RPSC का बड़ा फैसला: SI भर्ती परीक्षा में केवल पुराने 3.83 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल, दागियों पर फैसला जल्द

अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा-2021 को रद्द कर दोबारा आयोजित करने के फैसले ने प्रदेश के गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल परीक्षा के आयोजन पर नहीं, बल्कि उन 66 दागियों पर है जिन पर पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप हैं।

RPSC के अध्यक्ष यूआर साहू के हालिया बयान ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे मेहनतकश युवाओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

आरोपियों की एंट्री पर संशय: RPSC चेयरमैन का क्या है कहना?

विवाद का मुख्य केंद्र एसओजी (SOG) की जांच में फंसे वो अभ्यर्थी हैं जिन्होंने अनुचित साधनों का उपयोग कर परीक्षा प्रभावित की थी। RPSC अध्यक्ष यूआर साहू ने कहा:

“इस भर्ती में जिन लोगों ने पहले गड़बड़ी की थी और एसओजी की जांच में जिन पर आरोप लगे हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने दिया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर आयोग की बैठक में चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।”

इस बयान के बाद उन अभ्यर्थियों में डर और आक्रोश है जिन्होंने अपनी ईमानदारी और मेहनत से परीक्षा पास की थी। युवाओं का तर्क है कि यदि धांधली के आरोपियों को फिर से मौका मिला, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर तमाचा होगा।

सितंबर 2026 में होगी परीक्षा: कौन होगा पात्र?

राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद अब यह परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जाएगी। आयोग ने इसके लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • कुल अभ्यर्थी: केवल वही 3,83,097 अभ्यर्थी परीक्षा दे सकेंगे जो पिछली बार दोनों पेपर में शामिल हुए थे।
  • नए आवेदकों को ‘ना’: किसी भी नए व्यक्ति को आवेदन करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
  • पात्रता शर्तें: आयु और शैक्षणिक योग्यता की गणना वर्ष 2021 के मूल विज्ञापन के अनुसार ही रहेगी।

आवेदन में संशोधन: 16 मई से शुरू होगी प्रक्रिया

परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने आवेदन प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए हैं:

  • संशोधन की अवधि: 16 मई से 30 मई तक अभ्यर्थी अपने मोबाइल नंबर और पते में सुधार कर सकेंगे।
  • अनिवार्य शर्तें: संशोधन के लिए OTR (One Time Registration) KYC प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।
  • सुरक्षा मानक: इस बार अभ्यर्थियों को लाइव फोटो और बायोमेट्रिक सहमति देनी होगी, ताकि किसी भी तरह की डमी कैंडिडेट की संभावना को खत्म किया जा सके।

सचिव रामनिवास मेहता ने स्पष्ट किया है कि आयोग परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है, हालांकि दागियों की एंट्री पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

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