राजस्थान के करौली जिले का बहुचर्चित ‘पांचना बांध जल विवाद’ एक बार फिर राजधानी के सियासी गलियारों में गूंजने लगा है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अब इस मामले में खुलकर किसानों की ढाल बनकर सामने आए हैं। डॉ. मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत पत्र लिखकर मांग की है कि पांचना बांध की नहरों में तत्काल प्रभाव से पानी छोड़ा जाए और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए।
पत्र के माध्यम से डॉ. मीणा ने कमांड एरिया के किसानों की उस पीड़ा को सरकार के सामने रखा है, जिसे वे पिछले 18 सालों से झेल रहे हैं। पानी के अभाव में पूरा इलाका न केवल आर्थिक तबाही की ओर बढ़ रहा है, बल्कि युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन भी शुरू हो गया है।

सूख रही खेती: आंकड़ों की जुबानी किसानों का दर्द
मंत्री डॉ. मीणा ने अपने पत्र में हवा-हवाई बातें करने के बजाय ठोस आंकड़ों के साथ सरकार को वास्तविकता से रूबरू कराया है:
- 2006 से बंजर है जमीन: पिछले 18 वर्षों (वर्ष 2006) से पांचना बांध का पानी कमांड एरिया के किसानों को नहीं दिया जा रहा है।
- सिंचाई ठप: पानी के अभाव में इलाके की लगभग 40 हजार बीघा कृषि भूमि पूरी तरह से सूख चुकी है।
- लाखों की आबादी बेहाल: इस गंभीर जल संकट का सीधा असर 35 गांवों के करीब 1.25 लाख लोगों पर पड़ रहा है।
- हर साल 200 करोड़ का घाटा: कृषि कार्य ठप होने से किसानों को प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। 2006 से लेकर अब तक यह घाटा 4,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
“पलायन और बेरोजगारी चरम पर” डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पत्र में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा है कि लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान और खेती बर्बाद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी विकराल रूप ले चुकी है। रोजी-रोटी के संकट के चलते ग्रामीण अपने पुश्तैनी गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं।




सिस्टम की मनमानी: हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना
मामला सिर्फ पानी की कमी का नहीं है, बल्कि सिस्टम द्वारा न्यायपालिका के आदेशों को ठेंगा दिखाने का भी है।
- 8 जुलाई 2022 का आदेश: डॉ. मीणा ने याद दिलाया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2022 को ही प्रशासन को नहरों में पानी छोड़ने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
- प्रशासन का दिखावा: इन आदेशों के बाद जिला प्रशासन ने कागजी खानापूर्ति करते हुए सार्वजनिक सूचनाएं तो जारी कीं, लेकिन धरातल पर एक बूंद पानी नहीं छोड़ा गया।
- अवमानना याचिका: न्याय न मिलने पर ग्राम पीलोदा की ‘ग्रामोथान संस्था’ को मजबूर होकर न्यायालय में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर करनी पड़ी।

पत्र के अंत में हाल ही में 23 अप्रैल 2026 के नए अदालती आदेश का हवाला देते हुए मंत्री डॉ. मीणा ने सख्त लहजे में कहा है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों को आए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अफसरशाही की हठधर्मिता के कारण किसानों की नहरें आज भी सूखी हैं।
आगे क्या? अपने ही मुखर और तेजतर्रार कैबिनेट मंत्री की ओर से लिखे गए इस कड़े पत्र के बाद अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर टिक गई हैं। देखना यह है कि क्या सीएम के दखल के बाद करौली के 35 गांवों का 18 साल का लंबा और सूखा इंतजार खत्म हो पाएगा?
