उदयपुर: चिकित्सा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बांसवाड़ा की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एसीबी ने उदयपुर स्थित संयुक्त निदेशक कार्यालय में दलाल अब्दुल कादिर को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की भनक लगते ही संयुक्त निदेशक डॉ. रतन बिलवाल कार्यालय छोड़कर फरार हो गए, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं।
लैब में रेडियोलॉजिस्ट का नाम जोड़ने की एवज में मांगी थी घूस
एसीबी के अनुसार, एक परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे अपनी लैब में सोनोग्राफी मशीन के संचालन हेतु रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम जुड़वाना था। इसकी पंजीयन स्वीकृति (Registration Approval) जारी करने की एवज में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों द्वारा 1.30 लाख रुपये की मोटी रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपों की पुष्टि हुई और एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई।
कार्रवाई के दौरान मची अफरातफरी
एसीबी की टीम ने योजना के अनुसार दलाल अब्दुल कादिर को रिश्वत की राशि के साथ ट्रैप किया। जब दलाल ने 30 हजार रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किए, तो उसे एसीबी की कार्रवाई का आभास हो गया। उसने रिश्वत की राशि कार्यालय में छोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे दबोच लिया। वहीं, इस पूरे प्रकरण के मुख्य आरोपी डॉ. रतन बिलवाल कार्रवाई की सूचना मिलते ही अपने दफ्तर से रफूचक्कर हो गए।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
इस कार्रवाई का नेतृत्व एसीबी उपमहानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरवीजन और पुलिस उपअधीक्षक रतनसिंह राजपुरोहित ने किया। एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के निर्देशन में अब दलाल से पूछताछ की जा रही है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। डॉ. बिलवाल की गिरफ्तारी के लिए एसीबी की टीमें दबिश दे रही हैं।
