उदयपुर में वाहनों की खैर नहीं: 500 करोड़ के टारगेट के लिए ई-चालान व्यवस्था और सख्त

परिवहन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 राजस्व के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। उदयपुर आरटीओ को इस वर्ष 500 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य सौंपा गया है, जिसे हासिल करने के लिए विभाग अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहा है।

पिछले साल का प्रदर्शन और राजस्व गैप

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 464 करोड़ रुपए का लक्ष्य मिला था, जिसमें से वास्तविक वसूली केवल 390 करोड़ रुपए की ही हो पाई।
  • विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य से करीब 74 करोड़ रुपए पीछे रह गया।
  • राजस्व कम रहने के मुख्य कारणों में वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया लंबित होना, कमर्शियल वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन में कमी और पुराने बकाया की धीमी वसूली शामिल रही।

चेकिंग और सघन धरपकड़ की तैयारी

500 करोड़ के भारी-भरकम लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग अब प्रवर्तन कार्य में सख्ती बढ़ाने जा रहा है:

  • बिना टैक्स चुकाए चलने वाले वाहनों, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
  • चेकिंग पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और तकनीकी संसाधनों के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ा जाएगा।
  • अवैध संचालन और बिना परमिट दौड़ने वाले वाहनों पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी संभव हो सके।

ई-चालान और डिजिटल सिस्टम पर रहेगा फोकस

विभाग अब वसूली प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का भरपूर उपयोग कर रहा है:

  • ऑटोमेटेड ई-चालान: टोल बूथों और हाईवे नेटवर्क पर ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए ओवरलोडिंग और बिना परमिट वाले वाहनों के स्वतः चालान काटे जा रहे हैं।
  • त्वरित पहचान: इस प्रणाली से टैक्स डिफॉल्ट करने वाले वाहनों की तुरंत पहचान संभव होगी और मौके पर ही ई-चालान जारी किए जाएंगे।
  • पारदर्शिता: ऑनलाइन टैक्स जमा करने और डिजिटल रिकॉर्ड रखने से प्रक्रिया में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
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