जयपुर। राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में कार्यरत हजारों संवेदकों ने अब अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। आल राजस्थान पी.एच.ई.डी. कॉन्ट्रेक्टर यूनियन के बैनर तले प्रदेश भर के ठेकेदार 13 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे से जलभवन मुख्यालय, जयपुर पर अनिश्चितकालीन धरना और महापड़ाव शुरू कर दिया है।
क्यों मजबूर हुए प्रदेश के ‘विकास के सारथी’?पिछले तीन वर्षों से प्रदेश के विकास कार्यों में जुटे संवेदक अपनी वाजिब मांगों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि उनकी मुख्य समस्याएं निम्नलिखित हैं:-

भुगतान का ‘सूखा’: ढाई साल से अटकी है सांसें:-
प्रदेश के पेयजल प्रोजेक्ट्स में कार्यरत ठेकेदार पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजर रहे हैं। सरकारी सिस्टम की सुस्ती ने इनके सामने जीवन-मरण का प्रश्न खड़ा कर दिया है। प्रदेश में जल जीवन मिशन (JJM) के कार्यों का भुगतान अगस्त-2023 से और अमृत 2.0 योजनाओं का भुगतान मई-2025 से पूरी तरह बंद है। पिछले ढाई साल से रनिंग अकाउंट (RA) बिलों का भुगतान लंबित है। अगर कभी भुगतान होता भी है, तो वह इतने छोटे टुकड़ों में दिया जाता है कि उससे पुरानी उधारी भी चुकता नहीं हो पाती।
GST की दोहरी मार:-
ठेकेदार अपनी जेब से GST का भुगतान कर चुके हैं, लेकिन विभाग द्वारा इसकी प्रतिपूर्ति (Reimbursement) नहीं की जा रही है। यह स्थिति ठेकेदारों को आर्थिक रूप से खोखला कर रही है।
मजदूरों की बदहाली और बाजार में साख का संकट:-
एक ठेकेदार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों का पालनहार होता है। भुगतान रुकने से यह पूरी चेन प्रभावित हो रही है। समय पर पैसा न मिलने के कारण ठेकेदार अपने मजदूरों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उनके घरों में संकट पैदा हो गया है। निर्माण सामग्री बेचने वाले विक्रेताओं ने अब ठेकेदारों को उधार सामान देना बंद कर दिया है। धन के अभाव में प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी सामान खरीदना असंभव हो गया है।
बैंकों का बढ़ता दबाव:-
काम समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों ने भारी-भरकम बैंक लोन लिए थे। अब किश्तें न चुका पाने के कारण वे डिफॉल्टर होने की कगार पर हैं और ब्याज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। लगातार वित्तीय संकट ने ठेकेदारों को मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़ दिया है। बाजार और समाज में अपनी जिम्मेदारियां पूरी न कर पाने के कारण ठेकेदारों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। लगातार बढ़ते कर्ज और सरकारी उदासीनता के कारण ठेकेदार भारी मानसिक दबाव और तनाव में जीने को मजबूर हैं। यह केवल ठेकेदारों की समस्या नहीं है, बल्कि राजस्थान की आम जनता के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

विकास की कछुआ चाल:-
आर्थिक संकट के कारण कई परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है और कुछ जगहों पर कार्य स्थगित करने की नौबत आ गई है। ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मार्मिक अपील की है कि वे सीधे जनता से जुड़े हुए हैं और जनता की इस पीड़ा को समझते हुए तत्काल हस्तक्षेप करें।
ठेकेदारों की स्पष्ट मांगें:-
-लंबित RA बिलों और GST राशि का एकमुश्त और तत्काल भुगतान हो।
-भविष्य में भुगतानों को लेकर एक पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
-“जब ठेकेदार ही संकट में होगा, तो राजस्थान की प्यास कैसे बुझेगी?” यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो राजस्थान के पेयजल प्रोजेक्ट्स पर ‘शटडाउन’ की स्थिति बन सकती है, जो प्रदेश के विकास के लिए एक बड़ा झटका होगा।
अब बातों से नहीं, समाधान से बनेगा काम:-
यूनियन के सचिव नरेंद्र कुमार चौधरी ने प्रमुख शासन सचिव और मुख्य अभियंता (JJM) को पत्र लिखकर दो टूक शब्दों में कहा है कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं। “हमारा ठेकेदारी व्यवसाय समाप्त होने के कगार पर है। अब हमारे पास लोकतांत्रिक तरीके से धरना देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि आगामी दो दिनों में समाधान नहीं हुआ, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी विभाग की होगी।” — नरेंद्र कुमार चौधरी, सचिव (ARPCU)
प्रशासनिक स्तर पर सूचना और सुरक्षा की मांग:-
यूनियन ने आंदोलन को पूर्णतः शांतिपूर्ण और अनुशासित रखने का संकल्प लिया है। इसके लिए बाकायदा पुलिस आयुक्त (जयपुर) को पत्र लिखकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। मुख्य अभियंता (प्रशासन) से प्रदर्शन स्थल पर छाया, टेंट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संवेदकों की इस हुंकार ने महकमे में हलचल मचा दी है। अब देखना यह है कि विभाग कुंभकर्णी नींद से जागकर इन ‘कर्मवीरों’ को न्याय प्रदान करता है या यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।
