Expose Now स्पेशल: राजस्थान में जलदाय विभाग की टंकियों की होगी ‘हेल्थ ऑडिट’, जर्जर ढांचों को ‘नकारा’ घोषित करने की समय-सीमा होगी तय

अंदर की खबर: वित्त समिति (FC) की बैठक में बड़ा फैसला, जयपुर की कालिदास मार्ग टंकी ने खोली पोल, सिर्फ 37 साल में कबाड़ हुई टंकी, गिराने और नई बनाने पर खर्च होंगे 1.75 करोड़

जयपुर। राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा बनाई गई पानी की टंकियों की घटिया निर्माण गुणवत्ता, समय से पहले उनके जर्जर होने और सालों की सरकारी अनदेखी को लेकर महकमे में भारी हड़कंप मच गया है। वित्त समिति की बैठक में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर नीतिगत फैसला लिया गया है। कमेटी ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए हैं कि अब पूरे राजस्थान में जलदाय विभाग के सभी पुराने उच्च जलाशयों (OHSR) यानी पानी की टंकियों का अनिवार्य रूप से पीरियोडिक स्ट्रक्चरल हेल्थ ऑडिट (समय-समय पर तकनीकी जांच) कराया जाएगा। इस पूरे अभियान और नीति निर्धारण की कमान मुख्य अभियंता (तकनीकी) को सौंपी गई है।

अब कागजों में नहीं, ‘हार्ड बाउंड रजिस्टर’ में दर्ज होगी हर टंकी की कुंडली:-

भ्रष्टाचार और मनमर्जी को रोकने के लिए वित्त समिति ने अब पूरे प्रदेश के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब डिवीजन स्तर पर हर पानी की टंकी की पूरी ‘कुंडली’ एक हार्ड बाउंड रजिस्टर में मेंटेन की जाएगी। इस रजिस्टर में निम्नलिखित विवरण दर्ज होंगे:

-टंकी की कुल क्षमता और ऊंचाई।

-निर्माण और कमिशनिंग (शुरुआत) की सटीक तारीख।

-अंतिम स्ट्रक्चरल हेल्थ ऑडिट की विस्तृत रिपोर्ट और तिथि।

टंकियों को लेकर इंजीनियर्स की जिम्मेदारी होगी तय:-

हार्ड बाउंड रजिस्टर पर संबंधित सहायक अभियंता (AEn) के हस्ताक्षर होंगे और अधिशासी अभियंता (EE) द्वारा इसे सत्यापित (Verify) किया जाएगा। अगर भविष्य में कोई टंकी समय से पहले जर्जर होती है, तो इन अधिकारियों की सीधे तौर पर जवाबदेही तय होगी।

वित्त समिति ने इस वित्तीय मंजूरी के साथ कुछ बेहद कड़े राइडर्स (शर्तें) भी लगाए हैं:

-मंजूरी अनिवार्य: जर्जर टंकी को गिराने से पहले सक्षम प्राधिकारी से इसकी विधिवत लिखित अनुमति लेनी होगी।

-सुरक्षा सर्वोपरि: घनी आबादी क्षेत्र होने के कारण ब्लास्टिंग या डिमोलिशन के समय सुरक्षा के सभी पुख्ता इंतजाम करने होंगे।

-गाइडलाइंस की पालना: विभाग के पुराने सर्कुलर (दिनांक 08.09.2017) और वित्त विभाग के एसओपी (SOP दिनांक 08.03.2017) के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।

मुख्य अभियंता (तकनीकी) को विशेष सर्कुलर जारी करने के निर्देश:-

कमेटी ने मुख्य अभियंता (तकनीकी) को एक विशेष सर्कुलर जारी करने के निर्देश दिए हैं, जो यह तय करेगा कि पूरे राज्य में किसी भी टंकी को किस निश्चित समय-सीमा (Timeline) और मानदंडों (Criteria) के तहत ‘अनुपयोगी’ या ‘परित्यक्त’ (Abandoned) घोषित किया जा सकता है। अब तक बिना किसी ठोस नियम के चल रहे टंकियों को रिजेक्ट करने के ‘खेल’ पर इससे हमेशा के लिए ताला लग जाएगा।

37 साल में ही जवाब दे गई कालिदास मार्ग की टंकी:-

विभाग की आंखें खोलने के लिए जयपुर के बनीपार्क स्थित पॉश इलाके कालिदास मार्ग पंप हाउस परिसर (PHED सिटी सब-डिवीजन-VI नॉर्थ) का मामला सामने आया है। आम तौर पर आरसीसी (RCC) ढांचों और पानी की टंकियों की उम्र कम से कम 50 से 60 साल मानी जाती है, लेकिन यह टंकी महज 37 साल में ही पूरी तरह कबाड़ और मौत का कुआँ बन चुकी है।

MNIT की जांच में खुली पोल:-

जलदाय विभाग और मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) के सिविल विभाग के संयुक्त दौरे में पाया गया कि इस 1000 KL (किलोलीटर) क्षमता की टंकी की स्थिति बेहद नाजुक है। इसके कॉलम और बीम में बड़े-बड़े क्रैक्स (दरारें) आ चुके हैं, कंक्रीट उखड़कर गिर रहा है (Spilling) और पूरी टंकी में पानी का रिसाव हो रहा है। जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस जर्जर टंकी को पूरी तरह ध्वस्त (Dismantle) करने और इसकी जगह 1750 KL क्षमता की नई टंकी बनाने की वित्तीय मंजूरी दे दी गई है। इस पूरी कवायद में राजकोष और जनता की गाढ़ी कमाई के 175.33 लाख (करीब 1.75 करोड़ रुपए) खर्च किए जाएंगे।

टेंडर्स का गणित, 23% नीचे दर पर ठेका, गुणवत्ता पर फिर सवाल?

सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस काम के लिए अतिरिक्त मुख्य अभियंता (क्षेत्र-द्वितीय, जयपुर) द्वारा 196.72 लाख की तकनीकी स्वीकृति (TS) जारी की गई थी। इसके बाद जब टेंडर आमंत्रित किए गए, तो जयपुर की फर्म मेसर्स डागर कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एनआईटी (NIT) लागत से 23.53% कम (Below) की दर पर बोली लगाई।

समिति ने1,50,43,108.51 (लगभग 1.50 करोड़) के इस वर्क ऑर्डर अमाउंट में 5% आकस्मिक व्यय (Contingency) और 11% प्रोरैटा शुल्क जोड़कर कुल 175.33 लाख की अंतिम वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है। हालांकि, इतनी कम दर पर काम होने से भविष्य में निर्माण की गुणवत्ता कैसी होगी, इसे लेकर भी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। कालिदास मार्ग की इस टंकी से वर्तमान में 17,470 लोगों की आबादी लाभान्वित हो रही है। विभाग ने साल 2038 के लिए 22,886 और साल 2053 के लिए 29,981 की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर इस नई 1750 KL की टंकी की योजना बनाई है। पानी की मांग का आकलन 135 एलपीसीडी (लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) के हिसाब से किया गया है, जिसमें 15% वितरण छीजत (लॉस) और 10% संस्थागत मांग भी शामिल है।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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