मुख्यमंत्री के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे बूंदी के खनन माफिया, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के अस्तित्व पर संकट !

-बारूद के ढेर पर वन्यजीव, टाइगर कॉरिडोर में गूंजते धमाकों से सहमे ‘बाघ’
-जल स्रोतों और विरासत को निगल रहा माफियाओं का लालच
-रक्षक ही बने भक्षक? खनिज अभियंताओं की ‘मौन सहमति’ और माफियाओं का ‘मौज’

बूंदी। राजस्थान में मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद बूंदी जिले में अवैध खनन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। विडंबना यह है कि जहां एक ओर राज्य सरकार खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने का दावा कर रही है, वहीं बूंदी के खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। गरड़दा और राजपुरा गुड्डा जैसे क्षेत्रों में खनन माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब न तो वन संपदा सुरक्षित है और न ही ऐतिहासिक विरासत।

लाल गोले में सेटेलाइट मैप में दिनदहाड़े लाखों मीट्रिक टन सेंड स्टोन खनन का अवैध परिवहन

टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ‘मौत का तांडव’

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, जिसे 2022 में देश का 52वां और राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, आज अवैध ब्लास्टिंग की गूंज से कराह रहा है। 1,501.89 वर्ग किमी में फैला यह बफर जोन रणथंभौर के बाघों के लिए एक सुरक्षित गलियारे (कॉरिडोर) का काम करता है। लेकिन राजपुरा गुड्डा और मुकंदरा टाइगर रिजर्व की सीमा पर हो रही अवैध ब्लास्टिंग से बाघ, तेंदुए, सांभर और चिंकारा जैसे वन्यजीव विचलित होकर रिहायशी इलाकों की ओर भाग रहे हैं। विस्फोटक पदार्थों के उपयोग से निकलने वाले प्रदूषण ने न केवल जंगल को नष्ट किया है, बल्कि स्थानीय मानव जीवन के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है।

ऐतिहासिक रामतलाब पर प्रहार, विरासत को बारूद से उड़ाया

नमाना थाना क्षेत्र के गुवार और गरड़दा के बीच स्थित प्राचीन रियासतकालीन रामतलाब खनन माफियाओं की लालच का शिकार हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाब की मजबूत दीवार के नीचे उच्च गुणवत्ता वाला सैंड स्टोन (बलुआ पत्थर) दबा है। इसे निकालने के लिए माफियाओं ने दीवार में होल कर जोरदार धमाका किया, जिससे ऐतिहासिक दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज की, लेकिन आरोपियों को महज ‘शांति भंग’ की मामूली धाराओं में गिरफ्तार कर मामले की लीपापोती कर दी। यह तालाब क्षेत्र के किसानों के लिए जल संरक्षण का मुख्य स्रोत है।

प्राचीन राम तलाब की मोटी दीवार को ब्लास्टिंग कर उड़ाया

राजपुरा-गुड्डा सिवायचक भूमि पर माफियाओं का ‘राज’

जिले के राजपुरा पंचायत के पास राजपुरा गुड्डा सड़क मार्ग से 300 मीटर दूरी पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर प्रतिदिन 10 से 15 ट्रोला वाहनों में लाखों मीट्रिक टन सेंड स्टोन की खुले आम निकला जाता है। खान के पास खातेदार किसान ने जब इसकी शिकायत जिला कलेक्टर बूंदी को लिखित शिकायत देकर कार्यवाही की मांग की इस पर खनिज अभियंता बूंदी ने इस अवैध खनन पर रोक लगाने के बजाय खनन माफियाओं की साठ-गांठ के चलते संरक्षण प्रदान करने की चर्चा का विषय बन गया। इस खनन पर कार्यवाही नहीं होने का कारण राजनैतिक तार जोड़कर खुलेआम खनन माफियाओं ने बेशकीमती सैंड स्टोन को निकालने पर बड़ा नेटवर्क बना रखा है। इस सड़क से गुजरते ही आपस में मोबाइल से सूचनाएं देते है जिससे खान के अंदर किसी के पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते ।

कानून की किताब में क्या हैं प्रावधान?

अवैध खनन केवल अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरण के विरुद्ध युद्ध है। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 (MMDR Act) के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। धारा 4 और 21 के अंतर्गत मामला दर्ज करने एवं 5 वर्ष की जेल 5 लाख प्रति हेक्टेयर जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। धारा 21(1) के तहत अवैध खनन में पाए जाने पर 5 वर्ष की कैद एवं भारी जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। धारा 4(1) एवं 4(1A) तहत अवैध खनन या परिवहन करना कानूनी अपराध है।

‘Expose Now’ के तीखे सवाल, प्रशासन कब जागेगा?

-विरासत की बलि क्यों? प्राचीन तालाब को नष्ट करने वाले माफियाओं पर पुलिस ने कठोर धाराओं में मामला दर्ज क्यों नहीं किया?

-बफर जोन में ब्लास्टिंग कैसे? रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की सीमा में विस्फोटक सामग्री कैसे पहुंच रही है? वन विभाग और खनिज विभाग की चुप्पी का राज क्या है?

-किसानों की सुरक्षा का क्या? शिकायत करने वाले किसानों को सुरक्षा देने के बजाय माफियाओं को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?

-मुख्यमंत्री के आदेश कागजों तक सीमित? क्या बूंदी के खनिज विभाग के अधिकारियों के लिए सरकार के आदेशों की कोई अहमियत नहीं है?

-जिम्मेदारी किसकी? यदि इस अवैध खनन और ब्लास्टिंग के कारण किसी वन्यजीव या ग्रामीण की जान जाती है, तो इसका जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा या खनिज विभाग?

बूंदी में अवैध खनन एक ऐसा नासूर बन चुका है जो यहाँ की प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों को निगल रहा है। जब ‘दी पब्लिक हब’ के संवाददाता ने खनिज अभियंता (बूंदी) से इस संबंध में जानकारी चाही, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अधिकारी कार्यवाही करने के बजाय कथित तौर पर खनन माफियाओं को फोन कर सचेत करते नजर आए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन ‘सफेदपोश’ माफियाओं पर चाबुक चलाता है या भ्रष्टाचार की यह गंगा यूँ ही बहती रहेगी।

जिम्मेदारों को नहीं अवैध खनन की जानकारी………

“राजपुरा के पास अवैध खनन की जानकारी मुझे नहीं है। इस पर जांच करके नियमानुसार कार्यवाही कर इसे बंद कराया जाएगा।” — प्रशांत बेडवाल, खनिज अभियंता, खंड प्रथम, बूंदी

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