PHED में मिलीभगत का महाघोटाला: इंजीनियरों और ठेकेदार की जुगलबंदी से CM बजट घोषणा के 43 करोड़ के प्रोजेक्ट में किया ‘खेल’, ठेका कंपनी को पहुंचाया 5 करोड़ का फायदा

-घाटे से बचने के लिए मैसर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अफसरों के साथ मिलकर टेंडर कराया रद्द, ब्लैकलिस्ट होने से बची कंपनी, जनता प्यासी

विशेष खोजी रिपोर्ट

जयपुर/ब्यावर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के इंजीनियरों और ठेका कंपनियों के बीच का ‘नेक्सस’ (गठबंधन) एक बार फिर उजागर हुआ है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत ब्यावर जिले के रायपुर उपखंड के 12 गांवों के लिए स्वीकृत ‘भोमादा बांध पेयजल आपूर्ति योजना’ को भ्रष्टाचार और सोची-समझी साजिश की भेंट चढ़ा दिया गया। अफसरों और ठेकेदार ने मिलकर ‘बिड वैलिडिटी’ (निविदा वैधता) का ऐसा कानूनी पेंच फंसाया कि 43.03 करोड़ रुपये की इस योजना का टेंडर ही निरस्त (Annul) हो गया। इस पूरे खेल के पीछे जो कहानी निकलकर सामने आई है, वह सरकारी खजाने और जनता की उम्मीदों पर सीधे ‘डाका’ डालने जैसी है।

कम रेट टेंडर डालकर फंस गई थी कंपनी, फिर शुरू हुआ ‘माइंड गेम’:-

तकनीकी निविदाएं खुलने के बाद मैसर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस टेंडर को हथियाने के लिए एनआईटी (NIT) कॉस्ट से 10.78 प्रतिशत कम (Below) की दर पर 38,39,64,673.60 रुपये का दांव खेला और L-1 (सबसे कम दर वाली) बन गई। लेकिन टेंडर की कागजी कार्रवाई आगे बढ़ते ही कंपनी के मालिकों को गणित समझ आ गया—इतनी कम रेट पर काम करने से उन्हें मोटा मुनाफा (ज्यादा प्रॉफिट) नहीं होने वाला था। अगर बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी सीधे काम करने से मना करती, तो राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता (RTPP) नियमों के तहत उसकी अमानत राशि (EMD) जब्त हो जाती, फर्म डी-बार हो जाती या उसे ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाता।

अफसरों के साथ ‘सौदा’ कर टाइम को खींचा, फिर खेला पासा:-

अमानत राशि जप्त होने और डीबार की कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी ने PHED के आला अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ मिलकर एक सीक्रेट ‘डील’ फाइनल की। इसके बाद शुरू हुआ फाइलों को दबाने और वक्त काटने का खेल। निविदा की वैलिडिटी को जानबूझकर बढ़ाया गया। बालाजी कंस्ट्रक्शन ने अपनी बिड वैलिडिटी को पहले 15 फरवरी 2026 तक बढ़ाया। लेकिन जैसे ही 15 फरवरी की तारीख निकली, कंपनी ने आगे वैलिडिटी बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया। RTPP नियम 2013 की धारा 48(2) का सहारा लेकर इसे ‘बिड विड्रॉल’ (निविदा वापस लेना) मान लिया गया। इसके बाद गेम प्लान के तहत L-2 बिडर ‘मैसर्स बिहानी कंस्ट्रक्शन’ को काउंटर ऑफर दिया गया। लेकिन 23 मार्च 2026 को बिहानी कंस्ट्रक्शन ने भी वैलिडिटी बढ़ाने से मना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि सभी कंपनियों की वैलिडिटी खत्म हो गई और टेंडर रद्द करना पड़ा।

