राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सोमवार को प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। टोंक सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने राज्य में लंबित पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हार के डर से जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को टाल रही है।
“अधिकारी नहीं कर सकते जनता के काम” सचिन पायलट ने कहा कि वर्तमान में शहरों और गांवों में प्रशासक लगे हुए हैं। अधिकारी कभी भी जनता के रोजमर्रा के कामों को उस संवेदनशीलता से हल नहीं कर पाएंगे जैसे एक निर्वाचित प्रतिनिधि करता है। उन्होंने कहा, “न्यायालय के निर्देश के बावजूद 15 अप्रैल की समय सीमा निकल गई, लेकिन चुनाव नहीं कराए गए। भाजपा को डर है कि परिणाम उनके पक्ष में नहीं आएंगे, इसलिए बहानेबाजी की जा रही है।”
मनरेगा पर बड़ा आरोप: “खत्म करने का रचा जा रहा पाखंड” मनरेगा योजना की बदहाली पर चिंता व्यक्त करते हुए पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार ने योजना का नाम बदलकर केवल पाखंड रचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का असली उद्देश्य मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करना है। पायलट ने कहा, “कल मैं जिन गांवों में गया, वहां मनरेगा का काम पूरी तरह बंद मिला। कांग्रेस के समय लाखों लोग इससे अपनी दिहाड़ी कमाते थे, लेकिन आज ग्रामीण विकास के लिए पैसा नहीं दिया जा रहा है।”
नौकरी और बजट घोषणाओं पर घेरा पायलट ने सरकार के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार सिर्फ पोस्टर और विज्ञापनों के जरिए अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने कहा, “पहले बजट में 4 लाख नौकरियों का वादा किया गया था। अब लगभग ढाई साल (2026 के संदर्भ में) पूरे होने को हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आता। बजट घोषणाएं केवल कागजी साबित हो रही हैं।”
पेयजल संकट पर प्रशासन को सलाह भीषण गर्मी की शुरुआत को देखते हुए पायलट ने प्रशासन को पहले से सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में पानी की किल्लत बढ़ेगी, ऐसे में सरकार को वाटर सप्लाई, टैंकों के वितरण और पाइपलाइन की मरम्मत के काम युद्ध स्तर पर पूरे कर लेने चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके।
