जयपुर। राजस्थान में सरकारें बदलती हैं, बजट के पन्ने बदलते हैं और मंत्रियों के चेहरे बदलते हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं बदलता तो वो है बेरोजगार युवाओं की किस्मत। “Expose Now” आज एक ऐसा बड़ा खुलासा करने जा रहा है, जिसने प्रदेश के जलदाय विभाग (PHED) और उसके मुखिया कन्हैयालाल चौधरी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। हर बजट में युवाओं को नौकरी की उम्मीद का ‘लॉलीपॉप’ थमाया जाता है, लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि जलदाय विभाग पिछले कई सालों से भर्तियों के नाम पर केवल ‘कागजी घोड़े’ दौड़ा रहा है। 3-3 बजट निकल गए, हजारों पदों की बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुईं, लेकिन धरातल पर एक भी पद पर स्थाई भर्ती नहीं हो सकी।
क्या PHED संभालने में ‘नाकाम’ रहे मंत्री कन्हैयालाल चौधरी?
“Expose Now” सीधे तौर पर जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। चुनाव से ठीक पहले और मंत्री बनने के बाद बड़े-बड़े मंचों से कन्हैयालाल चौधरी ने दावा किया था कि ‘हमारी सरकार जो कहती है, वो करती है और जल्द ही विभाग में बंपर भर्तियां होंगी।’ लेकिन अब जनता और युवा पूछ रहे हैं सवाल:

- सवाल नं. 1: जब 25 हजार पदों की क्षमता या तैयारी नहीं थी, तो युवाओं को लुभाने के लिए इतनी बड़ी घोषणा क्यों की गई?
- सवाल नं. 2: 1050 पदों का विज्ञापन जारी करके उसे निरस्त क्यों किया गया? क्या विभाग के पास भर्ती कराने का कोई रोडमैप नहीं है?
- सवाल नं. 3: तीसरे साल के भी 5 महीने बीतने को आए हैं, लेकिन अब तक संविदा भर्ती की फाइल भी विभागों के चक्कर काट रही है। कन्हैयालाल जी, आखिर प्रदेश का युवा कब तक सिर्फ तारीखों का इंतजार करेगा?
घोषणाओं की ‘हैट्रिक’ और दावों की खुली पोल:-
जलदाय विभाग (PHED) में भर्तियों को लेकर सरकार और विभाग के मुखिया कन्हैयालाल चौधरी किस तरह केवल कागजी दावे कर रहे हैं, इसकी पूरी इनसाइड स्टोरी इन 3 बड़े सबूतों में छिपी है:
-पहले बजट की कहानी (25,000 पदों पर स्थाई भर्ती का दावा): सरकार ने अपने पहले बजट में प्रदेश के युवाओं को सबसे बड़ा सपना दिखाया। घोषणा की गई कि जलदाय विभाग के तकनीकी संवर्ग में 25 हजार पदों पर स्थाई भर्ती की जाएगी। लेकिन पूरा साल बीत गया और विभाग ने एक भी पद पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं की। इसे युवाओं के साथ पहला बड़ा ‘पलटीमार’ कदम माना गया।
-दूसरे बजट का खेल (1050 पदों का विज्ञापन और फिर निरस्तीकरण): जब पहले बजट के 25 हजार पदों का कुछ अता-पता नहीं चला, तो दूसरे बजट में नया दांव खेला गया। इस बार घोषणा को समेटकर 1050 पदों पर लाया गया। विभाग ने बकायदा इसका विज्ञापन भी जारी किया, जिससे युवाओं में उम्मीद जगी। लेकिन कुछ ही समय बाद इस विज्ञापन को भी निरस्त (Cancel) कर दिया गया, जिससे बेरोजगारों के हाथ फिर खाली रह गए।
-तीसरे बजट का नया पैंतरा (3000 संविदा पदों का झुनझुना): पिछले दोनों बजटों में युवाओं को गुमराह करने के बाद, तीसरे बजट में एक और नया पैंतरा चला गया। इस बार स्थाई नौकरी की बात पूरी तरह गायब कर दी गई और कहा गया कि विभाग में 3000 पदों पर संविदा (Contract) भर्ती की जाएगी। युवाओं का आरोप है कि यह सिर्फ उनकी नाराजगी को शांत करने के लिए फेंका गया एक नया ‘झूठ’ है।
-वक्त का तकाजा (तीसरे साल के भी 5 महीने साफ): इस तीसरे बजट की घोषणा को आए और इस साल के भी 5 महीने बीत चुके हैं, लेकिन धरातल पर अब तक एक भी बेरोजगार को नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। लगातार बदलती घोषणाएं यह साफ जाहिर करती हैं कि विभाग के पास भर्तियों को लेकर कोई ठोस नीति या रोडमैप है ही नहीं।

सोशल मीडिया पर फूटा युवाओं का गुस्सा, “नेताओं से सीखो बेवकूफ बनाना”:-
यह मुद्दा अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर युवाओं का गुस्सा उबल रहा है। युवाओं का कहना है कि जलदाय विभाग के मुखिया सिर्फ राजनीतिक रैलियों और समीक्षा बैठकों में व्यस्त हैं, जबकि विभाग का तकनीकी ढांचा बिना कर्मचारियों के ढह रहा है। “पिछले दोनों बजट में युवाओं और जनता को झूठ बोलने के बाद अब फिर नया जाल बुना जा रहा है। नेताओं से सीखो कि कैसे बेवकूफ बनाया जाता है और कैसे गुमराह किया जाता है। अब युवाओं को सोचना होगा कि वे किस आधार पर वोट दे रहे हैं!”
पेयजल व्यवस्था की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को ‘प्रो-एक्टिव’ रहने का निर्देश देने वाले मंत्री कन्हैयालाल चौधरी खुद अपने विभाग की भर्तियों को लेकर ‘डीएक्टिव’ मोड में क्यों हैं? युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और बार-बार घोषणाएं बदल कर पलटी मारना यह साबित करता है कि जलदाय विभाग इस वक्त गंभीर प्रशासनिक विफलता से जूझ रहा है। अब देखना यह है कि @RajCMO और खुद मंत्री जी इस “रोजगार के सूखे” पर क्या जवाब देते हैं!
-ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now