इस खेल से ठेकेदार को 5 करोड़ की सीधी ‘लॉटरी’, जनता के हिस्से आई ‘प्यासी’ योजना:-

इंजीनियरों की सरपरस्ती में खेले गए इस ‘बिड वैलिडिटी’ के खेल ने सरकार और जनता दोनों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है, जबकि डिफाल्टर होने की कगार पर खड़ी ठेका कंपनी को बिना एक भी ईंट रखे करोड़ों का सीधा फायदा पहुंचा दिया। इस पूरे कॉरपोरेट-अफसरशाही नेक्सस का गणित बेहद चौंकाने वाला है:

-ठेकेदार की चांदी, कार्रवाई से ‘सुरक्षित’: नियमों के मुताबिक अगर मैसर्स बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी इस टेंडर को करने से सीधे मना करती, तो विभाग उसकी अमानत राशि (EMD) को तत्काल जब्त कर लेता। इतना ही नहीं, सरकारी नियमों और टेंडर शर्तों के उल्लंघन के आरोप में फर्म को डी-बार (De-bar) या ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया जाता। लेकिन अफसरों के साथ ‘सौदा’ करके कंपनी ने कानूनी कार्रवाई का एक भी दाग अपने दामन पर नहीं लगने दिया और उसकी अमानत राशि भी सुरक्षित वापस उसकी जेब में आ गई।

-सांठगांठ से ठेकेदार को 5 करोड़ का सीधा लाभ: जानकारों की मानें तो घाटे के इस सौदे से सुरक्षित बाहर निकलने और बिना काम किए प्रशासनिक पैंतरेबाजी से अपनी साख बचाने के इस खेल में ठेका कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय और रणनीतिक फायदा हुआ है।

-सीएम की बजट घोषणा ‘हवा’, जनता पानी को तरसेगी: दूसरी तरफ, इस फिक्सिंग का सबसे क्रूर खामियाजा ब्यावर जिले की जनता को भुगतना पड़ेगा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत स्वीकृत इस बेहद महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना को समय पर पूरा होना था। अब टेंडर रद्द होने से रायपुर उपखंड के 12 गांवों की प्यासी जनता को मीठे पानी के लिए फिर से भीषण गर्मी में भटकना होगा।

-सरकारी खजाने और वक्त की बर्बादी: अब विभाग को नए सिरे से (Fresh Bid) री-टेंडर जारी करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में फिर से महीनों का समय लगेगा, टेंडर की लागत (प्रोजेक्ट कॉस्ट) बढ़ेगी और सरकारी मशीनरी का पैसा और समय दोनों दोबारा बर्बाद होंगे।

भोमादा बांध

मजबूरी में टेंडर निरस्त, नए सिरे से आमंत्रित होगा टेंडर:-

फायनेंस कमेटी के नए चेयरमैन हेमन्त गेरा को इस पूरे खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, ऐसे में कोई विकल्प नहीं होने के कारण टेंडर निरस्त कर नए सिरे से नया टेंडर आमंत्रित करने का निर्णय लेना पड़ा। मजेदार बात ये है कि ठेका कंपनी और पीएचईडी अधिकारियों के इस खेल में पिछले वित्तीय वर्ष के मुख्यमंत्री बजट घोषणा का टेंडर 15 महिने बाद भी फाइनल नहीं होने के मामले में किसी भी अधिकारी या इंजीनियर को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। ठेका कंपनी और अधिकारी एकदम पाक साफ होकर खेल से निकल गए। बड़ा सवाल ये है कि सरकार के स्तर पर इस बात की जांच कौन करेगा कि जब 13 फरवरी 2026 को ही बिड इवैल्यूएशन कमेटी ने बालाजी कंस्ट्रक्शन के नाम की सिफारिश कर दी थी, तो फाइलों को इतना लंबा क्यों खींचा गया कि ठेकेदार को भागने का सुरक्षित रास्ता मिल गया? क्या इस लेटलतीफी के जिम्मेदार पीएचईडी इंजीनियरों पर कोई एक्शन होगा या वे अगले टेंडर में फिर किसी नई ‘डील’ की तैयारी करेंगे?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now

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