राजस्थान के पशुपालकों की आय बढ़ाने और पशुओं की बेहतर देखभाल के उद्देश्य से शुरू की गई ‘गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना’ पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। दौसा जिले सहित प्रदेश भर में नए लक्ष्य तय नहीं होने और तकनीकी कारणों के चलते पशुपालकों को ऋण मिलना बंद हो गया है। इससे उन गोपालकों को बड़ा झटका लगा है, जो गर्मियों के मौसम में पशुओं के चारे, पानी और दवाइयों की व्यवस्था के लिए इस सरकारी सहायता की उम्मीद लगाए बैठे थे। जानकारी के अनुसार, सरकार ने पुराने लाभार्थियों को दोबारा ऋण वितरण करने पर भी रोक लगा दी है। पिछले वर्ष अप्रैल 2025 में योजना के लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए थे, लेकिन इस बार नए लक्ष्यों की घोषणा न होने और वर्तमान बजट में योजना का स्पष्ट उल्लेख न मिलने से पशुपालकों में असमंजस और निराशा का माहौल है।
दौसा जिले के केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखाओं के माध्यम से इस योजना के तहत एक वर्ष (365 दिन) की अवधि के लिए अल्पकालिक ऋण दिया जाता था। इस योजना के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की उम्मीदों को चोट पहुँच रही है। शंकर लाल जैसे कई ग्रामीणों ने ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन उन्हें न तो राशि मिली और न ही कोई संतोषजनक जवाब। वहीं, स्वरोजगार की इच्छा रखने वाली महिलाएं, जैसे पूजा, आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी के लिए भटक रही हैं, क्योंकि नए आवेदन फिलहाल स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। योजना के ठप होने से अब पशुपालकों को निजी साहूकारों से ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो उनके आर्थिक बोझ को और बढ़ा रहा है।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय सहकारी बैंक, दौसा के एमडी रोहित सिंह का कहना है कि वर्तमान में योजना के पोर्टल को अपडेट किया जा रहा है, जिसके कारण नए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में प्राप्त आवेदनों को नियमानुसार ऋण दिलाया गया है। गौरतलब है कि गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पशुपालकों को पशुपालन व्यवसाय के लिए बिना ब्याज (0% ब्याज) के 1 लाख रुपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है, बल्कि दूध उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक है। अब जिले के हजारों पशुपालक सरकार के अगले फैसले और योजना के दोबारा सुचारू होने का इंतजार कर रहे हैं।
