BREAKING NEWS: राजस्थान में गहरा सकता है जल संकट! वादे से पलटी सरकार, अब आर-पार की जंग की तैयारी में PHED ठेकेदार

Rajasthan Water Crisis

-पीएचईडी ठेकेदार 4500 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर फिर से आंदोलन की राह पर, प्रदेशभर में पेयजल सप्लाई ठप करने की तैयारी

जयपुर। राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच अब पानी के लिए हाहाकार मचने के आसार नजर आ रहे हैं। प्रदेश के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों ने राज्य सरकार के खिलाफ एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। मंत्री के आश्वासन के बाद भी बकाया भुगतान नहीं होने से नाराज 1500 से ज्यादा संवेदक अब ‘करो या मरो’ की स्थिति में हैं। कल, यानी 13 मई को जयपुर के जलभवन में होने वाली आपात बैठक में बड़े आंदोलन का ऐलान हो सकता है। प्रदेशभर में PHED ठेकेदारों को जल जीवन मिशन में 33 महिनों से 3500 करोड़ की बकाया राशि व अमृत-2.0 में 1000 करोड़ से ज्यादा की राशि का भुगतान नहीं मिला है, जिसके चलते ठेकेदारों के सामने भारी वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।

PHED मंत्री के वादे निकले ‘कागजी’:-

पिछले महीने 13 अप्रैल से शुरू हुए आंदोलन को शांत करने के लिए PHED मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने ठेकेदारों को भरोसा दिया था कि:

-28 अप्रैल तक: 300 करोड़ का भुगतान होगा।

-5 मई तक: 1500 करोड़ का भुगतान होगा।

-15 मई तक: संपूर्ण बकाया राशि (करीब 4500 करोड़) चुका दी जाएगी।

लेकिन वास्तविकता यह है कि 12 मई बीत जाने के बाद भी ठेकेदारों के हाथ खाली हैं। संवेदकों का आरोप है कि सरकार ने केवल हड़ताल खत्म करवाने के लिए ‘झूठा वादा’ किया था।

जेजेएम के चलते ठेकेदार से बन गए कर्जदार:-

प्रदेश के 90% ठेकेदार आज बर्बादी की कगार पर हैं। Expose Now की पड़ताल में सामने आया है कि पीएचईडी में 33 महीनों से JJM और 10 महीनों से अमृत-2.0 का भुगतान अटका हुआ है। ठेकेदारों पर मजदूरों, सीमेंट-बजरी सप्लायर्स और पाइप कंपनियों का करोड़ों रुपया बकाया हो गया है। ठेकेदारों के घर, प्लॉट और गहने गिरवी रखे जा चुके हैं। बैंकों की किस्तें बाउंस होने से सिबिल (CIBIL) खराब हो चुका है। हालत इतनी बदतर है कि तगादे के डर से कई ठेकेदार अपने फोन बंद रख रहे हैं और रात के अंधेरे में चोरों की तरह अपने ही घर में घुसते हैं।

इस बार ‘ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस’ भी ठप करने की तैयारी:-

संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि इस बार आंदोलन पिछले जैसा नहीं होगा। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो सभी चालू प्रोजेक्ट्स पर काम तुरंत बंद कर दिया जाएगा। सबसे घातक कदम के रूप में ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस (O&M) ठप किया जाएगा, जिससे प्रदेश की पेयजल सप्लाई पूरी तरह बाधित हो सकती है। ठेकेदारों के साथ की गई वादा खिलाफी और बकाया भुगतान के लिए प्रदेशभर का पीएचईडी ठेकेदार आर-पार की लड़ाई के साथ आंदोलन में उतरेगा और पहले दिन से प्रदेशभर में पेयजल सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया जाएगा। पेयजल किल्लत को लेकर जनता को होने वाली परेशानी के लिए पूरी तरह से राज्य सरकार, पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी व विभाग जिम्मेदार होगा। प्रदेशभर का पीएचईडी ठेकेदार पेयजल सप्लाई बाधित होने की समस्या के लिए जनता से माफी मांगने के साथ उनके 33 महिनों से बकाया चल रहे भुगतान को लेकर उपभोक्ताओं से समर्थन की मांग भी करेगा।

संघर्ष समिति का संदेश:-

“हमने सरकार को पर्याप्त समय दिया, लेकिन 12 मई तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब चुप बैठने का वक्त नहीं है। कल 13 मई सुबह 10 बजे जलभवन में राजस्थान के सभी ठेकेदार एकजुट होंगे और आर-पार की रणनीति पर मुहर लगाएंगे।”

पानी मचा सकता है हाहाकार!

प्रदेश में गर्मियों एक तरह पेयजल की मांग बढ़ने से पेयजल किल्लत की समस्या बढ़ जाती है। बकाया भुगतान की मांग को लेकर पीएचईडी ठेकेदारों ने यदि कार्य बंद करने के साथ ही पेयजल की सप्लाई बंद कर दी तो राजस्थान में पानी हाहाकार मचा सकता है। पीएचईडी ठेकेदारों के प्रति सरकार की ये बेरूखी प्रदेश की जनता को भारी पड़ सकती है। एक तरफ पारा 45 डिग्री के पार जा रहा है, दूसरी तरफ सरकार और ठेकेदारों के बीच छिड़ी इस जंग में आम जनता पिसने को मजबूर है। अगर 13 मई की बैठक पीएचईडी ठेकेदारों ने सप्लाई बंद करने का फैसला लिया गया, तो राजस्थान की प्यास बुझाना सरकार के लिए नामुमकिन हो जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now।

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