जयपुर| बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना के तहत शहर को सूरजपुरा स्थित जल शोधन संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 605 एमएलडी पेयजल की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में शहर के कुछ क्षेत्रों से पेयजल के पीले रंग को लेकर प्राप्त शिकायतों पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने तत्परता दिखाते हुए व्यापक जांच करवाई है।
गांधीनगर प्रयोगशाला में नमूनों का परीक्षण
शिकायतों के प्राप्त होते ही विभाग ने बालावाला, जवाहर सर्किल, रामनिवास बाग, अमानीशाह नाला और मानसरोवर स्थित विभिन्न स्वच्छ जलाशयों से पानी के नमूने लिए। इन नमूनों का गांधीनगर प्रयोगशाला में गहन परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- सभी नमूनों में क्लोरीन की पर्याप्त मात्रा पाई गई है।
- रासायनिक परीक्षण के आधार पर जल पूर्णतः सुरक्षित और पेय योग्य पाया गया है।
पीलेपन का मुख्य कारण: जलीय वनस्पति ‘क्लोरोफाइटा’
विभागीय विशेषज्ञों के अनुसार, मई माह में तापमान में अचानक वृद्धि होने के कारण जलाशयों में मौजूद जलीय वनस्पति (क्लोरोफाइटा) का विघटन होने लगता है। क्लोरीन के साथ इसकी प्रतिक्रिया से पानी में अस्थायी रूप से पीलेपन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भी इसी प्रकार की स्थिति सामने आई थी, जिसे वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद पूरी तरह सुरक्षित पाया गया था।
उच्चाधिकारियों ने किया निरीक्षण और मॉनिटरिंग
अतिरिक्त मुख्य अभियंता (क्षेत्र द्वितीय) अजय सिंह राठौड़ के निर्देशन में अधीक्षण अभियंता रसायनज्ञ की टीम ने सूरजपुरा फिल्टर प्लांट सहित विभिन्न क्षेत्रों में जल गुणवत्ता की गहन जांच की है। वहीं, मुख्य अभियंता (शहरी एवं एनआरडब्ल्यू) देवराज सोलंकी ने बालावाला एवं रेनवाल स्थित हेडवर्क्स का निरीक्षण कर निरंतर मॉनिटरिंग और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जलदाय विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए विशेषज्ञों से परामर्श लेकर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि जयपुर के नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
