कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कलकत्ता हाई कोर्ट के हालिया दौरे ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कोर्ट परिसर और उसके आसपास ‘जय श्री राम’ के नारों की गूँज ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच वर्षों से चली आ रही वैचारिक जंग को फिर से ताजा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री जैसे ही हाई कोर्ट पहुंचीं, वहां मौजूद लोगों के समूहों ने धार्मिक और राजनीतिक नारे लगाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ममता बनर्जी की मौजूदगी में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए, जिससे वहां का माहौल पूरी तरह से राजनीतिक रंग में रंग गया।
बंगाल की राजनीति का ‘फ्लैशपॉइंट’ है यह नारा पश्चिम बंगाल में ‘जय श्री राम’ का नारा केवल एक धार्मिक उद्घोष नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है।
- 2019 और 2021 का इतिहास: लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान यह नारा TMC और BJP के बीच टकराव का मुख्य केंद्र था।
- ममता बनर्जी की आपत्ति: अतीत में कई मौकों पर मुख्यमंत्री ने उनके काफिले के सामने यह नारा लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे ‘उकसाने वाली राजनीति’ करार दिया था।
- BJP का रुख: विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार धार्मिक अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश करती है, जबकि TMC का कहना है कि यह कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश है।
हाई कोर्ट में नारेबाजी: नई बहस की शुरुआत न्यायिक परिसर में इस तरह की नारेबाजी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
- न्यायिक गरिमा: क्या अदालती परिसरों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए होना चाहिए?
- अभिव्यक्ति की आजादी: क्या इसे एक सामान्य धार्मिक नारा माना जाए या राजनीतिक उकसावा?
- ध्रुवीकरण: क्या यह घटना आगामी चुनावों से पहले बंगाल में हिंदू वोटों के एकीकरण की एक नई कोशिश है?
TMC बनाम BJP: आरोप-प्रत्यारोप
BJP समर्थकों का कहना है कि ये नारे बंगाल में बदलते राजनीतिक मिजाज का प्रतीक हैं। वहीं, TMC नेताओं ने इसे अदालत जैसे पवित्र स्थान का राजनीतिकरण करने की कोशिश बताया है। फिलहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय या हाई कोर्ट के अधिकारियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
