शाहपुरा (भीलवाड़ा): राजस्थान में सत्ता के रसूख और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भीलवाड़ा के शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा और उनके परिवार पर ‘गौशाला’ के नाम की आड़ लेकर करोड़ों रुपये की कीमती सरकारी चारागाह भूमि कब्जाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (Twitter) पर आकाश तिवारी के हैंडल से आरोप लगाए गए हैं। दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि कैसे रातों-रात एक पारिवारिक संस्था बनाई गई और जब कलेक्टर ने नियमों का हवाला देकर जमीन देने से इनकार कर दिया, तो सत्ता के दबाव में जमीन पर जबरन निर्माण शुरू कर दिया गया।
भीलवाड़ा के शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा
देव गौशाला विवाद पर BJP विधायक लालाराम बैरवा के साथ Exclusive बातचीत
Expose Now- सोशल मीडिया पर दस्तावेज़ वायरल हैं कि गौशाला का रजिस्ट्रेशन नियमों के विरुद्ध है और कलेक्टर ने भी अनुमति नहीं दी थी। आप क्या कहेंगे?
विधायक लालाराम बैरवा: किसी भी संस्था के रजिस्ट्रेशन के तीन साल बाद सरकार एक नियम के तहत अनुदान और अलॉटमेंट करती है। कलेक्टर के पावर में न होने के कारण उन्होंने इसे निरस्त किया था, लेकिन अब यह मामला सरकार के पास अनुमोदन के लिए लंबित है। सरकार चाहे तो इसे कर सकती है।
Expose Now- : क्या यह सच है कि आपने नियमों को ताक पर रखकर गोचर भूमि पर कब्जा किया है?विधायक लालाराम बैरवा: यह चरागाह भूमि है जो जानवरों के लिए ही होती है। गौमाता की सेवा के लिए बनी संस्थाएं अक्सर चरागाह भूमि पर ही संचालित होती हैं। हमने इसे नियमानुसार आवेदन करके ही शुरू किया था।
Expose Now- : आरोप है कि बिजली विभाग के XEN को दबाव डालकर हटाया गया और आपके काम पूरे कराए गए।
विधायक लालाराम बैरवा: ऐसा बिल्कुल नहीं है। बिजली विभाग में संस्थाओं को अस्थाई कनेक्शन मिलते हैं और इसके लिए कोई भी संस्था अप्लाई कर सकती है। अधिकारी का स्थानांतरण और हमारे काम का आपस में कोई संबंध नहीं है।
Expose Now-: संस्था की समिति में आपके बेटे, भाई और परिवार के लोग ही क्यों हैं? क्या यह परिवारवाद नहीं है?
विधायक लालाराम बैरवा: मैंने और मेरे परिवार के सदस्यों ने लगभग 7-8 महीने पहले ही संस्था से इस्तीफा दे दिया है। आज की तारीख में मैं या मेरा परिवार वहां किसी भी पद पर नहीं है।
Expose Now-: वहां वर्तमान में क्या स्थिति है और कितनी गायें हैं?
विधायक लालाराम बैरवा: वहां अभी 70-80 गायें हैं। हमने गायों की सुरक्षा के लिए तारबंदी, छाया के लिए टिनशेड और पानी के लिए बोरिंग कराई है। कोई व्यावसायिक निर्माण वहां नहीं किया गया है।
Expose Now-: विरोधी इसे राजनीतिक एजेंडा बता रहे हैं। आपका क्या कहना है?
विधायक लालाराम बैरवा: क्षेत्र में कोई विरोध नहीं है। यह सब राजनीतिक द्वेषता के कारण मुझे बदनाम करने की एक साजिश है।
1. ‘पारिवारिक गौशाला’ का गठन (दस्तावेज क्या कहते हैं?)
