-खेल ‘पार्टनरशिप’ का या ‘प्रोपराइटरशिप’ का? एक ही फर्म के दो चेहरों ने उड़ाए वित्त समिति के होश, सरकारी फाइलों में छिपाया फर्जीवाड़ा!
-चीफ इंजीनियर की ‘बगावत’ और वित्तीय सलाहकार का ‘वीटो’, बैकडेट से नया कागज बनवाने का खेल फेल, दागी फर्म को बचाने वाले बैकफुट पर !
-गुजरात से लेकर राजस्थान तक ‘अयोग्य’ और ‘फ्लॉप’ रही है यह जेवी कंपनी, फिर भी फलौदी की जनता का मुकद्दर सौंपने की यह जिद क्यों?
जयपुर/जोधपुर। राजस्थान में आम जनता को शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प के साथ शुरू हुए ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) में चहेती और विवादित फर्मों को उपकृत करने का खेल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ताजा और बेहद गंभीर मामला जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) जोधपुर क्षेत्र के फलौदी का है। यहां ब्लॉक देचू और लोहावट के 79 गांवों तथा उनकी 325 ढाणियों में हर घर जल कनेक्शन (FHTCs) पहुंचाने के लिए 209.63 करोड़ की विशाल जल आपूर्ति परियोजना (NIB No. 01/2025-26) में सबसे कम बोली लगाने वाले (L1) जॉइंट वेंचर मैसर्स एचपी-केसीसी जेवी (M/s HP-KCC JV) को तकनीकी रूप से ‘फिट’ करने के लिए विभाग के ही कुछ आला अधिकारी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
हाल ही में संपन्न हुई वित्त समिति की बैठक के आधिकारिक दस्तावेजों से ‘Expose Now’ के हाथ जो सनसनीखेज जानकारी लगी है, वह विभाग के दावों और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। इस महा-परियोजना में तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसी फर्म को ठेका देने की तैयारी चल रही थी, जिसकी खुद की साख, नेटवर्थ और कानूनी दस्तावेज गहरे संदेह के घेरे में हैं।

विवादों के घेरे में ‘M/s HP-KCC JV’: इन 4 बड़े सवालों पर घिरी फर्म
वित्त समिति (Finance Committee) की स्क्रूटनी और मुख्य अभियंता (CE, U&NRW) के विरोध के बाद इस टेंडर प्रक्रिया पर कई ऐसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जो सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार या मिलीभगत की तरफ इशारा करते हैं:
- प्रोपराइटरशिप या पार्टनरशिप? सरकारी दस्तावेजों में बड़ा विरोधाभास:_
जॉइंट वेंचर के पार्टनर मैसर्स कैलाश चंद्र चौधरी (M/s KCC) ने टेंडर हथियाने के लिए जो दस्तावेज जमा किए, उनमें भारी विसंगति है। जल संसाधन विभाग (WRD) के रिकॉर्ड में यह फर्म ‘प्रोपराइटरशिप’ (Proprietorship) के रूप में पंजीकृत है, जबकि टेंडर में लगाए गए GSTIN (जीएसटी नंबर) दस्तावेज इसे एक ‘पार्टनरशिप’ (Partnership) फर्म दर्शाते हैं। नियम कहते हैं कि गलत या विरोधाभासी दस्तावेज देने पर बिडर को तत्काल अयोग्य (Non-Responsive) घोषित किया जाना चाहिए, लेकिन विभाग के अधिकारी इसे बचाने में जुटे रहे।
- बैकडेटेड ‘अमेंडेड आर्डर’ का खेल, चीफ इंजीनियर ने जताई लिखित असहमति:-
जब यह विसंगति पकड़ी गई, तो मामले को रफा-दफा करने के लिए जल संसाधन विभाग (WRD) से 05 अगस्त 2025 को एक ‘संशोधित आदेश’ (Amended Order) जारी करवाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि फर्म पार्टनरशिप ही है। लेकिन विभाग के मुख्य अभियंता CE(U&NRW) ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी लिखित असहमति (Dissent Note) दर्ज कराई। उन्होंने साफ कहा कि टेंडर खुलने के बाद लाया गया यह संशोधित आदेश एक ‘नया दस्तावेज’ है, जिसे RTPP नियम 60 और 61 के तहत स्पष्टीकरण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मुख्य अभियंता ने साफ तौर पर इस बिडर को अयोग्य घोषित करने की राय दी थी।

