साइबर ठगी पर कड़ा प्रहार: थानों में ऑनलाइन परिवाद के लिए जनता को करेंगे प्रेरित, हेल्पलाइन 1930 की हर हफ्ते होगी मॉनिटरिंग

जयपुर। राजस्थान में कानून व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद करने, संगठित अपराधों को नेस्तनाबूद करने और सड़क हादसों में कमी लाने के लिए राजस्थान पुलिस ने अपनी कमर कस ली है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के सभी रेंज आईजी, जयपुर-जोधपुर के पुलिस आयुक्तों (कमिश्नर) और सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (SP) को अपराध नियंत्रण के लिए कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

डीजीपी शर्मा ने पेंडिंग मुकदमों पर गहरी चिंता जताते हुए सभी कप्तानों को सख्त डेडलाइन दी है कि अगले तीन महीनों के भीतर जिला स्तर पर एक वर्ष से अधिक समय से लंबित (Pending) चल रहे किसी भी मामले का हर हाल में निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही, झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर पुलिस का समय बर्बाद करने वाले तत्वों के खिलाफ भी प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

गैंगस्टर्स और संगठित अपराध पर प्रहार: आर्थिक चोट पहुंचाएगी पुलिस

बैठक में राजस्थान पुलिस की प्राथमिकताओं के आधार पर माफियाओं और गैंगस्टर्स के विरुद्ध चल रही कार्रवाई की गहन समीक्षा की गई। डीजीपी ने प्रभावित जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए कि वे अपराधियों को केवल जेल भेजने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी आपराधिक गतिविधियों और काली कमाई से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें कुर्क (जब्त) करने की सख्त कार्रवाई अमल में लाएं।

केस ऑफिसर स्कीम और नए कानून:

गंभीर और जघन्य आपराधिक प्रकरणों को ‘केस ऑफिसर स्कीम’ (Case Officer Scheme) में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि अदालतों में प्रभावी पैरवी कर अपराधियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलवाई जा सके। इसके अलावा नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) कानूनों के तहत ई-सम्मन, डिजिटल वारंट की तामील और ऑनलाइन एफआईआर की व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

सड़क हादसों पर चिंता: भीलवाड़ा और उदयपुर एसपी को विशेष निर्देश

यातायात प्रबंधन और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़ों की समीक्षा के दौरान डीजीपी ने भीलवाड़ा और उदयपुर रेंज में उच्च मृत्यु दर पर गहरी चिंता व्यक्त की।

  • अनिवार्य हेलमेट अभियान: हाईवे और ग्रामीण लिंक सड़कों पर हादसों को रोकने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो दिन विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
  • तकनीकी चेकिंग: नशे में वाहन चलाने वालों और ओवरस्पीडिंग के खिलाफ इंटरसेप्टर वाहनों और ब्रेथ एनालाइजर मशीनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • खाकी के लिए कड़ा नियम: पुलिसकर्मियों को समाज के सामने एक बेहतर उदाहरण पेश करने की नसीहत देते हुए डीजीपी ने आदेश दिए कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वाले पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन, कमिश्नरेट या किसी भी कार्यालय परिसर में एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके लिए बकायदा गेट पर ही विशेष चेकिंग व्यवस्था की जाएगी।

साइबर फ्रॉड नियंत्रण और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली

अभियान का नाम / विंगमुख्य निर्देश और कार्ययोजना
साइबर हेल्पलाइन 1930प्राप्त शिकायतों के निस्तारण और बैंकों द्वारा होल्ड की गई राशि की सभी एसपी खुद नियमित मॉनिटरिंग करेंगे।
ऑनलाइन परिवाद (E-Complaints)थानों पर आने वाले पीड़ितों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे घर बैठे अपने केस की प्रगति देख सकें।
महिला सुरक्षाथानों में महिला कर्मियों के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने और महिला सुरक्षा सेल को और अधिक एक्टिव करने के निर्देश।

मुख्यालय के ये आला अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण वर्चुअल महा-मंथन के दौरान जयपुर पुलिस मुख्यालय में डीजी (ट्रैफिक व ट्रेनिंग) अनिल पालीवाल, डीजी (SOG) आनंद श्रीवास्तव, एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) वी.के. सिंह, एडीजी (क्राइम) बिपीन कुमार पांडे, एडीजी डाॅ. प्रशाखा माथुर, एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ और एडीजी लता मनोज कुमार सहित कई विंग्स के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। डीजीपी ने अंत में स्पष्ट किया कि अवैध माइनिंग, बजरी के अवैध परिवहन और भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त विभागीय गाज गिरेगी।

Share This Article
Leave a Comment