“मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…” शपथ के वो शब्द और 12 सालों का सफर: जनधन से लेकर डिजिटल इंडिया तक कैसे गढ़ा गया ‘मोदी मॉडल’

मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी… ये महज शपथ की शुरूआत नहीं थी, बल्कि आधुनिक भारतीय राजनीति में मानो अश्वमेघ यज्ञ की शुरूआत का मंत्र रूपी श्रीगणेश था। ठीक 12 साल पहले 26 मई, 2014 को जब नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र की सत्ता की कमान संभाली तब देश के सामने चुनौती थी वेलफेयर और गवर्नेंस गैप। करोड़ों लोग बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे, गांव में गैस कनेक्शन सपना था, स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थी और सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचने में सालों लग जाते थे। पर वक्त बदल रहा था, ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा, भारत की दशा और दिशा को बदलने को आतुर था। ये विजन और लगन ही थी जो 12 सालों में मोदी की पहचान गढ़ गई- टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की। मोदी 3.0 की आमद ने ये बता दिया कि 2047 का लक्ष्य बड़ा और कड़ा जरूर है लेकिन मुमकिन भी है। ये पूरा मॉडल, इसकी जड़े, उन योजनाओं से बनी जिनसे आम आदमी जुड़ा था, गांव-किसान जुड़े थे। जनधन खाते से लेकर मुफ्त राशन, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान भारत, घर, शौचालय, नल से जल और डिजिटल भुगतान तक, मोदी सरकार ने वेलफेयर पॉलिटिक्स को डेटा और टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर एक नया राजनीतिक मॉडल खड़ा किया।

‘जनधन’ बना गैमचेंजर

PM Jan Dhan Yojana

2014 में मोदी सरकार ने सबसे पहले बैंकिंग सिस्टम में उन करोड़ों लोगों को जोड़ने पर फोकस किया जिनके पास बैंक अकाउंट ही नहीं थे। सरकारी आंकड़ों बताते हैं कि 2015 में करीब 14.72 करोड़ जनधन खाते थे, जो 2025 तक बढ़कर 55.22 करोड़ से ज्यादा हो गए। यही योजना बाद में मोदी मॉडल की रीढ़ बनी क्योंकि कोरोना काल हो या किसान सम्मान निधि, गैस सब्सिडी हो या महिलाओं को सहायता, पैसा सीधे बैंक खाते में भेजा गया। ये पहली बार रहा जब वेलफेयर स्कीम इतने बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी से जुड़ी। लीकेज कम हुआ और सरकार को मिली डायरेक्ट डिलीवरी वाली छवि।

मुफ्त राशन और राजनीतिक बहस

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना

कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना मोदी सरकार की सबसे प्रभावशाली योजनाओं में गिनी जाती है। सरकार का दावा है कि 81 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। जाति और क्षेत्रीय समीकरण वाली अब तक की राजनीति के विपरीत योजना ने गरीब वोटर के बीच ये धारणा मजबूत की कि सरकार सीधे मदद कर रही है।

धुएं से गैस तक की यात्रा

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का मकसद गरीब महिलाओं को LPG कनेक्शन देना था। सरकार का दावा है कि अब तक 10.51 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जोड़ा। हालांकि समय-समय पर कुछ रिसर्च रिपोर्ट्स ने इशारा किया कि सिलेंडर रीफिल की लागत गरीब परिवारों के लिए चुनौती है। ऐसे में योजना ने LPG की पहुंच तो बढ़ाई लेकिन व्यवहारिकता के सवालों से आज भी घिरी हुई है।

जान है तो ‘आयुष्मान’ है

आयुष्मान भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने हेल्थ सेक्टर में सबसे बड़ा दांव आयुष्मान भारत से खेला। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर दिया गया। मोदी ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना कहा। इससे करोड़ों गरीब परिवारों को बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिली। खासकर हार्ट सर्जरी, कैंसर और गंभीर बीमारियों में गरीबों को राहत मिली। हालांकि कई राज्यों में अस्पतालों के भुगतान, निजी अस्पतालों की भागीदारी और फर्जी क्लेम जैसे सवाल भी उठे लेकिन राजनीतिक रूप से यह योजना BJP की सबसे मजबूत वेलफेयर योजनाओं में शामिल हो गई। आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2026 तक अस्पतालों की संख्या 36,229 हो चुकी है जबकि कुल 11.69 करोड़ लोगों का इलाज किया जा चुका है।

