-गांव में 400 से ज्यादा IAS, IPS, कर्नल और डॉक्टर
झुंझुनूं/जयपुर। राजस्थान की शेखावाटी की धरती ने देश को हमेशा शूरवीर और कर्मठ लोग दिए हैं। लेकिन झुंझुनूं जिले का ‘नूआं’ गांव और उसके आसपास का इलाका आज पूरे देश के लिए शिक्षा और देशसेवा की एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसे दुनिया अब ‘अफसरों वाले गांव’ के नाम से जानती है। करीब 12 हजार की आबादी वाले इस गांव की आबोहवा में कुछ ऐसा है कि यहाँ पैदा होने वाले बच्चे का ख्वाब सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च पदों पर बैठकर सेवा करना होता है। वर्तमान में इस गांव के करीब 300 से 400 लोग देश के अलग-अलग सरकारी महकमों, सेना और प्रशासनिक सेवाओं में ऊंचे पदों पर रहकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।
1931 में बोया गया था ‘शिक्षा’ का बीज:-
इस ऐतिहासिक बदलाव की कहानी आज से करीब 95 साल पहले शुरू हुई थी। साल 1931 में अंग्रेजी सेना में कार्यरत कैप्टन ताज मोहम्मद ने इस गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की नींव रखी थी। उस दौर में जब शिक्षा को दूर की कौड़ी माना जाता था, तब इस स्कूल ने गांव के बच्चों को बड़े सपने देखना सिखाया। यही स्कूल आगे चलकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल बना और इस पूरे इलाके की तकदीर बदल दी। बाद में सेठ फूलचंद जालान जैसे भामाशाहों (दानदाताओं) ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया। स्कूल की भव्य इमारतें बनीं, अस्पताल खुले और पानी की टंकियां बनीं। नतीजा यह हुआ कि आसपास के दर्जनों गांवों के बच्चे भी यहाँ खिंचे चले आए।
‘कृष्णियाओं का बास’, 250 की आबादी, हर घर में अफसर:-
नूआं गांव की यह कामयाबी सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रही। इससे महज डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित ‘कृष्णियाओं का बास’ की कहानी तो किसी चमत्कार जैसी है। महज 250 से 300 की आबादी वाले इस छोटे से गांव के लगभग हर घर में एक बड़ा अधिकारी मौजूद है।
गांव की ‘अचीवमेंट लिस्ट’ पर एक नज़र:
RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा): 04 अफसर
IPS (भारतीय पुलिस सेवा): 02 अफसर
ASP (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक): 02 अफसर
भारतीय सेना में कर्नल: 02 अफसर
डॉक्टर्स और इंजीनियर्स: 05-05
इसके अलावा कई DFO, प्रिंसिपल्स और टीचर्स इस छोटे से गांव ने देश को दिए हैं।
बेटियां भी रच रही हैं इतिहास, कर्नल इशरत अहमद ने बढ़ाया मान:-
इस गांव की बेटियां भी पुरुषों से दो कदम आगे चलकर देश की रक्षा में तैनात हैं। नूआं गांव की बेटी कर्नल इशरत अहमद भारतीय सेना की ऑर्डिनेंस यूनिट की कमान संभालने वाली राजस्थान की पहली महिला कर्नल बनी हैं। फिलहाल वो महाराष्ट्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। कर्नल इशरत का पूरा परिवार ही देशसेवा को समर्पित है, उनके पिता जकी अहमद भी कर्नल और भाई शाकिब हुसैन ब्रिगेडियर के पद पर देश की सेवा कर चुके हैं।
एक चेन रिएक्शन, जो पूरे इलाके में फैल गया:-
नूआं की इस सफलता ने आसपास के गांवों जैसे टांई, पाटोदा, भारू और ढिगाल में भी शिक्षा की एक ऐसी अलख जगाई है कि आज यह पूरा 30 किलोमीटर का दायरा ‘अफसरों की नर्सरी’ बन चुका है। यहाँ एक पीढ़ी को देखकर दूसरी पीढ़ी आगे बढ़ती है, और सीनियर युवाओं के लिए गाइड (Mentor) की भूमिका निभाते हैं।
नूआं और आसपास के गांवों की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही समय पर शिक्षा का सही बीज बोया जाए, तो पीढ़ियों की तकदीर बदली जा सकती है। ‘Expose Now’ शिक्षा की इस क्रांति और देशसेवा के इस जज्बे को सलाम करता है।