वायरल पोस्ट में आरोप लगाए गए दावों की पुष्टि सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र से होती है। 21 अगस्त 2025 को ‘देव गौशाला सेवा संस्था शाहपुरा’ का बकायदा रजिस्ट्रेशन करवाया गया। कार्यकारिणी की सूची इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह संस्था पूरी तरह ‘पारिवारिक’ है:
देव गौशाला सेवा संस्था का रजिस्ट्रेशन 21/08/2025 को हुआ।
सचिव: ललाराम बैरवा (स्वयं शाहपुरा विधायक)
अध्यक्ष: चिनार देवतवाल (विधायक के 20 वर्षीय पुत्र)
कोषाध्यक्ष: जतिन देवतवाल (विधायक के 25 वर्षीय दूसरे पुत्र)
सह-सचिव: कुंदन देवतवाल (विधायक के भतीजे)
संस्था के सचिव विधायक लालाराम बैरवा। विधायक के बेटे चिनार देवतवाल अध्यक्ष हैं। दूसरे बेटे जतिन देवतवाल कोषाध्यक्ष हैं। विधायक के भाई के बेटे कुंदन देवतवाल सहसचिव है।
2. करोड़ों की चारागाह भूमि पर क्यों थी नजर?
शाहपुरा से महज 2 किलोमीटर दूर माता जी का खेड़ा पंचायत की जमीन को इस गौशाला के लिए चिन्हित किया गया। यह जमीन इसलिए बेशकीमती है क्योंकि यहां से भविष्य में ‘केकड़ी-जयपुर-भीलवाड़ा-मांडल एक्सप्रेसवे’ प्रस्तावित है।
3. जिला कलेक्टर का ‘इनकार’ और नियमों का पेंच (सबसे बड़ा सबूत) विधायक ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर इस जमीन का पट्टा जारी करवाने का प्रयास किया। लेकिन 25 फरवरी 2026 को जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक एफ.12-3(1)/गौशाला/आरए/2025/5338) ने इस मंसूबे पर पानी फेर दिया। कलेक्टर के पत्र में स्पष्ट लिखा गया है:
“ग्राम शाहपुरा की आराजी संख्या 2543 रकबा 78.68 हैक्टेयर किस्म चारागाह भूमि में से 05 हैक्टेयर भूमि देव गौशाला सेवा संस्था को आवंटन हेतु… राजस्थान गौशाला अधिनियम 1960 के अधीन गौशाला का 03 वर्ष से संचालित होना आवश्यक है। नियमों में शिथिलता का कोई प्रावधान नहीं है… प्रकरण को इसी स्तर पर पत्रित किया जाता है।”
जिला कलेक्टर, भीलवाड़ा ने साफ किया कि भूमि आवंटन नियमों के विरुद्ध है।
यानी, संस्था 2025 में बनी थी और उसे 3 साल पुरानी न होने के कारण कलेक्टर ने पट्टा देने से साफ मना कर दिया।
4. सत्ता का रसूख: ईमानदार XEN को हटाया, जबरन तान दी छत
आरोप है कि जब कानूनी रास्ता बंद हो गया, तो ‘दबंगई’ का रास्ता अपनाया गया। बिना पट्टे की इस विवादित जमीन पर सीधे फेंसिंग (बाड़बंदी) कर दी गई। वायरल दावों के अनुसार, जब तत्कालीन विद्युत विभाग के एक्सईएन (XEN) से इस अवैध निर्माण पर बिजली कनेक्शन मांगा गया, तो उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर काम करने से साफ मना कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप उस ईमानदार XEN को एपीओ (APO – पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में) कर दिया गया। उनकी जगह आए नए XEN ने आनन-फानन में वहां बिजली कनेक्शन जारी कर दिया। आज उस कब्जाई गई जमीन पर बोरिंग हो चुकी है, छत डल चुकी है और निर्माण कार्य जोरों पर है।
अपनों में ही बगावत: भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी रोष
विधायक के इस कृत्य से शाहपुरा की आम जनता में भारी आक्रोश है। इतना ही नहीं, शाहपुरा-भीलवाड़ा के स्थानीय भाजपा पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता भी भीतर ही भीतर बेहद नाराज हैं। पार्टी फोरम में दबे स्वर में यह मुद्दा उठने लगा है।
कार्यकर्ताओं में चिंता है कि इस तरह के कृत्य मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ और साफ-सुथरी छवि पर सीधा बट्टा लगा रहे हैं। सरकार धरातल पर अच्छा काम कर रही है, लेकिन ऐसे ‘कब्जा कांड’ 2028 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
अब देखना यह है कि पुख्ता दस्तावेजी सबूतों के सामने आने के बाद क्या जयपुर में बैठा सरकारी अमला और उच्चाधिकारी इस मामले में विधायक और उनके परिवार पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे?
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