करौली। माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जयपुर) के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में आज, 25 मई 2026 को करौली जिला कारागृह का औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण प्रताप सिंह मीना (सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, करौली) द्वारा किया गया।
अधिकारियों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, बंदियों को दी जाने वाली सुविधाओं और उनके विधिक अधिकारों की जमीनी हकीकत को जांचा।

निरीक्षण के मुख्य अंश और दिशा-निर्देश:
- बंदियों से सीधा संवाद: निरीक्षण के दौरान कारागृह में कुल 180 बंदी निरुद्ध मिले। न्यायाधीश ने बंदियों से सीधे वार्ता कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
- विधिक अधिकारों की जानकारी: बंदियों को उनके अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता, विधिक सेवा प्राधिकरण और LADC की कार्यप्रणाली के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही, उन्हें नालसा (NALSA) की निशुल्क हेल्पलाईन नंबर 15100 की जानकारी भी प्रदान की गई।
- सभी बंदियों के पास अधिवक्ता: पूछताछ के दौरान सभी बंदियों ने यह स्पष्ट किया कि उनके पास अपने मुकदमों की पैरवी के लिए अधिवक्ता मौजूद हैं।
- बुनियादी सुविधाओं की जांच: टीम ने जेल के चिकित्सालय में दी जाने वाली मेडिकल सुविधाओं, दवाइयों, रसोई घर, एसटीडी (STD) सुविधा और बैरिकों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान लाइट और वेंटिलेशन (हवा-रोशनी) की व्यवस्थाओं का विशेष रूप से जायजा लिया गया।

- मेडिकल वार्ड के लिए खास निर्देश: कारागृह की साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था को देखने के बाद, जेल प्रशासन को राज्य सरकार द्वारा जारी ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, मेडिकल वार्ड में बंदियों के लिए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए गए।
- हेल्प डेस्क का निरीक्षण: इस अवसर पर जिला कारागृह में स्थित ‘विधिक सहायता केंद्र’ और ‘लीगल एड हेल्प डेस्क’ का भी निरीक्षण किया गया और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।