Expose Now: जनता को पिलाया ‘जहर’! आमेर के रुंडल में जलदाय विभाग की लापरवाही, टंकी में 7 दिन से सड़ रहे थे 10 बंदर, वही पानी पी रहा था पूरा गांव!

जयपुर। क्या सरकारी तंत्र इतना अंधा और असंवेदनशील हो चुका है कि उसे जनता की जान की कोई परवाह नहीं है? जयपुर के आमेर स्थित रुंडल गांव, मानपुरा माचेड़ी से जलदाय विभाग की लापरवाही की एक ऐसी खौफनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। जलदाय विभाग पिछले कई दिनों से रुंडल गांव के ग्रामीणों को पेयजल टंकी से 10 मरे हुए बंदरों का सड़ा हुआ पानी सप्लाई कर रहा था। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना— 10 बंदरों की लाशें टंकी के भीतर सड़ती रहीं और उसी दूषित, बदबूदार पानी को ग्रामीण अनजाने में पीते रहे!

लापरवाही का पूरा घटनाक्रम, कैसे फूटा भंडाफोड़:- 

-हफ्तों से आ रहा था बदबूदार पानी: ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से नलों में बेहद गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। लोग लगातार इसकी शिकायत कर रहे थे, लेकिन विभाग सोया रहा।

-टंकी खोलने पर उड़े होश: सोमवार सुबह जब विभाग का लाइनमैन/कर्मचारी गोवर्धन शर्मा जलापूर्ति के लिए पहाड़ी पर बनी जलदाय विभाग की उच्च जलाशय (टंकी) पर पहुंचा और सीढ़ियां चढ़कर अंदर झांका, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पानी के ऊपर एक-दो नहीं, बल्कि 10 बंदरों के शव तैर रहे थे और सड़ रहे थे।

-7 दिन पुरानी लाशें: प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बंदर करीब 5 से 7 दिन पहले ही टंकी में गिरकर मर चुके थे। पानी पूरी तरह से दूषित और महामारी फैलाने लायक बन चुका था।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अधिकारियों को घेरा:-

जैसे ही यह खबर गांव में फैली, ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सूचना मिलने पर जब जलदाय विभाग के सहायक अभियंता धर्मेश चौधरी मौके पर पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और जमकर खरी-खोटी सुनाई। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की इस घोर लापरवाही की वजह से पूरे गांव में महामारी और गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

‘Expose Now’ का बड़ा सवाल, गुनहगार कौन?

इस पूरी घटना ने जलदाय विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं:

-टूटी जाली, खुला न्योता: टंकी की लोहे की सुरक्षा जाली लंबे समय से टूटी हुई थी। विभाग ने इसे ठीक कराने की जहमत क्यों नहीं उठाई? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?

-नियमित सफाई का दावा हवा: नियमों के मुताबिक पेयजल टंकियों की नियमित चेकिंग और सफाई होनी चाहिए। अगर ऐसा हो रहा था, तो 7 दिनों तक 10 बंदर अंदर सड़ते रहे और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी? क्या कागजों में ही सफाई का खेल चल रहा है?

वर्तमान स्थिति और दिखावे की कार्रवाई:-

मामला बढ़ने पर वन विभाग की टीम (फॉरेस्टर मुकेश शर्मा के नेतृत्व में) को बुलाया गया, मृत बंदरों को बाहर निकालकर उनका पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार किया गया। अब अधिकारियों ने आनन-फानन में टंकी की सफाई कराने और लोहे की जाली को दुरुस्त करने के निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। सहायक अभियंता ने स्थानीय कर्मचारियों को फटकार लगाने का नाटक तो किया है, लेकिन ‘Expose Now’ पूछता है कि जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इन बड़े अफसरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कब होगी?


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