यक जल संसाधन उपलब्ध होने पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
शेखावाटी फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यमुना जल की उपलब्धता से क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदल सकती है। पेयजल और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ कृषि, उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
किसानों की जमीन अधिग्रहण को लेकर भी राहत
नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि यमुना का पानी पाइपलाइन के माध्यम से शेखावाटी तक पहुंचाया जाएगा। उनके अनुसार, इस वजह से परियोजना के लिए किसानों की जमीन का स्थायी अधिग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान किसानों को एक या दो फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जा सकता है। परियोजना का काम पूरा होने के बाद किसान अपनी जमीन का दोबारा उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था से किसानों पर भूमि अधिग्रहण का स्थायी प्रभाव नहीं पड़ने की बात कही गई।
सीएम भजनलाल ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यमुना जल समझौते को लेकर कांग्रेस पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कई वर्षों तक राजस्थान, हरियाणा और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन शेखावाटी तक यमुना का पानी पहुंचाने के लिए प्रभावी पहल नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता में रखा और लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की ओर से राजस्थान के साथ हुए यमुना जल समझौते को रद्द करने की बात कही गई थी।
हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से अलग-अलग मौकों पर दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक बहस जारी रही है। यमुना जल परियोजना अब राजस्थान की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।
राजेंद्र राठौड़ ने बताया शेखावाटी के सपने की पूर्ति
कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि यमुना जल समझौते के आगे बढ़ने से शेखावाटी के लोगों का लंबे समय से देखा जा रहा सपना पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लिए स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध होना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
शेखावाटी फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वर्षों से लंबित यमुना जल समझौते को नई दिशा और गति मिली है। उन्होंने इसे शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों की उम्मीदों से जुड़ा फैसला बताया।
परियोजना के क्रियान्वयन पर अब नजर
यमुना जल समझौते के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती परियोजना को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हाल में अधिकारियों को परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने और नियमित निगरानी के निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों से परियोजना स्थलों का नियमित निरीक्षण करने और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने को कहा है।
शेखावाटी के लोगों के लिए अब उम्मीद इस बात की है कि दशकों से चली आ रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान जल्द दिखाई दे। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो चूरू, झुंझुनूं और सीकर सहित क्षेत्र के कई इलाकों में पेयजल संकट और फ्लोराइड प्रभावित भूजल पर निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही, पानी की उपलब्धता बढ़ने से कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
