देश में होने वाले आगामी परिसीमन (Delimitation) का सबसे बड़ा असर राजस्थान की राजनीतिक तस्वीर पर पड़ने वाला है। ताजा आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, नए सिरे से सीमाओं के निर्धारण के बाद राजस्थान में लोकसभा सीटों की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो सकती है। यानी सीधे तौर पर 13 नई सीटों का इजाफा होगा।
वहीं, राज्य विधानसभा की बात करें तो यहाँ की सदस्य संख्या 200 से बढ़कर 270 होने का अनुमान है। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक ढांचे को बदलेगा, बल्कि चुनावी रणनीतियों को भी पूरी तरह रिसेट कर देगा।
सीटों की तुलनात्मक स्थिति
| सदन का नाम | वर्तमान सीटें | परिसीमन के बाद (संभावित) | कुल वृद्धि |
| लोकसभा | 25 | 38 | +13 |
| विधानसभा | 200 | 270 | +70 |
विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी की तैयारी: नया सदन होगा ‘हाई-टेक’
सीटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राजस्थान विधानसभा के स्पीकर वासुदेव देवनानी ने दूरदर्शी कदम उठाया है। उन्होंने जानकारी दी कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विधानसभा के लिए नए सदन (New Hall) के निर्माण की योजना बनाई जा रही है।
- बजट: नए सदन के निर्माण के लिए जरूरी बजट जारी किया जा चुका है।
- क्षमता: नया हॉल इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि उसमें करीब 280 सदस्य एक साथ बैठ सकें।
महिला आरक्षण और सामाजिक संतुलन
केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया और महिला आरक्षण कोटा लागू होने से किसी भी वर्ग या राज्य को नुकसान नहीं होगा। लोकसभा और विधानसभाओं में महिला कोटा के अंतर्गत SC और ST श्रेणियों की महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान होगा, जिससे सामाजिक संतुलन बना रहेगा।
क्या है परिसीमन और क्यों है जरूरी?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय किया जाता है।
- पिछला इतिहास: राजस्थान में 1951 के पहले आम चुनाव में केवल 18 लोकसभा सीटें थीं, जो 1973 के परिसीमन के बाद बढ़कर 25 हुईं।
- आधार: वर्तमान में संसद में पेश बिल के अनुसार, यह प्रक्रिया आबादी के संतुलन को बनाए रखने के लिए की जा रही है। हालांकि, विपक्ष की मांग है कि इसे नवीनतम जनगणना के आधार पर ही अंतिम रूप दिया जाए।
विशेष टिप्पणी: 1973 के बाद अब एक बार फिर राजस्थान की सीमाओं में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 200 से 270 विधायकों का सफर राजस्थान के विकास और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नई दिशा देगा।