हर घर जल… एक नया ग्रामीण मिशन

हर घर नल योजना

2019 में शुरू हुई जल जीवन मिशन मोदी सरकार के सबसे बड़े ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2019 में सिर्फ 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल का पानी पहुंचता था, जो 2025 तक बढ़कर 15.62 करोड़ घरों तक पहुंच गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और गांवों की जिंदगी बदलने वाला मिशन बताया। हालांकि योजना में भ्रष्टाचार की खबरें है और कई राज्यों से आई शिकायतें कि नल तो लगा लेकिन पानी नहीं आया। यानि योजना के सामने अब भी चुनौती सिर्फ पाइपलाइन बिछाने की नहीं है बल्कि लगातार साफ पानी पहुंचाने की है।

पीएम आवास… गरीबों के लिए खुद की छत

पीएम आवास योजना

पीएम आवास योजना के तहत 3.78 करोड़ ग्रामीण और 1.17 करोड़ शहरी घर स्वीकृत किए गए हैं। गांवों में मोदी की बढ़ती साख और पकड़ के पीछे इस योजना को भी अहम माना जाता है। लाभार्थियों के बीच यह धारणा बनी है कि सरकार ने असंभव से लगने वाले खुद के आशियाने के सपनों को ना केवल पंख दिए बल्कि उड़ान भी दी।

स्वच्छ भारत…

स्वच्छ भारत अभियान

2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन आज भी प्रधानमंत्री मोदी के सबसे बड़े जन अभियान के तौर पर गिना जाता है। करोड़ों शौचालय बनाए गए और इसे महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जोड़ा गया। मास मोबिलाइजेशन पॉलिटिक्स का इससे बेहतरीन उदाहरण कम ही मिलते हैं। पहली बार किसी सरकार ने सफाई जैसे मुद्दे को राष्ट्रीय आंदोलन की तरह पेश किया।

डिजिटल इंडिया और मोदी मॉडल

डिजिटल इंडिया

मोदी सरकार की सबसे बड़ी पहचान सिर्फ वेलफेयर नहीं, बल्कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन भी है। UPI, डिजिटल पेमेंट, आधार आधारित वेरिफिकेशन, ऑनलाइन गवर्नेंस और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर ने सरकारी कामकाज का तरीका बदल दिया। डिजिटल इंडिया के जरिए सरकार ने गांवों तक इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। नतीजा, भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बदल गया।

आत्मनिर्भर भारत और ग्लोबल इंडिया
कोरोना के बाद मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी में भारत को वैश्विक हब बनाने की कोशिशें तेज हुईं। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग पावर बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के वो फैसले जिन्होंने चुनावी जीत के अश्वमेघ यज्ञ को आगे बढ़ाया इतिहास के पन्नों में दर्ज हुए।

1.J&K से अनुच्छेद 370 का खात्मा

  1. महिलाओं का 33 फीसदी आरक्षण
  2. नोटबंदी (हालांकि इसके फायदे पर आज भी सवाल उठते हैं, आलोचना होती है लेतिन डिजिटल ट्रांजेक्शन की क्रांति की नींव यहीं से पड़ी थी)
  3. GST-एक देश, एक टैक्स
  4. तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को निजात
    6.अग्निवीर
    7.नागरिकता संशोधन कानून

सवाल भी कम नहीं

ये सही है कि केन्द्र में और कई राज्यों में BJP प्रधानमंत्री मोदी चे चेहरे को जीत की गारंटी बना चुकी है, यहां तक कि असंभव सी लगती बंगाल की सियासत में सत्ता तक का सफर भी तय कर लिया गया लेकिन सरकार और मोदी खुद भी आलोचना का शिकार लगातार होते रहते हैं। मुफ्त योजनाओं के देश पर पड़ने वाले आर्थिक असर पर दोनों घिरते रहते हैं। रोजगार सृजन की गति और 2014 से पहले का वादा क्या एक-दूसरे को सपोर्ट कर रहे हैं? योजनाओं की ग्राउंड डिलिवरी हर राज्य में समान है? क्या ग्रामीण आय में समुचित सुधार हुआ है? क्या किसानों की आय दोगुनी हुई? यो तो वो सवाल हैं जिसका BJP लगातार सामना करती ही है लेकिन एक सवाल जिसने जीत की चमक को पहली बार फीका किया वो था संविधान में बदवाल की नीयत वाला। 2024 में खुद पार्टी के नेताओं के बयान को आधार बना ऐसा नैरेटिव बनाया जिसने पहली बार मोदी के चेहरे पर शिकन ला दी। पहली बार मोदी के चेहरे पर पार्टी बहुमत के आंकड़े को नहीं जुटा पाई।

मोदी 3.0 का आगे लक्ष्य क्या?

प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना, AI, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में दुनिया का नेतृत्व करना, रक्षा और टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनना। मोदी सरकार का लक्ष्य वैश्विक भारत को गढ़ना है। 12 साल में मोदी मॉडल ने भारतीय राजनीति का नैरेटिव जरूर बदला है। राजनीति में केवल वादे से आगे बढ़कर अब योजनाओं का लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित किया गया है और शायद यही मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी है।

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