-ठेकेदार को धमकाकर 90 हजार की रिश्वत मांग रहा था अधिकारी
राजस्थान की राजधानी जयपुर के निवारू सैन्य क्षेत्र (Niwaru Cantt) में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। सीबीआई की जोधपुर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (MES) के एक अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मांगने के पुख्ता सबूतों के आधार पर मामला दर्ज किया है।
मामले का विवरण:
भुगतान के बदले ‘कमीशन’ की मांग
यह पूरी कार्रवाई सूरतगढ़ के निवासी विक्रम सिंह राठौड़ की शिकायत पर आधारित है। राठौड़ ‘मैसर्स राकेश चौधरी कान्ट्रैक्टर’ के पार्टनर हैं और उनकी फर्म निवारू आर्मी कैंट में निर्माण और रखरखाव (Construction and Maintenance) के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।
शिकायत के अनुसार, ठेकेदार को हाल ही में उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए लगभग 31 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ था। इसी भुगतान को पास करने की एवज में और भविष्य में किसी भी बाधा को रोकने के लिए, आरोपी अधिकारी सुधांशु सुमन (AGE B/R) ने 90,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।
अधिकारी की धमकी: ‘पैसे नहीं दिए तो रुक जाएगा काम’
आरोपी अधिकारी ने ठेकेदार को स्पष्ट रूप से धमकाया था कि यदि रिश्वत की राशि नहीं दी गई, तो:
- फर्म के बकाया शेष भुगतान को रोक दिया जाएगा।
- भविष्य के किसी भी बिल को पास नहीं किया जाएगा।
- टेंडर कंप्लीशन सर्टिफिकेट (कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र) जारी नहीं किया जाएगा, जिससे ठेकेदार को आगे टेंडर लेने में समस्या हो सकती थी।
CBI का जाल और सत्यापन
शिकायत मिलने के बाद, 8 अप्रैल 2026 को सीबीआई ने जाल बिछाया। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में रिश्वत की मांग का सत्यापन (Verification) किया गया। जब यह स्पष्ट हो गया कि अधिकारी सुधांशु सुमन वास्तव में पद का दुरुपयोग कर पैसे की मांग कर रहा है, तो सीबीआई ने 10 अप्रैल 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली।
इस कार्रवाई ने निवारू सैन्य स्टेशन के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल सीबीआई इस मामले में अधिकारी के अन्य संपर्कों और भ्रष्टाचार के नेटवर्क की जांच कर रही है।
