राजस्थान में एक तरफ भाजपा ‘नारी शक्ति वंदन’ अभियान चला रही है, जिसके तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन प्रदेश पदाधिकारियों से विस्तार से चर्चा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, करौली जिले में यह अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश में नारी शक्ति वंदन की बड़ी-बड़ी बातों के बीच एक सरकारी महिला कार्मिक न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है। करौली से लेकर जयपुर तक उच्च अधिकारियों के यहां गुहार लगाने के बावजूद आश्वासन के नाम पर पीड़िता को सिर्फ मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना ही मिली है।
यह है पूरा मामला
मामला करौली जिले की गुढ़ाचंद्रजी ब्लॉक के अंतर्गत एक उपस्वास्थ्य केंद्र की एएनएम से जुड़ा है। पीड़िता का आरोप है कि उसे ब्लॉक सीएमएचओ (CMHO) दंत चिकित्सक जगराम मीणा द्वारा मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। पीड़िता ने सबसे पहले करौली के तत्कालीन सीएमएचओ को शिकायत की, वहां से न्याय नहीं मिला तो जिला कलेक्टर कार्यालय में एडीएम (ADM) को शिकायत दी। एडीएम के एक्शन के बाद टीम गठित हुई, लेकिन टीम के मात्र दो सदस्य पीड़िता के पास पहुंचे और कथित तौर पर तत्कालीन सीएमएचओ के दबाव में फौरी कार्रवाई कर बैरंग लौट आए। इसके बाद पीड़िता ने ‘EXPOSE NOW’ से गुहार लगाई। खबर प्रसारित होने और जयपुर के उच्च अधिकारियों के दखल के बाद भरतपुर जेडी (JD) सुनील कुमार के नेतृत्व में टीम बनी, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि रसूख और धन के सामने वहां भी न्याय के बजाय उसे डराया-धमकाया गया। अब पीड़िता ने जयपुर में चिकित्सा विभाग की शासन सचिव (PHS) गायत्री राठौड़ और निदेशक डॉ. रवि प्रकाश के यहां गुहार लगाई है।
जयपुर में बोली पीड़िता: “मुझे लगातार दी जा रही धमकियां”
पीड़िता ने उच्चाधिकारियों को बताया कि वह 2009 से कार्यरत है। आरोप है कि पिछले चार महीनों से बीसीएमओ जगराम मीणा उसे परेशान कर रहे हैं। बीसीएमओ तीन बार ब्लॉक मीटिंग में पीड़िता को एपीओ (APO) करने की धमकी दे चुके हैं। पीड़िता हृदय रोग से पीड़ित है और एक साल पहले उसके दिल में छल्ला (Stent) डाला गया है, जिससे उसकी तबीयत अक्सर खराब रहती है।
अधिकारी के दुर्व्यवहार की पराकाष्ठा पीड़िता के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को वह इंसेंटिव फॉर्म देने बीसीएमओ दफ्तर गई थी। वहां बीसीएमओ जगराम मीणा ने अभिवादन के बदले उसे फटकार लगाई और दफ्तर के अंदर जाने से रोक दिया। पीड़िता का आरोप है कि हाथ जोड़ने के बावजूद बीसीएमओ भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। हद तो तब हो गई जब अधिकारी ने महिला कार्मिक की तरफ चुटकी बजाते हुए कहा— “भाग यहां से, तुम्हारा काम है रोडों पर घूमना।”
जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति और बदसलूकी
ADM के निर्देश पर गठित डॉ. ओपी महावर की कमेटी हो या भरतपुर जेडी सुनील कुमार की टीम, पीड़िता का आरोप है कि रसूख के चलते हर जगह जांच सिर्फ कागजी खानापूर्ति रही। पीड़िता ने बताया कि 15 अप्रैल को उसे भरतपुर जेडी ऑफिस बुलाया गया, जहां एक महिला कार्मिक ने उसका फोन बंद करवा दिया और बयान लिखते समय उससे दुर्व्यवहार किया। महिला कार्मिक ने पीड़िता पर दबाव डालते हुए कहा— “क्या सबूत है कि तुम दफ्तर गई थी? तुम्हारी जैसी औरतों को सिर्फ रोना और झूठ बोलना आता है।” आरोप है कि उससे जबरदस्ती तीन पेज पर साइन भी करवाए गए।
सम्मानित कार्मिक पर दोहरी मार: वेतन भी रोका
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित महिला अपने अच्छे कार्य की बदौलत तीन बार जिला स्तर पर सम्मानित हो चुकी है। अब बिना किसी गलती के उसका दो माह का वेतन (पेमेंट) भी रोक दिया गया है, जबकि उसकी नौकरी ही घर के खर्चे और बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र सहारा है। पीड़िता का आरोप है कि शिकायत करने के बाद से ही उन पर राजीनामे का दबाव बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ 181 पर फर्जी शिकायतें करवाई जा रही हैं।
निदेशक का सख्त रुख: “जिले का माहौल खराब किया”
जब पीड़िता निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा के पास पहुंची, तो उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए बीसीएमओ जगराम मीणा को फोन किया और फटकार लगाते हुए कहा कि महिला को जयपुर आने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आदेश दिया कि चाहे रात के 9 बजे, लेकिन पेमेंट आज ही डालना है। हालांकि, मंगलवार तक पीड़िता को पेमेंट नहीं मिला है। निदेशक ने भरोसा दिलाया कि करौली के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. जयंतीलाल मीणा और बीसीएमओ जगराम मीणा ने जिले का माहौल खराब कर रखा है, जिन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
‘EXPOSE NOW’ के सवाल
- गुढ़ाचंद्रजी बीसीएमओ जगराम मीणा करीब 33 लाख के गबन का आरोपी है, जिसका खुलासा ऑडिट दल की जांच में हो चुका है; फिर अब तक उसे सस्पेंड क्यों नहीं किया गया?
- दोनों बार की जांच कमेटियों की विफलता पर चिकित्सा विभाग सख्त एक्शन कब लेगा?
- क्या ‘नारी शक्ति वंदन’ का नारा सिर्फ भाषणों तक सीमित रहेगा या इस पीड़ित महिला कार्मिक को वास्तविक न्याय मिलेगा?
