राजस्थान में फर्जी डिग्री मामले में बड़ी कार्रवाई, मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डिप्टी परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा गिरफ्तार

अजमेर/चित्तौड़गढ़। राजस्थान में फर्जी डिग्री और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जुड़े फर्जी डिग्री प्रकरण में SOG की अजमेर यूनिट ने यूनिवर्सिटी के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन सुशील शर्मा को गिरफ्तार किया है। इस मामले में यूनिवर्सिटी से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

फर्जी डिग्री का यह मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की हिंदी विषय की व्याख्याता भर्ती परीक्षा-2022 से सामने आया था। जांच में कथित तौर पर ऐसे अभ्यर्थियों की डिग्रियों को लेकर सवाल उठे, जिनके पास परीक्षा परिणाम घोषित होने तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी होने के प्रमाण नहीं थे। इसके बाद मामले की जांच SOG को सौंपी गई और जांच का दायरा बढ़ता गया।

RPSC भर्ती परीक्षा से सामने आया फर्जी डिग्री कनेक्शन

मामले की शुरुआत RPSC की लेक्चरर हिंदी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 के दौरान हुई जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और एमए हिंदी की डिग्री को लेकर संदेह सामने आया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों के पास परीक्षा के परिणाम घोषित होने तक वैध एमए हिंदी की डिग्री नहीं थी। आरोप है कि इसके बावजूद डिग्री उपलब्ध कराकर भर्ती प्रक्रिया में पात्रता हासिल करने की कोशिश की गई।

प्रकरण की जांच आगे बढ़ने पर मेवाड़ यूनिवर्सिटी से कथित रूप से जारी की गई डिग्रियों की भूमिका सामने आई। इसके बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

डिप्टी परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा गिरफ्तार

SOG की जांच में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन सुशील कुमार शर्मा का नाम सामने आया। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनके अलावा यूनिवर्सिटी से जुड़े अन्य लोगों को भी इस मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन फार्मेसी किशोर चंद्रुल और कार्यालय सहायक राजेश सिंह रणावत सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी मामले की जांच के दौरान हुई है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

दो अभ्यर्थियों की डिग्री पर उठे थे सवाल

जांच के दौरान सामने आया कि हिंदी लेक्चरर भर्ती परीक्षा से जुड़े कुछ अभ्यर्थियों के पास आवश्यक एमए हिंदी डिग्री को लेकर गंभीर सवाल थे। रिपोर्ट के अनुसार, दो महिला अभ्यर्थियों के संबंध में यह आरोप सामने आया कि परीक्षा के परिणाम घोषित होने तक उनके पास वैध एमए हिंदी डिग्री नहीं थी।

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कथित तौर पर दोनों अभ्यर्थियों के भाइयों ने फर्जी डिग्री हासिल करने के लिए पैसे दिए। मीडिया रिपोर्टों में प्रति व्यक्ति करीब 2 लाख रुपये दिए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होंगे।

मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर बढ़ा प्रशासनिक दबाव

फर्जी डिग्री मामले की जांच के बीच राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए दाखिलों को लेकर भी सख्त कदम उठाया है। जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी के सभी पाठ्यक्रमों में नए प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।

यह कार्रवाई उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई। समिति ने यूनिवर्सिटी से संबंधित विभिन्न कथित अनियमितताओं की जांच की थी। विभागीय कार्रवाई से स्पष्ट है कि मामला केवल एक भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।

10 निजी विश्वविद्यालय जांच के घेरे में

राजस्थान विधानसभा में फरवरी 2026 में निजी विश्वविद्यालयों से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा भी उठा था। सरकार की ओर से बताया गया था कि राज्य में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 10 विश्वविद्यालय विभिन्न मामलों में जांच के दायरे में हैं।

इन मामलों में फर्जी डिग्री, बैकडेटेड प्रमाण-पत्र और अन्य कथित अनियमितताओं की जांच शामिल है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी भी उन संस्थानों में शामिल बताई गई जिनके खिलाफ जांच चल रही है। इससे राजस्थान में निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी और डिग्री जारी करने की प्रक्रिया को लेकर व्यापक सवाल खड़े हुए हैं।

425 PhD डिग्रियों को लेकर भी जांच का दावा

मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जुड़े एक अलग जांच प्रकरण में कथित रूप से बड़ी संख्या में PhD डिग्रियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जांच में करीब 425 PhD डिग्रियों को नियमों के उल्लंघन से जोड़कर देखा गया है। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया, रिकॉर्ड के रखरखाव और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय के बाद ही मानी जाएगी। फिलहाल विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मामलों में प्रशासनिक और कानूनी जांच जारी है।

आगे क्या होगा?

सुशील शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी की नजर कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क की पूरी कड़ी पर है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि डिग्री जारी करने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी, कथित तौर पर फर्जी या अनियमित डिग्रियां कैसे तैयार की गईं और उनका इस्तेमाल किन भर्ती परीक्षाओं या सरकारी नौकरियों में किया गया।

जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितने अभ्यर्थियों तक फैला हुआ है और क्या इस मामले में किसी संगठित नेटवर्क ने काम किया था। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जी डिग्री मामले में SOG की कार्रवाई जारी है। सुशील शर्मा की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे होने की संभावना बनी हुई है। वहीं, यूनिवर्सिटी पर नए प्रवेश को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। मामले में आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायालय के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।


👇 हमारी मुहिम से जुड़ें:

🛑 भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करें!

क्या आपके पास किसी घोटाले की पुख्ता जानकारी है? हमारे 'Secure Drop' पर भेजें। आप नाम बताएँ या पहचान छुपाएँ, यह आपकी मर्जी है। सच को दुनिया के सामने लाना हमारी जिम्मेदारी है।

🔗 सुरक्षित रूप से रिपोर्ट करें

Share This Article
Leave a Comment