-PHED मंत्री के करीबी SE अजमेर रामचन्द्र राड (ACE अजमेर का अतिरिक्त चार्ज भी) एक बार फिर चर्चाओं में
-टोंक जिले के 3 टेंडरों को गंभीर फर्जीवाड़ा व अनियमितताएं उजागर होने के बाद किया निरस्त
-अब सवाल ये है कि क्या PHED मंत्री फर्जीवाड़ों के मामलों में रामचन्द्र राड पर होने देंगे कार्रवाई?
-क्या PHED प्रमुख सचिव करवा पाएंगे FC के निर्णयों की पालना?
-‘Expose Now’ के खुलासे के बाद करोड़ों के 3 ग्रामीण पेयजल प्रोजेक्ट्स में नियमों को ताक पर रख चहेतों को फायदा पहुँचाने का खेल बेनकाब
-जेल जाने के डर से बैकफुट पर आए आला अधिकारी, काम में डुप्लीकेसी और फर्जीवाड़े की खुली पोल
Investigative Desk
जयपुर/टोंक। भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने के गढ़ बन चुके जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में ‘Expose Now’ की धारदार पत्रकारिता का एक और बड़ा और निर्णायक असर हुआ है। विभाग में बैठकर नियमों की धज्जी उड़ाने वाले और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण देने वाले सफेदपोश अफसरों का खेल अब बंद होता जा रहा है। पिछले 3 महीनों से ‘Expose Now’ द्वारा टोंक जिले और स्वयं पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में टेंडरों में चल रही सौदेबाजी और गंभीर अनियमितताओं को लेकर किए गए तीखे खुलासों के बाद विभाग के उच्चाधिकारियों में हड़कंप मच गया। खुद को इस महा-फर्जीवाड़े में फंसने और जेल जाने के डर से बचाने के लिए आखिरकार आला अधिकारियों को घुटने टेकने पड़े हैं।
मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत टोंक जिले के मालपुरा और टोंक डिवीजन के अंतर्गत आने वाले करोड़ों रुपये के ग्रामीण जल आपूर्ति प्रोजेक्ट (राजमहल, बोटुन्दा, कँवरवास और नयागांव योजना) के विवादित टेंडर को तत्काल प्रभाव से रद्द (Annul) कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर उनकी जवाबदेही तय करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं।
अजमेर संभाग में पिछले डेढ़ साल से चल रहा है रामचंद्र राड का ‘खेल’:-
इस पूरे टेंडर फिक्सिंग और भ्रष्टाचार के खेल के केंद्र में पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के सबसे खास और चहेते इंजीनियरों में से एक, रामचंद्र राड (SE, वृत्त अजमेर) का नाम सामने आ रहा है। रसूख का आलम यह है कि रामचंद्र राड को एसई अजमेर लगाने के बाद एडिशनल चीफ इंजीनियर (ACE) रीजन-अजमेर का भी लंबे समय से अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। अजमेर संभाग में पीएचईडी के टेंडरों को मैनेज करने से लेकर बैकडोर सेटिंग के बाकी सभी कामों की कमान रामचंद्र राड ही संभालते हैं।
टोंक जिले और मंत्री के खुद के क्षेत्र के दर्जनों टेंडरों में पिछले डेढ़ साल से गंभीर अनियमितताएं की जा रही थीं। टेंडर आमंत्रित करने के बाद बैकडोर से ‘बिल ऑफ क्वांटिटीज’ (BOQ) की शर्तों में मनमर्जी से बदलाव किया जाता था, ताकि चहेती फर्मों को न केवल टेंडर दिलवाया जा सके, बल्कि बाद में करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान भी उठाया जा सके। लेकिन ‘Expose Now’ की खोजी नजरों से यह खेल छुप नहीं सका।
क्या था पूरा खेल? ‘Expose Now’ की पड़ताल में खुली पोल:-
पीएचईडी रीजन अजमेर और मालपुरा-टोंक डिवीजन के अधिकारियों ने NIT संख्या 20/2025-26 (अनुमानित लागत Rs. 1754.96 लाख) के तहत ग्रामीण पेयजल संवर्द्धन कार्य का टेंडर निकाला था। इसमें तकनीकी बिड्स (Technical Bids) 05 जनवरी 2026 को खोली गईं, जिसमें मेसर्स गुलाब चंद कुमावत, मेसर्स कुमावत एंड कंपनी, मेसर्स निहाल चंद जैन इंफ्रा प्रोजेक्ट, मेसर्स ओम प्रोजेक्ट्स, मेसर्स राइट Water सॉल्यूशंस और मेसर्स आरएससी इंफ्राटेक जैसी 06 फर्में शामिल हुईं।
लेकिन असली ‘खेल’ टेंडर आमंत्रित करने के बाद परदे के पीछे शुरू हुआ:
-नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं: निविदा आमंत्रित होने के बाद एडिशनल चीफ इंजीनियर (ACE), PHED अजमेर रीजन द्वारा 17 दिसंबर 2025 को शुद्धिपत्र (Corrigendum No. 1) जारी किया गया।
