जयपुर, राजस्थान ने ऊर्जा प्रबंधन (Energy Management) के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रचते हुए भविष्य की बिजली जरूरतों के लिए दूरदर्शी कदम उठाया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी (DF) और डिमांड साइड मैनेजमेंट (DSM) से संबंधित ड्राफ्ट रेगुलेशंस–2026 जारी कर दिए हैं।
इस पहल के साथ राजस्थान अब बिजली की मांग को केवल एक ‘खपत’ नहीं, बल्कि एक ‘संसाधन’ (Demand as a Resource) के रूप में इस्तेमाल करेगा।
डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी: ऊर्जा प्रबंधन की अंतिम कड़ी
ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजिताभ शर्मा ने इस ऐतिहासिक कदम की जानकारी देते हुए बताया कि एनर्जी स्टोरेज के बाद अब डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी ऊर्जा प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
अजिताभ शर्मा के विजन की प्रमुख बातें:
- डिमांड एक संसाधन: बिजली की मांग को इस तरह प्रबंधित किया जाएगा कि वह निरंतर, पूर्वानुमेय और आर्थिक रूप से मूल्यवान बने।
- ग्रिड स्थिरता: नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर और विंड) प्रधान ग्रिड के लिए यह तकनीक अत्यंत आवश्यक है, जिससे ग्रिड को अधिक लचीलापन मिलेगा।
- भुगतान की सुविधा: भविष्य में डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी ग्रिड का प्रमुख हिस्सा होगी, जिसका मूल्य तय होगा और इसके बदले भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
- तकनीकी बदलाव: सरकार चरणबद्ध तरीके से डिस्कॉम्स को DERMS और DSO प्रणाली की ओर ले जाने का विजन रखती है।
27 फरवरी तक दे सकते हैं सुझाव

RERC ने इन ड्राफ्ट रेगुलेशंस को अंतिम रूप देने से पहले जनता और हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की है।
- पब्लिक नोटिस: इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं अपनी आपत्तियां या सुझाव 27 फरवरी 2026 तक लिखित रूप में छह प्रतियों में आयोग के रिसीविंग ऑफिसर को भेज सकते हैं।
- दस्तावेज उपलब्धता: ड्राफ्ट रेगुलेशंस और एक्सप्लेनेटरी मेमोरेंडम आयोग की वेबसाइट
www.rerc.rajasthan.gov.inपर उपलब्ध हैं। इन्हें 100 रुपये शुल्क देकर आयोग कार्यालय से भी प्राप्त किया जा सकता है।
आम उपभोक्ताओं को क्या होगा लाभ?
इस नई रेगुलेशन के लागू होने से भविष्य में उपभोक्ताओं को बिजली की खपत के समय में बदलाव करने पर प्रोत्साहन (Incentives) मिल सकते हैं। यह पीक डिमांड के समय ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को कम करेगा और बिजली दरों को स्थिर रखने में मदद करेगा।
