Expose Now खुलासा: जल भवन का ‘हाईटेक नेटवर्क’ प्लान डिब्बा गुल, पुरानी फाइलों में उलझा 3.64 करोड़ का बजट, ‘फ्लॉप’ सिस्टम पर FC ने उठाए सवाल!

-20 साल पुराने कबाड़ सिस्टम से चल रहा PHED मुख्यालय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-गवर्नेंस ठप, फिर भी अधिकारियों की आधी-अधूरी तैयारी

जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के मुख्यालय, जल भवन को डिजिटल युग में ले जाने का दावा करने वाला 3.64 करोड़ रुपये का हाईटेक प्रोजेक्ट अपनी पहली ही परीक्षा में फेल हो गया है। जल भवन का मौजूदा लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) ढांचा 20 साल पुराना हो चुका है, जो आज के समय में कबाड़ के समान है। 10/100 Mbps की कछुआ चाल से चलने वाले इस सिस्टम के कारण न तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ठीक से हो पाती है और ना ही ई-गवर्नेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग (SCADA) जैसी जरूरी सेवाएं काम कर रही हैं। यह सिस्टम साइबर हमलों के लिए भी एक खुला निमंत्रण बना हुआ है। इसके बावजूद, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर कितनी लापरवाही से काम कर रहे हैं, इसका कच्चा चिट्ठा हाल ही में वित्त समिति की बैठक में खुल गया।

बिना लैंडलाइन और IP फोन प्लानिंग के कैसे बनेगा ‘डिजिटल जल भवन’?

मुख्य अभियंता (CE & AS) जल भवन में कोर स्विच, नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल और नया फाइबर बैकबोन बिछाने के लिए 3,64,57,356 रुपये का भारी-भरकम प्रस्ताव लेकर कमेटी के सामने पहुंचे थे। वित्त विभाग से लेकर तकनीकी समिति (DoIT&C) तक से हरी झंडी मिल चुकी थी। लेकिन जब इस 3.64 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के प्रस्ताव को बारीक नजरों से परखा गया, तो अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई। फायनेंस कमेटी की बैठक के दौरान सामने आया कि इस पूरे प्रस्ताव में वर्तमान और भविष्य की सबसे बुनियादी जरूरतों पर फोकस ही नहीं किया गया। इतने बड़े प्रोजेक्ट में यह साफ ही नहीं किया गया कि लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड पर कितना खर्च आएगा। आधुनिक दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट-आधारित ‘IP Phones’ इस नए नेटवर्क पर चलेंगे या नहीं, इस पर प्रस्ताव पूरी तरह मौन था।

अधिकारियों को ‘होमवर्क’ सुधार कर नया प्रस्ताव लाने के सख्त निर्देश:-

कमेटी ने अधिकारियों की इस ‘बिना सोचे-समझे’ तैयार की गई योजना पर सख्त नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक और वित्तीय (A&F) स्वीकृति देने से साफ इनकार कर दिया और प्रस्ताव को आगामी आदेशों तक टाल (Defer) दिया है। साथ ही मुख्य अभियंता (CE & AS) जयपुर को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी कमियों को सुधारें। अब एक नया और फ्रेश प्रस्ताव बनाना होगा, जिसमें लैंडलाइन खर्च, ब्रॉडबैंड डिटेल्स और IP फोन की अनुकूलता (Compatibility) का पूरा ब्योरा शामिल हो। साथ ही, नया प्रस्ताव वर्तमान समय की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड होना चाहिए, न कि सिर्फ बजट ठिकाने लगाने के लिए।

अब देखना यह है कि कछुआ चाल के नेटवर्क से जूझ रहा जल भवन, अधिकारियों की इस सुस्ती के बाद कब तक सच में ‘हाईटेक’ हो पाता है!

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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