राजस्थान: प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों का पुलिस मुख्यालय भ्रमण, ड्रग्स, साइबर क्राइम और महिला सुरक्षा पर हुआ विशेष मंथन

जयपुर: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में कदम रख रहे युवा प्रोबेशनर अधिकारियों के एक उच्च स्तरीय दल ने बुधवार, 20 मई को पुलिस मुख्यालय (PHQ) स्थित कांफ्रेंस हॉल का आधिकारिक भ्रमण किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा अधिकारियों को राज्य में पुलिसिंग के बुनियादी ढांचे, कानून व्यवस्था के व्यावहारिक पहलुओं और पुलिस व प्रशासन के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने की बारीकियों से रूबरू कराना था।

इस दौरान महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा के साथ प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों का एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस और प्रशासन के सुचारू कामकाज को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

सफल नेतृत्व के लिए पुलिस-प्रशासन का तालमेल अपरिहार्य: DGP

संवाद सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि फील्ड में एक सफल प्रशासनिक नेतृत्व के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर और निरंतर तालमेल होना बेहद जरूरी है। इसके बिना कानून व्यवस्था को सुदृढ़ रखना संभव नहीं है।

इसी कड़ी में महानिदेशक पुलिस (स्पेशल ऑपरेशन्स) आनंद कुमार श्रीवास्तव ने समन्वय के विषय पर अपना महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने युवा अधिकारियों को समझाया कि जिला स्तर पर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) की संयुक्त भूमिका कितनी अहम होती है।

पुलिस संरचना, सड़क सुरक्षा और महिला अधिकारों पर ब्रीफिंग

भ्रमण कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अलग-अलग महत्वपूर्ण विषयों पर प्रोबेशनर्स का मार्गदर्शन किया:

  • पुलिस का ढांचा: अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसेफ ने ‘स्टेट पुलिस फ्रेमवर्क’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राजस्थान पुलिस की संरचना, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी।
  • सड़क सुरक्षा: महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण एवं यातायात) अनिल पालीवाल ने राज्य में सड़क सुरक्षा के वर्तमान परिदृश्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली और व्यावहारिक दिशा-निर्देशों पर प्रकाश डाला।
  • महिला व बाल सुरक्षा: उप महानिरीक्षक पुलिस (सिविल राइट्स) श्वेता धनखड़ ने महिला, बच्चों और कमजोर वर्गों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए राजस्थान पुलिस द्वारा संचालित की जा रही विशेष योजनाओं की जानकारी दी।

आधुनिक चुनौतियों का सामना: ड्रग्स और साइबर क्राइम पर फोकस

प्रशासनिक अधिकारियों को आज के दौर की नई चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया।

नारकोटिक्स और साइबर सेल का ज्ञान: महानिरीक्षक पुलिस (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) विकास कुमार ने ड्रग्स लॉ एनफोर्समेंट पर जोर देते हुए बताया कि मादक पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जिला स्तर पर नार्को कोऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। वहीं, उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने डिजिटल खतरों और साइबर अपराधों की चुनौतियों से अधिकारियों को अवगत कराया।

इस सत्र के बाद आईएएस अधिकारियों के दल ने 1930 साइबर कंट्रोल रूम का प्रत्यक्ष दौरा किया और देखा कि साइबर ठगी के मामलों में पुलिस द्वारा किस तरह त्वरित तकनीकी कार्रवाई (Real-time Action) की जाती है।

‘अभय कमांड सेंटर’ में देखा स्मार्ट पुलिसिंग का मॉडल

भ्रमण कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी प्रोबेशनर आईएएस अधिकारी जयपुर कमिश्नरेट पहुंचे, जहां उन्होंने अत्याधुनिक ‘अभय कमांड सेंटर’ का अवलोकन किया।

जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने युवा अधिकारियों को शहर की डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम, ई-चालान प्रक्रिया और आपातकालीन रेस्पॉन्स सिस्टम (Emergency Response System) की पूरी कार्यप्रणाली का सजीव (Live) प्रदर्शन कर दिखाया। इस दौरे ने अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए आधुनिक ‘स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल’ से पूरी तरह परिचित कराया।

Share This Article
Leave a Comment