नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत में लिथियम-आयन सेल और बैटरी के निर्माण को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने सीमा शुल्क (Custom Duty) नियमों में संशोधन का नया राजपत्र जारी किया है, जिसके तहत बैटरी निर्माण में उपयोग होने वाली विभिन्न अत्याधुनिक मशीनों को कस्टम ड्यूटी की छूट सूची में शामिल कर दिया गया है।
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मिलेगी मजबूती
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश को बैटरी निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक बैटरी निर्माण में उपयोग होने वाली कई उच्च-तकनीकी मशीनें आयात करने पर भारी शुल्क देना पड़ता था, जिससे उत्पादन लागत काफी अधिक हो जाती थी। अब इन मशीनों पर शुल्क कम होने से घरेलू स्तर पर बैटरी बनाने की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सीधे तौर पर मजबूती मिलेगी।
घटेगी EV की कीमत, बढ़ेगा घरेलू उत्पादन
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम होने से अंततः इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत में भी कमी आएगी, जिससे आम जनता के लिए EV खरीदना और अधिक सुलभ हो जाएगा। इस नीतिगत बदलाव से भारत में लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे देश न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर बैटरी निर्यात के क्षेत्र में भी अपनी दावेदारी पेश कर सकेगा।
उद्योग जगत में खुशी की लहर
उद्योग विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बैटरी निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों को छूट मिलने से नई कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगी। यह निर्णय न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करेगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। सरकार का यह कदम 2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक निर्णायक साबित हो सकता है।
