हैदराबाद/जयपुर। देश में अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित रेत खनन घोटाले में एक साथ तीन राज्यों—तेलंगाना (हैदराबाद), राजस्थान (जयपुर) और तमिलनाडु (कोयंबटूर) के 8 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह पूरा मामला 2,408 करोड़ के भारी-भरकम गबन और धन शोधन (Money Laundering) से जुड़ा है, जिसने नौकरशाही और रसूखदार व्यवसायियों के गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।
बड़ी कंपनियों और रसूखदारों पर गिरा ED का डंडा:-
ED की टीमों ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जिन कंपनियों और वीआईपी (VIP) चेहरों के ठिकानों और आधिकारिक परिसरों की तलाशी ली गई :
-मैसर्स M/s GCKC Projects & Works Pvt. Ltd.-मैसर्स M/s Prathima Infrastructure Ltd.
-मैसर्स M/s Turnkey Enterprises Pvt. Ltd.निशाने पर आए मुख्य आरोपी और उनके आवास:
-अशोक कुमार समदड़िया (हैदराबाद और जयपुर स्थित आवासीय परिसर)
-वी.जी. वेंकट रेड्डी (तत्कालीन निदेशक, खान और भूविज्ञान विभाग)
-बोइनपल्ली श्रीनिवास राव (हैदराबाद और जयपुर स्थित आवासों समेत इनका आलीशान फार्म हाउस भी खंगाला गया)
घोटाले की इनसाइड स्टोरी, ACB की FIR से खुला राज:-
‘Expose Now’ के हाथ लगी जानकारी के मुताबिक, इस महाघोटाले की नींव आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा (एनटीआर जिला) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई एक FIR से पड़ी। खान और भूविज्ञान विभाग के तत्कालीन निदेशक वी.जी. वेंकट रेड्डी ने निजी कंपनियों (M/s JPVL, मैसर्स प्रतिमा इंफ्रास्ट्रक्चर और M/s GCKC Projects & Works Pvt. Ltd.) के साथ मिलकर निविदाओं (Tenders) और सरकारी समझौतों की धज्जियां उड़ाईं और बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन को अंजाम दिया।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने पकड़ी ‘चोरी’:-
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने जिला स्तरीय रेत समितियों (DSLC) का गठन कर जांच के आदेश दिए थे। जब इस कमेटी ने जमीन पर जाकर मुआयना किया, तो आंखें फटी की फटी रह गईं। कंपनियों ने दो मुख्य तरीकों से कानून को ठेंगा दिखाया था:
-गहराई की सीमा तोड़ी: सरकार द्वारा जितनी गहराई तक रेत निकालने की अनुमति थी, लालच में आकर उससे कहीं ज्यादा खुदाई की गई।
-कंपनियों का नो-माइनिंग जोन में डाका: जिन क्षेत्रों में खनन की कोई अनुमति (Approval) नहीं थी, वहां से भी अवैध रूप से रेत गायब कर दी गई।
इस बड़ी चोरी के पकड़े जाने के बाद खान और भूविज्ञान निदेशक (DMG) कार्यालय ने इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस और मांग नोटिस जारी किए। गणना करने पर सामने आया कि इन संस्थाओं पर 2,407.70 करोड़ (लगभग 2408 करोड़) का जुर्माना और सरकारी बकाया बनता है, जिसे दबाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला जा रहा था।
ED की तलाशी में क्या-क्या हुआ ज़ब्त:
-26 मई 2026 को जयपुर, तेलंगाना और कोयम्बूर के 8 ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई में ईडी के हाथ कई आपत्तिजनक रिकार्ड सहित करोड़ों की प्रोपर्टी के दस्तावेज मिले हैं।
ज़ब्त की गई सामग्री अनुमानित मूल्य / विवरणभारतीय मुद्रा (कैश) 1.53 करोड़ नगद विदेशी मुद्रा 1800 अमेरिकी डॉलर (USD)चांदी की सिल्लियां 1.29 करोड़ मूल्य का सिल्वर बुलियनडिजिटल सबूत कई मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइस चल/अचल संपत्ति आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी के आपत्तिजनक दस्तावेज़
ED की इस कार्रवाई ने रेत सिंडिकेट से जुड़े सफेदपोशों की नींद उड़ा दी है। ज़ब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और अचल संपत्तियों के दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। ED सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ शुरुआत है, आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां और कुछ और रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
