Expose Now एक्सपोज ‘माइनिंग महाघोटाला 2.0’: राजस्थान में लाइमस्टोन रॉयल्टी वसूली में करोड़ों का खेल, केंद्र के आदेश के बाद भी निजी कंपनियों और ठेकेदारों को पहुंचाया अनुचित लाभ

-नियम बदले पर नीयत नहीं, 31 मार्च को मियाद खत्म, जून तक चलता रहा पुराना खेल

-विभागीय मिलीभगत, तत्काल समाप्ति के बजाय ‘चेतना पत्र’ देकर कोर्ट जाने का दिया सेफ ‘रास्ता’

-डिजिटल हेरफेर, ऑनलाइन पोर्टल पर रॉयल्टी दरें यथावत, सिर्फ DMFT बदला

जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित 2015 के खान महाघोटाले की तर्ज पर प्रदेश में एक बार फिर लाइमस्टोन (चूना पत्थर) रॉयल्टी वसूली में करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मारवाड़ सीमेंट (अडानी), जेएसडब्ल्यू सीमेंट, रॉयल्टी वसूली फर्म ‘गैलेक्सी माइनिंग एण्ड रॉयल्टीज प्राइवेट लिमिटेड’ और खान विभाग के उच्च अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया। केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेशों और समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद राज्य में पुरानी व्यवस्था के तहत अवैध रूप से 175 प्रति टन की दर से रॉयल्टी वसूली जारी रखी गई, जिससे राज्य सरकार को भारी वित्तीय क्षति हुई है।

नियम बदले पर नीयत नहीं, 31 मार्च को मियाद खत्म, जून तक चलता रहा पुराना खेल:-

भारत सरकार की अधिसूचना के माध्यम से लाइमस्टोन (Burning) को अप्रधान खनिज (Minor Mineral) की श्रेणी से हटाकर प्रधान खनिज (Major Mineral) घोषित किया जा चुका था। इसके तहत संक्रमणकालीन अवधि (Transitional Period) 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी। नियमानुसार, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से केवल मेजर मिनरल के प्रावधानों (MMDR Act 1957) के तहत ही नई दरों पर रॉयल्टी वसूली जानी चाहिए थी और पुराने ERCC ठेकों को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाना था। लेकिन, इस कानूनी बदलाव को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और जून 2026 तक पुरानी रियायती दरों पर ठेका चलता रहा।

विभागीय शह, तत्काल समाप्ति के बजाय ‘चेतना पत्र’ देकर कोर्ट जाने का दिया सेफ पैसेज:-

मामले में सबसे गंभीर आरोप खान विभाग की कार्यप्रणाली पर लग रहे हैं। जब राज्य सरकार स्वयं यह स्पष्ट कर चुकी थी कि 1 अप्रैल 2026 के बाद पुराने ठेके अवैध हैं और इन्हें समयपूर्व समाप्त (Premature Termination) किया जाना न्यायोचित और विधिसम्मत है, तो विभाग ने त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की? निदेशालय के आदेश से स्पष्ट होता है कि ठेके को तुरंत निरस्त करने के बजाय 15 दिनों का नोटिस (चेतना पत्र) जारी किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक सोची-समझी चाल थी, जिसके जरिए रॉयल्टी ठेकेदार को न्यायालय (कोर्ट) जाने और वहां से स्थगन आदेश (Stay Order) लाने के लिए पर्याप्त समय और ‘सेफ पैसेज’ उपलब्ध कराया गया।

डिजिटल हेरफेर, ऑनलाइन पोर्टल पर रॉयल्टी दरें यथावत, सिर्फ DMFT बदला:-

जांच में यह भी सामने आया है कि विभाग ने इस घोटाले को छुपाने और तकनीकी रूप से लीपापोती करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर एक अनोखा खेल खेला। अधिकारियों ने पोर्टल पर मुख्य रॉयल्टी दरों को मेजर मिनरल के अनुसार संशोधित करने के बजाय, उसे पुरानी व्यवस्था (अप्रधान खनिज) पर ही लॉक रखा। इसके विपरीत, केवल डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की दरों में मामूली बदलाव कर दिया गया, ताकि ऊपरी तौर पर ऐसा दिखे कि नियमों का पालन हो रहा है। इस डिजिटल हेरफेर के कारण धरातल पर करोड़ों टन लाइमस्टोन पुरानी दरों पर ही पास होता रहा और राजस्व की खुली लूट होती रही।

Expose Now के तीखे सवाल, जवाबदेही से कब तक भागेगा खान विभाग:-

इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान प्रशासनिक तंत्र और खान विभाग की सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘Expose Now’ इस रिपोर्ट के माध्यम से सीधे सवाल पूछता है:

जनता के टैक्स के पैसे और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की इस तरह संगठित लूट पर अब सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कड़े कदम का इंतजार है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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