-BOQ में बड़ा झोल: इस शुद्धिपत्र के जरिए BOQ की मदों (Items), यूनिट्स और नामकरण में ‘सोचे-समझे तरीके से’ बड़े और बुनियादी बदलाव (Substantive Modifications) कर दिए गए।
-चहेतों को लाभ देने की सेटिंग: आरटीटीपी एक्ट (RTTP Act, 2012) और आरटीटीपी रूल्स (RTTP Rules, 2013) के तहत टेंडर जारी होने के बाद वित्तीय शर्तों या BOQ में ऐसा बदलाव करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। यह सब कुछ चहेती फर्मों को अनुचित वित्तीय लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था, जिससे निविदा में भारी वित्तीय अस्पष्टता (Financial Ambiguity) पैदा हो गई।
पूर्व में हो चुके कार्यों का फिर से टेंडर, डुप्लीकेसी (फर्जीवाड़े) की खुली पोल:-
उच्चाधिकारियों ने जब ‘Expose Now’ की खबरों को गंभीरता से लेते हुए जांच करवाई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस 17.54 करोड़ के प्रोजेक्ट में कई कार्यों की डुप्लीकेसी पाई गई। यानी, जो कार्य पूर्व में ही धरातल पर हो चुके थे, उन्हें फिर से टेंडरों में शामिल कर लिया गया था ताकि सरकारी खजाने से दुबारा पैसा उठाकर बंदरबांट की जा सके। इस गंभीर खुलासे के बाद अब फर्जीवाड़े और डुप्लीकेसी से बचने के लिए तथा कार्यों की वास्तविकता को लेकर ACE अजमेर से बकायदा शपथ पत्र (Affidavit) लिया जा रहा है।
वित्त समिति (Finance Committee) की बैठक में हुआ अंतिम फैसला:-
इस पूरे घोटाले की भनक लगते ही ‘Expose Now’ ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के जरिए इस ‘टेंडर फिक्सिंग’ के खेल को प्रमुखता से उजागर किया था। हमारी खबर के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और जो आला अफसर अब तक फाइलों को दबाकर भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दे रहे थे, उनको अपनी कुर्सियां हिलती नजर आई और जेल जाने का डर सताने लगा। नतीजतन, बिड इवैल्युएशन कमेटी (BEC) ने 29 जनवरी 2026 को माना कि यह शुद्धिपत्र (Corrigendum No. 1) नियमों के खिलाफ था। इसके बाद एम्पॉवर्ड प्रोक्योरमेंट कमेटी (EPC) की 7वीं बैठक (13 मार्च 2026) में इस पर गंभीर आपत्ति जताई गई। आखिरकार, वित्त समिति की बैठक (FC 917/ 27.04.2026) में इस पूरी प्रक्रिया को ‘फेट एकम्पली’ (Fait Accompli – गलत काम को सुधारने का कोई रास्ता न बचना) मानते हुए RTTP नियम 72 के तहत पूरे टेंडर को सिरे से रद्द करने का अंतिम फैसला करना पड़ा।
FC के कड़े निर्देश, अफसरों पर गिरेगी गाज, ‘डबल गेम’ पर भी रोक:-
‘Expose Now’ की मुहिम की यह बहुत बड़ी जीत है कि अब भ्रष्ट अफसरों को बचाने का रास्ता बंद हो चुका है। आधिकारिक फैसले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
-इंजीनियरों को शो-कॉज नोटिस: फाइनेंस कमेटी ने टेंडर की शर्तों में गैर-कानूनी बदलाव करने और अन्य गंभीर लापरवाहियों को लेकर संबंधित सभी जिम्मेदार इंजीनियर्स और आला अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। कमेटी ने माना है कि अफसरों की इस मिलीभगत और ‘लैप्स’ के कारण मुख्यमंत्री बजट घोषणा के काम में अनावश्यक देरी हुई और प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने (Cost Escalation) का खतरा पैदा हुआ।
-काम के डुप्लीकेसी पर सख्त पहरा: एडिशनल चीफ इंजीनियर को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रमाणित (Certificate) करें कि इसी काम को किसी अन्य योजना जैसे जल जीवन मिशन (JJM), अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) या स्टेट फंड्स के तहत दिखाकर दोबारा सरकारी पैसे का उठाव न किया जाए।
-नए सिरे से पारदर्शी टेंडर: अब इस ₹17.54 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए नियमों के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नए फ्रेश टेंडर (Fresh Bids) आमंत्रित किए जाएंगे।
‘Expose Now’ करेगा Expose: जनता के पैसे की लूट और सरकारी महकमों में बैठे भ्रष्टाचारियों और रसूखदार इंजीनियरों के गठजोड़ को आगे भी इसी तरह बेनकाब करता रहेगा। इस पूरे मामले में अब कौन से बड़े चेहरे नपेंगे और क्या पीएचईडी मंत्री अपने चहेते इंजीनियरों पर कार्रवाई करेंगे? इसकी पल-पल की अपडेट के लिए पढ़ते रहिए… Expose Now