जयपुर। प्रदेश में जलदाय विभाग के अधीन चल रहे जल जीवन मिशन और अमृत-2.0 सहित अन्य पेयजल परियोजनाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अपनी लंबित आठ सूत्रीय मांगों और बकाया भुगतान को लेकर ठेकेदारों द्वारा गठित ‘संघर्ष समिति’ अब आर-पार के मूड में आ चुकी है। समिति ने सरकार और प्रशासनिक अमले को स्पष्ट शब्दों में 30 मई तक का अल्टीमेटम दे दिया है। यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान सहित सभी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश में पेयजल से जुड़े तमाम कार्य पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
सचिवालय में हलचल: वित्त सचिव से बजट की मांग, नहीं तो थम जाएगी पेयजल सप्लाई:-
आज संघर्ष समिति के बैनर तले ठेकेदारों का एक प्रतिनिधिमंडल सचिवालय पहुंचा, जहां उन्होंने प्रमुख शासन सचिव (वित्त) से मुलाकात की और बकाया भुगतानों के लिए तुरंत बजट जारी करने की पुरजोर मांग की। ठेकेदारों का साफ कहना है कि लंबे समय से बकाया चल रहे पैसों के कारण वे भारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और अब उनके पास काम रोकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

ठेकेदारों ने बैठक में दिया दो टूक अल्टीमेटम:-
इससे पहले कल संघर्ष समिति और विभाग के आला अधिकारियों के बीच एक बेहद अहम और मैराथन बैठक हुई। इस वार्ता में प्रमुख शासन सचिव (PHED/Finance), एमडी (JJM) और सभी मुख्य अभियंता (Chief Engineers) मौजूद रहे। बैठक के दौरान ठेकेदारों ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेता दिया है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, धरातल पर समाधान चाहिए। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि 30 मई की समय सीमा समाप्त होते ही निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
-पेयजल कार्य पूरी तरह बंद: प्रदेशभर में चल रहे PHED और जल जीवन मिशन के सभी नए प्रोजेक्ट्स और निर्माण कार्यों को तुरंत रोक दिया जाएगा।
-O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) ठप: सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ेगा। पेयजल सप्लाई योजनाओं के संचालन और रखरखाव (O&M) का काम भी पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा, जिससे प्रदेश में पानी की सप्लाई ठप हो सकती है।
अतीत का धोखा: मंत्री के वादे निकले ‘कागजी’, 29 मई तक नहीं मिली फूटी कौड़ी:-
यह आंदोलन अचानक खड़ा नहीं हुआ है, बल्कि यह सरकार की वादाखिलाफी का नतीजा है। आंकड़ों पर नज़र डालें तो ठेकेदारों के साथ जो मज़ाक हुआ है, वह हैरान करने वाला है:
–JJM का दर्द: जल जीवन मिशन (JJM) में ठेकेदारों को पिछले 34 महीनों से भुगतान नहीं मिला है। करीब 3500 करोड़ रुपये विभाग दबाकर बैठा है।
-अमृत-2.0 का संकट: अमृत-2.0 योजनाओं के तहत पिछले 12 महीनों (एक साल) से पेमेंट ठप है, जिससे करीब 1000 करोड़ रुपये बकाया हैं।
PHED मंत्री के आश्वासन की खुली पोल:-
इसी बकाया राशि को लेकर ठेकेदारों ने पिछले महीने 13 अप्रैल से 21 अप्रैल तक जल भवन में महापड़ाव और उग्र धरना दिया था। आंदोलन को बढ़ता देख खुद PHED मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने ठेकेदारों के साथ समझौता वार्ता की थी। मंत्री जी ने बाकायदा लिखित शेड्यूल दिया था कि:

-25 अप्रैल तक: 300 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
-5 मई तक: 1500 करोड़ रुपये जारी होंगे।
-15 मई तक: संपूर्ण (पूरा) भुगतान कर दिया जाएगा।
मंत्री के इस ठोस आश्वासन पर ठेकेदारों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था। लेकिन आज 29 मई हो चुकी है, और हकीकत यह है कि ठेकेदारों को फूटी कौड़ी का भी भुगतान नहीं मिला है। सरकार ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया।
ठेकेदार से ‘कर्जदार’ बने विकास के सारथी, घर-गहने बिकने की नौबत:-
सरकार की इस लचर और संवेदनहीन नीति ने ठेकेदारों को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। आज ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे समाज और बाजार में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं:
-बैंकों में हुए डिफाल्टर: समय पर भुगतान न मिलने से बैंकों की लोन किश्तें (EMIs) बाउंस हो रही हैं, जिससे ठेकेदार डिफाल्टर घोषित हो रहे हैं।
-बाजार में साख खत्म: मार्केट में जिन व्यापारियों से पाइप, सीमेंट, बजरी, रोड़ी, स्टील खरीदा था, उनका पेमेंट अटक गया है। बाजार में सालों की कमाई साख मिट्टी में मिल चुकी है।
-लेबर का दबाव, घर छोड़ना मजबूरी: दिहाड़ी मजदूर आए दिन अपनी मजदूरी के पैसों के लिए ठेकेदारों पर दबाव बना रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि मजदूरों और तगादेदारों के डर से कई ठेकेदारों को अपने फोन बंद करने पड़ रहे हैं और वे अपने घरों तक नहीं जा पा रहे हैं।

“हम ठेकेदारों की पीड़ा भी सुनो सरकार!”
“हमने अपनी जेब से, कर्ज लेकर, जमीनें गिरवी रखकर सरकारी योजनाओं में पैसा लगाया ताकि जनता के घर तक पानी पहुंचे। हमने काम पूरा करके योजनाएं चालू कर दीं, और अब जब हमारे हक के पैसे देने की बारी आई तो सरकार मुकर गई। आज हमारे घर, ऑफिस और परिवार के गहने तक बिकने की नौबत आ गई है। आखिर हम कब तक इस मानसिक प्रताड़ना को झेलें?” – पीड़ित ठेकेदार (संघर्ष समिति)
सरकारें बड़ी-बड़ी घोषणाएं करके वाहवाही लूट लेती हैं, लेकिन उन योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले ठेकेदारों और मजदूरों को समय पर वेतन नहीं मिलना सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान है। सरकार को यह समझना होगा कि यदि 30 मई को पानी की सप्लाई बंद हुई, तो जनता का गुस्सा सीधे सरकार पर फूटेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
