-राजस्थान में 20,000 करोड़ के JJM टेंडर्स में ‘पूलिंग’ का खेल —PHED का सबसे बड़ा टेंडर घोटाला !
जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में आज जिस घोटाले की गूंज सबसे ज्यादा है, वह है 20 हजार करोड़ का जल जीवन मिशन (JJM) घोटाला। ‘Expose Now’ के हाथ लगे विशेष दस्तावेजों और घटनाक्रमों के अनुसार, यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला नहीं था, बल्कि राज्य के खजाने को 5,000 करोड़ रुपये का चूना लगाने की एक सुनियोजित ‘डील’ थी, जिसे दिल्ली की एक गोपनीय दस्तक ने नाकाम कर दिया।

साइट विजिट की ‘काली शर्त’ से प्रतिस्पर्धा का गला घोंटा:-
जांच में सामने आया कि PHED अधिकारियों ने RTPP एक्ट और नियमों की खुली अवहेलना करते हुए बड़े टेंडर्स में जानबूझकर एक ऐसी शर्त जोड़ी, जिसमें ठेकेदार को साइट निरीक्षण का घोषणा पत्र संबंधित टेंडर आमंत्रित करने वाले इंजीनियर से वेरिफाई करवाकर लगाना अनिवार्य कर दिया गया। अगर सिंडिकेट के बाहर की कोई कंपनी टेंडर डालना चाहे, तो अधिकारी उसे डरा-धमका सकें या उसका सर्टिफिकेट वेरिफाई न कर उसे अपात्र घोषित कर दें। इस खेल में ओपन टेंडर की गोपनीयता भंग हुई और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया ।
PMO में वो 21 अक्टूबर की तारीख, जहाँ से शुरू हुई उल्टी गिनती:-
घोटाले की पटकथा जयपुर में लिखी जा रही थी, लेकिन इसकी काट दिल्ली में तैयार हुई। 21 अक्टूबर, 2022 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक बेहद गोपनीय शिकायत पहुंची। इसके बाद नवंबर महीने में साक्ष्यों और दस्तावेजों का एक पुलिंदा दिल्ली भेजा गया। सूत्रों की मानें तो इन शिकायतों को PMO ने इतनी गंभीरता से लिया कि मामला सीधे केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) को सौंप दिया गया।
‘मिशन 5000 करोड़’ के टेंडरों का गणित:-
उस वक्त राज्य में करीब 20,000 करोड़ रुपये के टेंडर प्रक्रिया में थे। भ्रष्टाचार का खेल इतना बड़ा था कि इनमें से करीब 25% यानी 5,000 करोड़ रुपये की ‘कमीशन डील’ होने वाली थी। टेंडरों की शर्तों को इस तरह ‘पूल’ (Pool) किया गया था कि चुनिंदा ठेकेदारों को ही लाभ मिले। पीएचईडी के ‘स्पेशल गैंग’ ने दलालों के साथ मिलकर 25 से 30 प्रतिशत तक ‘Above’ दरों पर टेंडर हथियाने की पूरी प्लानिंग कर ली थी।

सिंडिकेट की 16 कंपनियाँ, जिनके नाम शिकायत की ‘डेडली लिस्ट’ में :-
शिकायतकर्ता ने उन सभी कंपनियों के नामों का खुलासा किया है, जिन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर पूलिंग की थी :
मैसर्स GCKC Projects and Works Pvt. Ltd.
मैसर्स SPML Pvt. Ltd.
मैसर्स OM Infra Ltd.
मैसर्स DARA Engineering and Infrastructures Pvt. Ltd.
मैसर्स NCC Pvt. Ltd.
मैसर्स JWIL Infra Ltd.
मैसर्स GA Infra Pvt. Ltd.
मैसर्स Jagadish Prasad Agrawal(JPA)
मैसर्स Vishnu Prakash R Punglia Ltd.
मैसर्स Offshore Infrastructures Ltd.
मैसर्स Megha Engineering and Infrastructures Ltd.
मैसर्स JMC Projects India Ltd.
मैसर्स Lahoty Buildcon Ltd.
मैसर्स GVPR Engineering Ltd.
मैसर्स Larsen and Toubro Ltd. (L&T)
मैसर्स Goodwill Advance Construction Co. Pvt. Ltd.
ACS सुबोध अग्रवाल की ‘हरी झंडी’ और CS का ‘रेड सिग्नल’:-
जांच में यह सामने आया है कि तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल ने फाइनेंस कमेटी (FC) की बैठक में नियमों को दरकिनार करते हुए इन विवादित टेंडरों को मंजूरी (Approved) दे दी थी। लेकिन पेच तब फंसा जब फाइल अंतिम मुहर के लिए मुख्य सचिव (CS) के पास पहुंची।

-12 दिसंबर 2022: मुख्य सचिव को दिल्ली से सूचना मिली कि JJM के इन टेंडरों की केंद्रीय एजेंसियां गोपनीय ढंग से जांच कर रही हैं।
-16 दिसंबर 2022: खतरे को भांपते हुए तत्कालीन CS ने पूरी फाइल वापस लौटा दी और पूलिंग की आशंका जताते हुए टेंडरों को ‘Annul’ (रद्द) कर दिया।
ACB का शिकंजा, महेश जोशी और सुबोध अग्रवाल मुख्य सूत्रधार:-
इस पूरे खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की। तत्कालीन PHED मंत्री महेश जोशी और सेवानिवृत्त IAS सुबोध अग्रवाल को इस घोटाले में मुख्य सूत्रधार के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक इस मामले में 10 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इन पर फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए टेंडर हासिल करने, चहेती कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाने और जनता के पैसे के गबन का संगीन आरोप है।

‘Expose Now’ की टीम इस घोटाले की हर परत को उखाड़ना जारी रखेगी। क्या इन सफ़ेदपोशों के पीछे और भी बड़े नाम हैं? जुड़े रहें हमारे साथ।