-68.69डॉलर प्रति बैरल पर आया क्रूड, तेल कंपनियां हर लीटर पेट्रोल-डीजल पर कमा रही हैं पूरे 11 रूपए का सीधा बंपर मुनाफा
-चरम संकट के दौर में भी IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों ने कमाया 70% से ज्यादा का मुनाफा, मुनाफे का योग 24,450 करोड़ के पार
-क्रूड ऑयल 157 डॉलर से घटकर आधा हुआ, लेकिन सरकार और कंपनियों की जुगलबंदी के कारण आम आदमी को नहीं मिली एक पैसे की राहत
जयपुर/दिल्ली/मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार औंधे मुंह गिर रही हैं, लेकिन देश की आम जनता को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान जो कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल के शिखर पर पहुंच गया था, वह अब पिछले 6 महीनों के निचले स्तर यानी सिर्फ 68.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुका है। इसके बावजूद भारतीय तेल कंपनियां पेट्रोल पर 10.5 रूपए और डीजल पर पूरे 11 रूपए प्रति लीटर का भारी-भरकम मुनाफा (मार्जिन) कूट रही हैं।

मुनाफे की मलाई, जनता की दुहाई:-
आंकड़े गवाह हैं कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले 2025-26 में तेल कंपनियों का कुल मुनाफा 70.7% की छलांग लगाकर 14,320 करोड़ रूपए से बढ़कर 24,450 करोड़ रूपए हो गया है। इसमें सबसे ज्यादा मुनाफा आईओसीएल (IOCL) ने 80.7% दर्ज किया है। कंपनियां पिछले 36 दिनों से लगातार ‘ब्रेक ईवन’ (नो लॉस, नो प्रॉफिट) से ऊपर रहकर केवल शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।

टैक्स का खेल और सरकार की चुप्पी:-
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों को आम जनता की जेब से ज्यादा अपनी बैलेंस शीट चमकाने की चिंता है। कच्चे तेल के दाम चाहे 75 डॉलर हों या 120 डॉलर, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस बने हुए हैं। हद तो यह है कि जब भी कच्चे तेल के दाम नीचे आते हैं, केंद्र और राज्य सरकारें अपना टैक्स बढ़ाकर आम जनता को मिलने वाली राहत का रास्ता खुद ही बंद कर देती हैं। आखिर वैश्विक बाजार की इस मंदी का फायदा देश के आम नागरिक की जेब को कब मिलेगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