- नेटवर्थ छिपाने का बड़ा खेल, FA(HQ) ने पकड़ी वित्तीय अपात्रता:-
वित्त समिति की पिछली बैठक (FC 914) में निर्देश दिए गए थे कि जोधपुर के मुख्य अभियंता इस जॉइंट वेंचर (JV) फर्म की ‘नेट वर्थ’ (Net Worth) यानी वित्तीय क्षमता की दोबारा जांच करें। लेकिन अधिकारियों की मनमानी देखिए—उन्होंने वित्तीय रिपोर्ट सौंपने के बजाय सिर्फ जल संसाधन विभाग का स्पष्टीकरण पत्र आगे बढ़ा दिया। वित्तीय सलाहकार FA(HQ) ने अपनी टिप्पणी (UO No. 18454) में इस लापरवाही को बेनकाब करते हुए कहा कि M/s KCC जेवी फर्म की नेटवर्थ को लेकर कोई तथ्यात्मक रिपोर्ट ही नहीं दी गई, जिससे साफ है कि फर्म की वित्तीय पात्रता शर्तों के मुताबिक नहीं है और इसे जानबूझकर छिपाया जा रहा है।
- दूसरे राज्यों में भी ‘दागी’ है ट्रैक रिकॉर्ड, पूर्व में भी अयोग्य घोषित हो चुकी है फर्म:-
जॉइंट वेंचर के दूसरे पार्टनर ‘हिंदुस्तान प्रोजेक्ट्स’ ने तकनीकी योग्यता साबित करने के लिए गुजरात के ‘सौनी योजना’ (Sauni Yojna, Rajkot) का जो कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Work Completion Certificate) लगाया था, वह भी सवालों में है। मूल वर्क आर्डर मैसर्स प्रतिभा इंडस्ट्रीज लिमिटेड-योगीराज जेवी के नाम पर था, जिसमें बाद में त्रिपक्षीय समझौता (Tri-Party Agreement) दिखाया गया। यही नहीं, इसी जेवी के पार्टनर मैसर्स कैलाश चंद्र चौधरी (KCC) को जल संसाधन विभाग, राजस्थान द्वारा बारां जिले में एक सोलर आधारित स्प्रिंकलर लिफ्ट सिंचाई परियोजना के काम में पहले ही गैर-उत्तरदायी (Non-Responsive) यानी अयोग्य घोषित किया जा चुका है। जो फर्म पहले से अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में फेल हो चुकी हो, उसे 210 करोड़ का संवेदनशील प्रोजेक्ट सौंपने की जल्दबाजी क्यों?
वित्त समिति का बड़ा हंटर, टेंडर को किया स्थगित, अब सभी 7 बिडर्स की होगी री-स्क्रूटनी:-
मुख्य अभियंता (शहरी) की असहमति, वित्तीय सलाहकार (FA) की कड़ी आपत्ति और ‘Expose Now’ द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बाद आखिरकार वित्त समिति को झुकना पड़ा। कमेटी ने जोधपुर के मुख्य अभियंता द्वारा इस दागी फर्म को टेंडर सौंपने की सिफारिश को ठुकरा दिया है। वित्त समिति ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए इस प्रस्ताव को आगामी आदेशों तक स्थगित (Defer) कर दिया है। समिति ने निर्देश दिए हैं कि वित्तीय सलाहकार FA (HQ) इस जेवी फर्म की वित्तीय पात्रता और वास्तविक ‘नेट वर्थ’ की कड़ाई से जांच करें। बिड इवैल्यूएशन कमेटी (BEC) इस टेंडर में भाग लेने वाले सभी बिडर्स की तकनीकी बोलियों (Technical Bids) की दोबारा से जांच (Re-examine) करे, ताकि यह पता चल सके कि कहीं किसी अन्य पात्र फर्म को दरकिनार तो नहीं किया गया।
Expose Now का तीखा सवाल, कब तक दागी फर्मों के भरोसे रहेगी जनता की प्यास?
फलौदी के 79 गांवों और 325 ढाणियों की जनता पिछले कई सालों से पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है। जल जीवन मिशन के तहत 209.63 करोड़ की इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाना था। लेकिन अधिकारियों द्वारा चहेती और तकनीकी व वित्तीय रूप से अयोग्य फर्म M/s HP-KCC JV को उपकृत करने के चक्कर में यह पूरी योजना फाइलों और विवादों में उलझ कर रह गई है। जनता पूछ रही है कि जब फर्म के दस्तावेजों में साफ तौर पर हेराफेरी और नेटवर्थ का अभाव दिख रहा था, तो बिड इवैल्यूएशन कमेटी के कुछ सदस्यों ने इसे क्लीन चिट देने की कोशिश क्यों की?
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now